पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि ‘Operation Epic Fury’ के तहत अमेरिकी नौसेना के लड़ाकू विमानों ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई समय-सीमा समाप्त होने के साथ ही यह सैन्य कार्रवाई शुरू हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र में बड़े युद्ध का खतरा मंडराने लगा है।
USS अब्राहम लिंकन से शुरू हुआ एक्शन
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कुछ दृश्य साझा किए हैं, जिसमें विमान वाहक पोत USS अब्राहम लिंकन (CVN 72) से लड़ाकू विमानों को उड़ान भरते हुए देखा जा सकता है। इन विमानों का मुख्य लक्ष्य ईरान के भीतर स्थित सामरिक और सैन्य ठिकाने हैं। Operation Epic Fury के शुरू होने का मतलब है कि अब कूटनीति के रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं और सैन्य बल का प्रयोग प्राथमिकता बन गया है।
अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, यह ऑपरेशन उन ठिकानों को निशाना बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है जो अमेरिकी हितों और वैश्विक व्यापारिक मार्गों के लिए खतरा बने हुए थे। विशेष रूप से ईरान के ऊर्जा ढांचे और बुनियादी ढांचे को इस हमले के दायरे में रखा गया है।
ट्रंप की ‘वन नाइट’ चेतावनी और डेडलाइन
इस हमले की पृष्ठभूमि सोमवार को ही तैयार हो गई थी, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान बेहद कड़े तेवर अपनाए थे। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि पूरे देश (ईरान) को एक ही रात में खत्म किया जा सकता है। उन्होंने इसके लिए मंगलवार रात 8:00 बजे (पूर्वी समय) की डेडलाइन तय की थी।
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ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपनी पोस्ट में चेतावनी देते हुए लिखा था कि यदि ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को नहीं खोला, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने मंगलवार को “पावर प्लांट डे और ब्रिज डे” करार दिया था, जिसका अर्थ ईरान के बिजली घरों और पुलों को निशाना बनाना था।
होर्मुज जलडमरूमध्य का सामरिक महत्व
ईरान और अमेरिका के बीच ताजा विवाद की मुख्य जड़ होर्मुज जलडमरूमध्य है। वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान द्वारा इस रास्ते को बंद करने की धमकी को अमेरिका ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर हमले के रूप में देखा है। राष्ट्रपति ट्रंप का रुख साफ है कि या तो ईरान बातचीत की मेज पर आए या फिर अपने विनाश के लिए तैयार रहे।
ईरान का पलटवार: ‘हम बलिदान को तैयार’
दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरानी जनता अपने देश की रक्षा के लिए जान देने को तैयार है। पेजेशकियन ने दावा किया कि 1.4 करोड़ से अधिक ईरानियों ने देश की रक्षा के लिए खुद को समर्पित करने का संकल्प लिया है। ईरानी राष्ट्रपति ने स्वयं को भी इस सूची में शामिल बताते हुए कहा कि वे किसी भी हमले का सामना करने के लिए तैयार हैं।

क्षेत्रीय स्थिरता पर मंडराता संकट
विशेषज्ञों का मानना है कि Operation Epic Fury केवल एक सीमित स्ट्राइक तक सीमित नहीं रहेगा। यदि ईरान जवाबी कार्रवाई करता है, तो यह संघर्ष लेबनान, सीरिया और इराक तक फैल सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पहले ही चेतावनी दी है कि वे ईरान की ऊर्जा और नागरिक बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तहस-नहस करने की क्षमता रखते हैं।
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ईरान के भीतर से आ रही रिपोर्ट्स बताती हैं कि नागरिक ठिकानों पर भी दहशत का माहौल है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटनाक्रम पर करीब से नजर रख रहा है क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में इस तनाव के कारण भारी उछाल आने की आशंका है।
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