Pakistan Afghanistan War News: भारत के दो पडोसी देश पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान, दोनों इस्लामिक देश एक दूसरे के कट्टर दुश्मन (Pakistan Afghanistan Enmity History) बन गए हैं. अफ़ग़ानिस्तान की तालिबान सरकार, पाकिस्तानियों को घर में घुस कर मार रही है वहीं बदले में पाकिस्तान की सेना भी जवाबी कार्रवाई कर रही है मगर उसके निशाने में सिविलियन्स हैं. आज हम इन दोनों मुल्कों की दुश्मनी के इतिहास को समझने की कोशिश करेंगे।
अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान की दुश्मनी कब शुरू हुई?
When did the enmity between Afghanistan and Pakistan start: पाकिस्तान–अफ़ग़ानिस्तान तनाव की जड़ 19वीं सदी की उस सीमा में है जिसे 1893 में ब्रिटिश भारत और अफ़ग़ान अमीर के बीच तय किया गया था—ड्यूरंड लाइन (Durand Line)। 1947 में पाकिस्तान के बनने के बाद Afghanistan ने संयुक्त राष्ट्र में Pakistan के प्रवेश का विरोध किया और ड्यूरंड लाइन को औपचारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा मानने से इनकार किया।

अफ़ग़ानिस्तान का तर्क रहा कि यह रेखा पश्तून इलाकों को दो हिस्सों में बाँटती है और “पश्तूनिस्तान” (Pashtunistan) का सवाल अनसुलझा है। पाकिस्तान ड्यूरंड लाइन को वैध, अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है। यही मूल विवाद आज तक रिश्तों की पृष्ठभूमि तय करता है।
1979 में Soviet Union के अफ़ग़ानिस्तान पर आक्रमण के बाद पाकिस्तान, अमेरिका और सऊदी अरब ने मुजाहिदीन को समर्थन दिया। इस दौर में लाखों अफ़ग़ान शरणार्थी पाकिस्तान पहुँचे।

सोवियत वापसी (1989) के बाद अफ़ग़ान गृहयुद्ध में पाकिस्तान ने 1990 के दशक में उभरे Taliban का समर्थन किया। पाकिस्तान की सैन्य-रणनीतिक सोच में “Strategic Depth” (भारत के साथ संभावित युद्ध की स्थिति में पश्चिमी सीमा पर अनुकूल सरकार) की अवधारणा चर्चा में रही। 1996–2001 के पहले तालिबान शासन को पाकिस्तान ने मान्यता दी, जिससे काबुल–इस्लामाबाद रिश्ते उस समय अपेक्षाकृत करीब थे।
9/11 के बाद पलटा समीकरण
2001 में 9/11 के बाद अमेरिका-नाटो ने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान सरकार को हटाया। पाकिस्तान अमेरिका का सहयोगी बना, लेकिन काबुल की नई सरकारें बार-बार आरोप लगाती रहीं कि तालिबान और TTP (Tehreek-e-Taliban Pakistan) जैसे गुटों को पाकिस्तानी ज़मीन पर शरण/सपोर्ट मिलता है।

पाकिस्तान का आरोप रहा कि अफ़ग़ान भूमि से TTP उसके खिलाफ हमले करती है। इसी बीच पाकिस्तान ने ड्यूरंड लाइन पर बाड़ शुरू की, जिसका अफ़ग़ान पक्ष कई जगह विरोध करता रहा। 2014 के बाद पाकिस्तान में TTP हमलों में तेज़ी आई, जिससे अविश्वास और गहरा हुआ।
2021 के बाद: तालिबान की वापसी और नई खटास
अगस्त 2021 में तालिबान की वापसी के बाद शुरुआती दिनों में उम्मीद थी कि इस्लामी विचारधारा की समानता रिश्तों को सहज करेगी। लेकिन ज़मीन पर उल्टा हुआ—पाकिस्तान का कहना है कि TTP को अफ़ग़ानिस्तान में पनाह मिलती है; काबुल इसे नकारता है।

सीमा चौकियों—तोरख़म (Torkham) और चमन–स्पिन बोल्दक—पर समय-समय पर झड़पें हुईं, सीमा पार गोलीबारी और हवाई हमलों के आरोप लगे। पाकिस्तान ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला दिया; अफ़ग़ान तालिबान ने संप्रभुता के उल्लंघन की बात की। 2023–2024 में पाकिस्तान द्वारा “ग़ैर-क़ानूनी प्रवासियों” की वापसी नीति से भी तनाव बढ़ा, क्योंकि बड़ी संख्या में अफ़ग़ान शरणार्थी पाकिस्तान में दशकों से रह रहे थे।
क्या पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान कभी दोस्त थे?
- 1996–2001: पहले तालिबान शासन के दौरान रिश्ते अपेक्षाकृत घनिष्ठ थे; पाकिस्तान ने काबुल सरकार को मान्यता दी।
- 2001–2021: अमेरिका समर्थित काबुल सरकार के साथ रिश्ते उतार-चढ़ाव भरे और अविश्वास से भरे रहे।
- 2021 के बाद: वैचारिक समानता के बावजूद सुरक्षा, सीमा और TTP के मुद्दे पर मतभेद तेज़ हुए।
पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की दुश्मनी की वजह
दोनों इस्लामी देश हैं, लेकिन टकराव के मुख्य कारण हैं:
- ड्यूरंड लाइन और पश्तून प्रश्न
- TTP/आतंकी गुटों की मौजूदगी के आरोप
- सीमा प्रबंधन और बाड़
- शरणार्थी संकट
- क्षेत्रीय शक्ति-संतुलन (भारत, अमेरिका, चीन की भूमिका)
पाकिस्तान–अफ़ग़ानिस्तान संबंध धर्म से अधिक सीमा, सुरक्षा और रणनीतिक हितों से संचालित रहे हैं। कभी सामरिक निकटता, तो कभी गहरा अविश्वास—यह रिश्ता दक्षिण एशिया की सबसे जटिल भू-राजनीतिक पहेलियों में से एक है। जब तक ड्यूरंड लाइन पर सहमति, TTP जैसे गुटों पर ठोस कार्रवाई और शरणार्थी/सीमा प्रबंधन पर संस्थागत तंत्र नहीं बनता, स्थायी शांति कठिन दिखाई देती है।
