NMC new rule: देश में अनएमसी रेगुलेशन को लेकर एक नया विवाद देखने को मिला है संसद की एक समिति में पाया गया कि नेशनल मेडिकल कमिश्नर ने कुछ हम नियम बिना कानून मंत्रालय की मंजूरी के जारी किए हैं। इससे पर समिति ने कड़ी नाराजगी बताते हुए एक गंभीर प्रक्रिया की चूक बताया है।
क्या है पूरा मामला? NMC Regulations का
संसद की लोकसभा कमेटी की तरफ से सबोर्डिनेट रेगुलेशन ने अपनी समीक्षा में पाया की एमसी के मेडिकल शिक्षा से जुड़े कई नियम सीधे जारी कर दिए गए हैं। आमतौर पर ऐसे नियम को लागू करने से पहले कानून मंत्रालय से कानूनी जांच होनी जरूरी होती है लेकिन इस प्रक्रिया का पालन ही नहीं किया गया है।
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कानून मंत्रालय की मंजूरी क्यों है जरूरी?
किसी भी सरकारी नियम ए रेगुलेशन को लागू करने से पहले मिनिस्ट्री आफ लॉ एंड जस्टिस की मंजूरी लेना जरूरी होता है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि नियम संविधान और मौजूदा कानून के अनुसार बने हैं। बिना किसी कानूनी जांच के बनाए गए नियम भविष्य में अदालत में चुनौती का भी सामना कर सकते हैं।
इसपर समिति ने क्या जताई चिंता?
संसदीय समिति ने कहा कि यह प्रक्रिया अनिवार्य है और इसे नजअंदाज नहीं किया जा सकता है। समिति के अनुसार ऐसे नियम कानूनी रूप से कमजोर हो सकते हैं इससे प्रशासनिक भ्रम की स्थिति बनी रह सकती है और मेडिकल शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता भी प्रभावित हो सकती है। इस समिति ने स्वास्थ्य मंत्रालय को निर्देश दिया है कि आगे से सभी नियम को तय प्रक्रिया के अनुसार ही करें।
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इसमें Subordinate Legislation क्या होता है?
हमारे भारत में सांसद मुख्य कानून को बनती है लेकिन नियम और प्रक्रिया तय करने की जिम्मेदारी कई बार कुछ संस्थाओं को दे दी जाती है इसे सबोर्डिनेट लैग्निशन कहा जाता है। इसी कारण से संसद की सिमिटियां इन नियमों को निगरानी करती है ताकि किसी भी तरह की अनियमित को होने से रोका जा सके। NMC Regulations से जुड़ा यह मामला दिखाता है कि किसी भी नीति से ज्यादा महत्वपूर्ण उसकी प्रक्रिया होती है। यह जानकारी the Hindu की रिपोर्ट पर आधारित है।

