दुनिया भर की करोड़ों लोग क्रॉनिक हेपिटाइटिस बी से प्रभावित है लंबे समय तक या बीमारी पूरी तरह से ठीक नहीं हो पाती थी और मरीजों को सालों तक इसकी दवाई लेनीपड़ती थी। लेकिन अब यूरोपीय मेडिकल जर्नल में प्रकाशित नई रिपोर्ट के अनुसार HBV Cure की दिशा में एक रिसर्च में एक नई उम्मीद दिखाई है। हालांकि विशेषज्ञों के मुताबिक अभी पूरा इलाज उपलब्ध नहीं है लेकिन कुछ थेरेपी उत्साह जनक रिजल्ट जरूर दिखा रही है।

HBV Cure का मतलब क्या होता है?
रिसर्च करने वाले लोगों के अनुसार इसका मतलब वायरस का शरीर से पूरी तरह से खत्म होना नहीं है इसे एक तरह का फंक्शनल कोर (Functional Cure) कहा जाता है। इसका मतलब होता है कि पेशेंट के शरीर में वायरस इतना नियंत्रित हो जाएगा कि खून में हेपेटाइटिस बी सर्फेस एंटीजन दिखाई नहीं देगा वायरस संक्रिया नहीं रहेगा और इलाज बंद करने के बाद भी बीमारी दोबारा नहीं बढ़ेगी। यह स्थिति मरीज के लिए लंबे समय तक बेहतर स्वास्थ्य संकट बताई जाती है।
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मौजूदा इलाज की सबसे बड़ी चुनौती क्या है।
आज इस्तेमाल होने वाली एंटीवायरस दवाएं वायरस की संख्या को काफी हद तक काम कर देती है और लीवर को नुकसान से बचाने में भी मदद करतीहै। लेकिन इन दावों से वायरस पूरी तरह से खत्म नहीं हो जाता है यही कारण है कि ज्यादातर मरीजों को लंबे समय तक या फिर कई मामलों में जीवन भर इसकी दवाई लेनी पड़ती है। डॉक्टर के मुताबिक इसी वजह से नए और अधिक प्रभावी इलाज की जरूरत अब महसूस होने लगी है।
नई थेरेपी से क्यों बढ़ी है उम्मीद?
पिछले कुछ सालों में वैज्ञानिकों ने siRNA आधारित दवाई, Peginterferon alfa और Therapeutic Vaccine जैसे नई-नई तकनीक पर काम किया है। शुरुआती रिसर्च से पता चलता है कि केवल वायरस को दबाना ही पर्याप्त नहीं होता है बल्कि शरीर की पूरी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है। इसी कारण अब कांबिनेशन थेरेपी पर जोर दिया जा रहा है जिससे एक से ज्यादा उपचार एक साथ हो सकते हैं शुरुआती क्लीनिकल अध्ययनों में इसके बेहतर परिणाम देखने को मिले हैं।
इसके शोध में क्या सामने आया?
हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय रिसर्च में Bepirovirsen नाम की एक नई दवा में कुछ मरीजों में Functional Cure हासिल करने का रिजल्ट दिखाया है हालांकि यह रिजल्ट सभी मरीजों में समान नहीं दिख रहे थे और इस दवा पर अभी आगे और भी क्लीनिकल तरीके से अध्ययन और मंजरी की प्रक्रिया होनी बाकी है। इसलिए इसे फिलहाल नियमित इलाज का विकल्प नहीं कह सकते हैं।
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रिसर्च से मरीजों के लिए इसका क्या मतलब है?
अगर साफ शब्दों में कहा जाए तो डॉक्टर के अनुसार फिलहाल मरीज अपनी डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं बंद ना करें नई थेरेपी अभी रिसर्च में है और सभी देशों में उपलब्ध भी नहीं है। हालांकि लगातार हो रहे रिसर्च से यह उम्मीद जरूर है कि आने वाले कुछ सालों में मरीजों को लंबे समय तक दवा लेने की ज़रूरतें काम हो जाएगी।




