Panchatantra Stories Is Digital Detox for Kids : हाथी-गौरैया की कहानी,बच्चों के लिए प्रेरक सीख-आज के डिजिटल युग में बच्चे मोबाइल, टैबलेट और टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में अत्यधिक समय बिता रहे हैं। इससे न केवल उनकी आँखों और स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, बल्कि उनकी कल्पनाशक्ति, धैर्य, सामाजिकता और नैतिक विकास भी प्रभावित होता है।ऐसे समय में पंचतंत्र की कहानियाँ बच्चों के लिए एक प्रभावी विकल्प बन सकती हैं, जो उन्हें स्क्रीन से दूर कर जीवन के वास्तविक मूल्यों से जोड़ती हैं।“हाथी और गौरैया” ऐसी ही एक प्रेरक कथा है, जो बच्चों को बुद्धि, सहयोग, धैर्य और प्रकृति से जुड़ाव का संदेश देती है। पंचतंत्र की प्रसिद्ध कहानी “हाथी और गौरैया” के माध्यम से जानिए कैसे यह कथा बच्चों को मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से दूरी बनाकर बुद्धि, एकता और मित्रता का महत्व सिखाती है।
कहानी का संक्षिप्त सार
एक जंगल में हाथियों का एक झुंड रहता था। वे रोज़ गुजरते समय पेड़ों पर बसे गौरैया के घोंसलों को नुकसान पहुंचा देते, जिससे उनके अंडे टूट जाते।कमज़ोर होने के बावजूद गौरैया हार नहीं मानती। वह अपने छोटे-छोटे मित्रों कठफोड़वा, मक्खी और मेढ़क-की मदद लेती है। सब मिलकर एक बुद्धिमत्तापूर्ण योजना बनाते हैं और अंततः हाथियों को अपनी गलती का एहसास कराते हैं। इस तरह बुद्धि और एकता के बल पर छोटे जीव भी बड़े और शक्तिशाली हाथियों पर विजय पा लेते हैं।
बच्चों के लिए नैतिक और व्यवहारिक सीख
- एकता में शक्ति-यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि मिल-जुलकर काम करने से असंभव भी संभव हो जाता है।
- बुद्धि, बल से बड़ी-बिना हिंसा के, केवल समझदारी और योजना से समस्या का समाधान संभव है।
- आत्मविश्वास और धैर्य-गौरैया बच्चों को सिखाती है कि कमज़ोर होने का मतलब हार मानना नहीं होता।
मोबाइल से दूरी बनाने में कैसे सहायक है यह कहानी ?

कहानी सुनना और पढ़ना बच्चों को स्क्रीन से हटाकर कल्पनालोक में ले जाता है।
माता-पिता जब कहानी सुनाते हैं तो संवाद और भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है।
प्रकृति, पशु-पक्षियों पर आधारित कथाएँ बच्चों को वास्तविक दुनिया से जोड़ती हैं।
कहानी के बाद बच्चे चित्र बनाना, नाटक करना या चर्चा करना पसंद करते हैं-यह सब स्क्रीन-फ्री गतिविधियां हैं।
माता-पिता और शिक्षकों के लिए सुझाव
सोने से पहले मोबाइल देने की बजाय पंचतंत्र की कहानी सुनाने की आदत डालें। कहानी सुनने या पढ़ने के बाद बच्चों से पूछें-अगर तुम गौरैया होते तो क्या करते ? ताकि ये पता चल सके की बच्चों पर कहानी का क्या प्रभाव पड़ा। कहानी को ड्रॉइंग, रोल-प्ले या कविता से जोड़ें। सप्ताह में एक दिन “नो-मोबाइल स्टोरी डे” तय करें।

निष्कर्ष (Conclusion)-“हाथी और गौरैया” केवल एक पंचतंत्र कथा नहीं, बल्कि आज के समय की एक गहरी सीख है। यह कहानी बच्चों को बताती है कि बुद्धि, एकता और संवाद से हर समस्या का समाधान संभव है। मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से भरी दुनिया में ऐसी कहानियां बच्चों को संस्कार, कल्पना और संतुलित जीवन की ओर लौटाने का सशक्त माध्यम बन सकती हैं। यदि हम चाहते हैं कि बच्चे समझदार,संवेदनशील और आत्मनिर्भर बनें, तो उन्हें फिर से कहानियों की दुनिया से जोड़ना होगा।
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