सरकार का बयान: पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं, घबराकर खरीदारी न करें

Petrol Shortage India: देश में पेट्रोल-डीजल की कमी को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच केंद्र सरकार ने साफ किया है कि ईंधन (Fuel Supply) को लेकर किसी तरह की चिंता की जरूरत नहीं है। सरकार ने बुधवार को स्पष्ट किया कि देश में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार (Crude Oil Reserves) मौजूद है और किसी भी पेट्रोल पंप पर पेट्रोल या डीजल की कोई कमी नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि कीमतों में किसी तरह की बढ़ोतरी (Price Hike) नहीं हुई है।

दिल्ली में हुई इंटर-मिनिस्ट्रियल ब्रीफिंग के दौरान पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा (Sujata Sharma) ने लोगों से अपील की कि वे डर और घबराहट में जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल न खरीदें। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों में कई जगहों पर पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारें देखी गई हैं, जो पैनिक बाइंग (Panic Buying) की स्थिति को दर्शाती हैं, जबकि असल में ऐसी कोई कमी नहीं है।

सरकार के मुताबिक, देश के पास सालाना करीब 26 करोड़ टन कच्चा तेल रिफाइन करने की क्षमता है और सभी सप्लाई टर्मिनलों पर पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। सुजाता शर्मा ने यह भी भरोसा दिलाया कि घरेलू पाइप्ड नेचुरल गैस और सीएनजी की सप्लाई भी पूरी तरह सामान्य बनी हुई है। इसके अलावा राज्यों को निर्देश दिए गए हैं कि वे PNG नेटवर्क के विस्तार में सहयोग करें और 10% अतिरिक्त कॉमर्शियल एलपीजी (Commercial LPG) उपलब्ध कराने की व्यवस्था करें।

दरअसल, मौजूदा हालात के पीछे ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी तनाव (Iran Conflict) को बड़ा कारण माना जा रहा है। इस जंग का असर खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर पड़ा है, जो दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों (Oil Supply Route) में से एक है। यह जलडमरूमध्य (Strait) फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को अरब सागर (Arabian Sea) से जोड़ता है और दुनिया के करीब 20% पेट्रोलियम की सप्लाई इसी रास्ते से होती है।

भारत की बात करें तो देश अपनी जरूरत का लगभग 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रूट से आयात करता है। ऐसे में इस मार्ग पर खतरा बढ़ने से लोगों में चिंता बढ़ी है, लेकिन सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल सप्लाई चेन पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी।

सरकार का साफ संदेश है—घबराने की नहीं, समझदारी से काम लेने की जरूरत है। क्योंकि पैनिक बाइंग (Panic Buying) से ही कृत्रिम कमी पैदा होती है, जबकि वास्तविकता में देश के पास पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं।

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