Pitru Dosh Nivaran Amavasya Remedies : पितृ दोष से मुक्ति चाहिए या धन सहित हो सुख-समृद्धि की कामना अमावस्या पर करें ये महाउपाय-हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों की शांति, दोष निवारण और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। विशेष रूप से पीपल का वृक्ष धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पूजनीय है, क्योंकि शास्त्रों के अनुसार इसमें भगवान विष्णु सहित सभी देवी-देवताओं का वास होता है। अमावस्या के दिन पीपल पूजा करने से पितृ दोष से मुक्ति, धन-समृद्धि की प्राप्ति, शनि दोष शांति और अकाल मृत्यु के भय से रक्षा होती है। यदि यह पूजा सोमवती अमावस्या के दिन की जाए, तो इसका फल कई गुना बढ़ जाता है। अमावस्या पर पीपल पूजा के महाउपाय जानें, जिनसे पितृ दोष से मुक्ति, धन-समृद्धि, शनि दोष निवारण और मनोकामना पूर्ति संभव है। सोमवती अमावस्या पर विशेष फलदायी।
अमावस्या पर पीपल पूजा के महाउपाय
पितृ दोष मुक्ति और पितृ शांति के लिए उपाय:(विशेषकर सर्वपितृ अमावस्या पर)-एक लोटे में दूध, जल, काले तिल और जौ मिलाकर पीपल की जड़ में अर्पित करें। इसके बाद पंचबलि दें,पंचबलि यानि पांच जीवो के लिए भोजन-जिसमें ब्राह्मण,गाय
,कुत्ता,कौवा,चींटी आदि को भों सामग्री में जो वो खा सकें उनके निमित्त भोजन की व्यवस्था अवश्य करें। यह उपाय पितरों को तृप्त करता है और पितृ दोष के दुष्प्रभाव समाप्त करता है।
धन-समृद्धि और सुख-शांति के लिए उपाय
अमावस्या या शनिवार को पीपल के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। पीपल के वृक्ष की 108 बार परिक्रमा करें।हर परिक्रमा के साथ एक मिठाई अर्पित करें। इस दौरान ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें। सोमवती या किसी भी अमावस्या पर किया गया यह उपाय अत्यंत फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इससे धन की बाधाएं दूर होती हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है। इसके अलावा शनि दोष से मुक्ति के लिए को विशेष उपाय हैं जो इस प्रकार हैं जैसे – पहला पीपल के पेड़ में कलावा (मौली) बांधें, दूसरा इसके बाद 108 बार परिक्रमा करें क्योंकि यह उपाय शनि दोष, ढैय्या और साढ़ेसाती के प्रभाव को कम करता है।

विवाह और संतान बाधा निवारण के लिए
विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु और पारिवारिक सुख के लिए पीपल पूजा कर सकती हैं।
सूर्यास्त के बाद केवल परिक्रमा की जा सकती है (स्पर्श नहीं)।
नियमित श्रद्धा से की गई पूजा से विवाह व संतान संबंधी बाधाएं दूर होती हैं।
पीपल पूजा के नियम (Rules of Peepal Puja)
पीपल पूजा का नियम – पीपल के वृक्ष की पूजा हमेशा विधि-विधान से करनी चाहिए जिसमें विशेष नियम में सबसे पहले समय का ध्यान रखना चाहिए और पीपल वृक्ष की पूजा का विशेष या श्रेष्ठ समय सुबह या सूर्योदय के तुरंत बाद का होता है सूर्यास्त के बाद पीपल को छूना वर्जित है मन गया है लेकिन केवल परिक्रमा की जा सकती है।
पीपल पूजा का मंत्र- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” या “ॐ नमो नारायणाय” यह मंत्र जप माला में या परिक्रमा के समय कर सकते हैं।
पीपल वृक्ष की परिक्रमा के नियम- पीपल वृक्ष की परिक्रमा हमेशा ही विषम संख्या में करना चाहिए जैसे – 7, 11, 21, 108 और विशेष यह की हर परिक्रमा के बाद पीपल वृक्ष को प्रणाम अवश्य करें।

पीपल पूजा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
पीपल के वृक्ष में भगवान विष्णु, ब्रह्मा और शिव का वास माना गया है।
यह पूजा पापों का नाश, मोक्ष की प्राप्ति, और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है।
साथ ही यह वास्तु दोष, मानसिक तनाव और नकारात्मकता को दूर करने में सहायक है।
वैज्ञानिक दृष्टि से भी पीपल को स्वास्थ्यवर्धक और प्राणवायु देने वाला वृक्ष माना गया है।
निष्कर्ष (Conclusion)-अमावस्या पर पीपल पूजा न केवल एक धार्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह जीवन की कई समस्याओं का सरल और प्रभावी समाधान भी है। पितृ दोष, धन अभाव, शनि बाधा या पारिवारिक कष्ट-इन सभी से मुक्ति के लिए श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पीपल पूजा अत्यंत लाभकारी सिद्ध होती है। विशेष रूप से सोमवती अमावस्या पर किए गए ये उपाय जीवन में सुख, समृद्धि और शांति का स्थायी मार्ग प्रशस्त करते हैं।
