New Change in EPFO : केंद्र की मोदी सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियम में बदलाव किया है। अब जिन कर्मचारियों का वेतन 25 हजार रुपये तक है, वे भी EPFO के तहत आ सकते हैं। इससे करीब 51 लाख और लोग इस योजना में शामिल हो सकते हैं। इस बदलाव से लगभग 51 लाख और लोग इस योजना का लाभ ले सकेंगे। यह कदम कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने और सामाजिक सुरक्षा योजना का विस्तार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
EPFO में क्या बदलाव हुआ ?
पहले EPFO में शामिल होने की वेतन सीमा 15 हजार रुपये थी। अब इसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है। इसका मतलब है कि 25 हजार रुपये तक कमाने वाले कर्मचारी भी EPFO की सेवाओं का लाभ ले सकेंगे। ये सेवाएं रिटायरमेंट के लिए बचत, पेंशन और बीमाकर्ता सुरक्षा जैसी हैं।
2014 से नहीं हुआ था बदलाव
EPFO की यह सीमा आखिरी बार 2014 में 15 हजार रुपये की गई थी। अब 2026 में इसे बढ़ाकर 25 हजार कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि वेतन में बढ़ोतरी के कारण यह बदलाव जरूरी था।इस दौरान देश में महंगाई और वेतन में वृद्धि के चलते कर्मचारियों की आय में भी सुधार हुआ है। अब 2026 में इसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया है ताकि कर्मचारी भविष्य निधि योजना का अधिक से अधिक लाभ कर्मचारियों तक पहुंच सके। सरकार का मानना है कि वेतन में लगातार बढ़ोतरी और आर्थिक स्थिति में सुधार के मद्देनजर यह बदलाव आवश्यक था।
सरकार ने क्यों बढ़ाई EPFO की वेतन ?
सरकार का मकसद है कि ज्यादा कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा का लाभ उठाएं और बाजार में औपचारिक रोजगार बढ़े। इससे सरकार को हर साल करीब 11,339 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा। अगले पांच सालों में पूरे खर्च का अनुमान 56,696 करोड़ रुपये है। अभी EPFO में करीब 8 करोड़ कर्मचारी जुड़े हैं और 82 लाख पेंशनधारी हैं।
अब श्रम मंत्रालय और EPFO नियम बनाने की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं ताकि नई सीमा को लागू किया जा सके।
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