भोपाल। मध्य प्रदेश में कागजों पर संचालित फर्जी एनजीओ, ट्रस्ट और सोसायटियों पर नकेल कसते हुए प्रशासन ने राज्य की करीब 3.5 लाख संस्थाओं के कामकाज, चुनाव और वित्तीय लेनदेन को पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी बना दिया है। रजिस्ट्रार फर्म्स एवं सोसायटीज द्वारा उठाए गए इस कदम से फर्जी और बिना ऑडिट वाली संस्थाओं की पहचान आसान हो जाएगी।
1 लाख से अधिक के लेन-देन पर CA का UDIN जरूरी
वित्तीय पारदर्शिता (धारा-28) के तहत 30 अप्रैल से 90 दिनों के भीतर वार्षिक ब्यौरा पोर्टल पर देना होगा। 1 लाख रुपये से अधिक के लेन-देन पर सीए का यूडीआईएन (UDIN) नंबर और ऑडिट रिपोर्ट अपलोड करना जरूरी है, साथ ही कोषाध्यक्ष व अध्यक्ष/सचिव का सत्यापन आवश्यक है।
ऑनलाइन सुधरेंगी आपत्तियां, बाबुओं और एजेंटों से मिलेगी मुक्ति
प्रक्रिया के डिजिटल होने से आपत्तियों का सुधार ऑनलाइन संभव है, कंप्यूटर जनरेटेड पावती मिलती है, और दफ्तरों तथा एजेंटों पर निर्भरता समाप्त हो गई है।
ई-साइन (E-Sign) हुआ अनिवार्य: सहमति के बिना नहीं बनेगा कोई सदस्य, धारा-27 के तहत इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर (E-Sign) को अनिवार्य किया गया है।
समय सीमा व शुल्क: बैठक के 45 दिनों के भीतर कार्यकारिणी सूची देनी होगी। समय पर 1,000 रुपये और देरी पर 2,000 रुपये लेट फीस तय की गई है।
सत्यापन और रोक: सभी पदाधिकारियों के ई-प्रमाणीकरण के बिना आवेदन मान्य नहीं होगा, जिससे सहमति के बिना किसी को सदस्य बनाए जाने के फर्जीवाड़े पर रोक लगेगी।




