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Pawanraje Nimbalkar Murder Case : सियासी वर्चस्व की खूनी जंग : 20 साल का इंतजार, 128 गवाह, पर पवनराजे हत्याकांड में सभी आरोपी बरी 

Pawanraje Nimbalkar Murder Case : 3 जून 2006 की वह शाम महाराष्ट्र की राजनीति के लिए एक काला अध्याय बन गई, जब नवी मुंबई के कलंबोली इलाके में कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर समद काजी को गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना महाराष्ट्र में सनसनी फैलाने वाली थी। उस समय पवनराजे निंबालकर महाराष्ट्र कांग्रेस के उभरते हुए नेताओं में गिने जाते थे। वह मुंबई से उस्मानाबाद (अब धाराशिव) जा रहे थे, तभी उनकी कार को रोककर दो हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं। इस घटना में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। 

पवनराजे निंबालकर हत्याकांड क्या है? 

पवनराजे निंबालकर की हत्या केवल एक राजनीतिक हत्या नहीं थी, बल्कि महाराष्ट्र की अंदरूनी राजनीति में चल रही वर्चस्व की लड़ाई और दुश्मनी का मामला था। जांच में सामने आया कि इस हत्याकांड का संबंध राजनीतिक दुश्मनी और इलाके में वर्चस्व की लड़ाई से था। इस मामले में पूर्व सांसद पद्मसिंह पाटिल समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। सीबीआई ने आरोप लगाया था कि बढ़ती प्रतिस्पर्धा और वर्चस्व की लड़ाई के कारण इस हत्या की साजिश रची गई। हालांकि, पद्मसिंह पाटिल ने इन आरोपों को शुरू से ही खारिज किया।

न्याय के लिए 20 सालों से भटक रहा परिवार 

शुरुआती जांच से असंतुष्ट निंबालकर परिवार ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया, जिसके बाद इस मामले की जांच महाराष्ट्र पुलिस से हटाकर सीबीआई को सौंप दी गई। 2009 में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की और पद्मसिंह पाटिल को मुख्य आरोपी और साजिशकर्ता बताया। जांच में बताया गया कि हत्या के लिए 30 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी। सीबीआई का कहना था कि इस साजिश में कई लोग शामिल थे, जिनमें कारोबारी, पूर्व सरकारी अधिकारी और कथित शूटर भी थे।

20 साल बाद केस के सभी आरोपी बरी 

यह मामला देश के चर्चित लंबे समय तक चलने वाले आपराधिक मामलों में शामिल हो गया। जुलाई 2011 में शुरू हुए ट्रायल में अदालत ने 128 गवाहों के बयान दर्ज किए। इनमें सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे का नाम भी शामिल था। आरोपियों ने दावा किया कि उन्हें भी निशाना बनाने की योजना थी। करीब 20 साल चले इस मुकदमे के अंत में मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया।

सीबीआई ने कोर्ट के खिलाफ जाने की चुनौती दी 

अदालत के फैसले के बाद सीबीआई ने इसे चुनौती देने का फैसला किया है। एजेंसी का कहना है कि उसने अदालत के सामने मजबूत सबूत पेश किए थे और वह हाई कोर्ट जाएगी। वहीं, आरोपी नेताओं और उनके परिवार वालों को इस फैसले से बड़ी राहत मिली है। 

कौन थे पवनराजे निंबालकर? 

पवनराजे निंबालकर उस समय के प्रभावशाली कांग्रेस नेता थे। वह सहकारी संस्थाओं से जुड़े रहे और धीरे-धीरे अपनी राजनीतिक पहचान बना रहे थे। कहा जाता है कि शुरुआत में उनका सफर पद्मसिंह पाटिल के समर्थन से शुरू हुआ, लेकिन समय के साथ दोनों नेताओं के बीच दूरी बढ़ गई। निंबालकर के बेटे और शिवसेना (UBT) सांसद ओमराजे निंबालकर ने भी अदालत में बताया कि उनके पिता और पद्मसिंह पाटिल के बीच रिश्ते खराब हो गए थे। उन्होंने पुलिस में भी शिकायतें दर्ज कराई थीं। 

20 साल बाद आए इस फैसले ने फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि इतने लंबे समय तक न्याय पाने में क्यों इतना वक्त लगता है। यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में चल रहे वर्चस्व और दुश्मनी का प्रतीक बन गया है।

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