वैश्विक संकेतों की कमजोरी के बीच मंगलवार को गिफ्ट निफ्टी में 100 अंकों से अधिक की गिरावट देखी गई है जिससे भारतीय शेयर बाजार में कमजोर शुरुआती संकेत देखने को मिल रहे हैं। Crude Oil की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने से और मध्य पूर्व देशों में तनाव बढ़ने से निवेश करने वाले लोगों में चिंता का माहौल देखा गया है। इसका असर बैंकिंग ऑटो एविएशन और आईटी सेक्टर के शेयर पर भी देखने को मिल रहा है।
Crude Oil में तेजी से बाजार की चिंता
इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल भारतीय बाजार के लिए चिंता का विषय बन गया है भारत अपनी उर्जा जरूर का बड़ा हिस्सा आयात करता है इसलिए तेल महंगा होने से देश का आयात बढ़ सकता है। बाजार विश्लेषकों के अनुसार इसमें महंगाई और चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
मंगलवार सुबह गिफ्ट निफ्टी करीब 110 अंक के नीचे बिजनेस करता दिख रहा था जिससे यह संकेत मिलता है कि घरेलू इक्विटी इंडेक्स निफ्टी 50 और सेंसेक्स दबाव में खुल सकते हैं। बाजार की विशेषज्ञों के अनुसार विदेश के निवेश करने वाले लोगों की बिग वाली और कमजोर वैश्विक संकेत भी बाजार की धारणा को प्रभावित करते हैं।
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किन सेक्टर्स पर दिख सकता है crude oil का असर
Crude Oil की कीमतों में तेजी का सीधा असर उन सेक्टर पर देखने को मिल सकता है जिनकी लागत ईंधन पर अधिक निर्भर होती है। एविएशन पेंट केमिकल और ऑटो सेक्टर की कंपनियों के मार्जिन पर प्रेशर बढ़ सकता है इसके अलावा लॉजिस्टिक लागत बढ़ने से कई सारी कंपनियों के परिचालन लागत भी प्रभावित होने की उम्मीदहै। हालांकि तेल उत्पादन से जुड़ी कंपनियों को इससे फायदा मिलने की संभावना है बाजार विश्लेषकों के अनुसार ओएनजीसी और ऑयल इंडिया जैसी कंपनी के शेयर में मजबूती देखने को मिल सकती है। क्योंकि ऊंचे क्रूड ऑयल उनकी आय को समर्थन देते हैं।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली की चुनौती
स्टॉक एक्सचेंज डाटा के अनुसार हाल ही के सत्र में विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय बाजार में बिकवाली करते नजर आए हैं वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चित और डॉलर की मजबूती के कारण निवेश करने वाले लोग सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर अपना ध्यान दे रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक उच्च लेवल बना रहता है तो भारतीय रुपए पर ज्यादा दबाव पड़ेगा। इससे आयात आधारित कंपनियों की लागत और बढ़ने की आशंका है।
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आगे बाजार की नजर किन संकेतों पर होगी
बाजार की अगली दिशा वैश्विक भू राजनीतिक घटनाक्रम क्रूड ऑयल की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर होने वालीहै। निवेश करने वाले लोग अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति डॉलर इंडेक्स और आने वाली महंगाई के आंकड़ों पर अपने नजर बनाए हुएहैं। बाजार विश्लेषण के अनुसार अल्पकाल में बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है हालांकि मजबूत घरेलू आर्थिक संकट गिरावट को सीमित कर सकते हैं इसको निवेश की सलाह नहीं समझे।

