National Seminar Sociology Department TRS College Rewa : “विविधता में एकता” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी “नई शिक्षा नीति पर भी मंथन”

National Seminar Sociology Department TRS College Rewa : “विविधता में एकता” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी “नई शिक्षा नीति पर भी मंथन” रीवा। भारतीय समाज की बहुलतावादी संस्कृति, उसमें व्याप्त विविधता और इसे एक सूत्र में पिरोने वाली ‘एकता’ की अवधारणा पर गंभीर अकादमिक विमर्श का एक सार्थक अवसर प्रदान करते हुए, शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। महाविद्यालय का समाजशास्त्र विभाग 14 और 15 मार्च 2026 को दो दिवसीय राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी का आयोजन कर रहा है, जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की भूमिका को केंद्र में रखते हुए सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इस संगोष्ठी का विषय “भारतीय समाज में विविधता में एकता राष्ट्रीय शिक्षा नीति”, “राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक समरसता” निर्धारित किया गया है। इस विषय की प्रासंगिकता को देखते हुए देशभर के विद्वान, शिक्षाविद और शोधार्थी एक मंच पर साझा होंगे और अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा के समाजशास्त्र विभाग द्वारा 14-15 मार्च 2026 को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में भारतीय समाज की ‘विविधता में एकता’, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं सामाजिक समरसता पर विद्वानों द्वारा विमर्श। पढ़ें पूरी खबर।

उद्घाटन सत्र और मुख्य अतिथि

(Inaugural Session and Chief Guests)

संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र का आयोजन 14 मार्च 2026 को प्रातः 11 बजे किया गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी करेंगी। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा विभाग, रीवा संभाग के अतिरिक्त संचालक डॉ. आर. पी. सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। वहीं, मुख्य वक्ता के पद पर इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय, प्रयागराज के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. आशीष सक्सेना अपना व्याख्यान देंगे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में सी.एम.पी. कॉलेज, प्रयागराज की प्राध्यापक डॉ. विजय लक्ष्मी सक्सेना भी उपस्थित रहेंगी।

पुस्तक विमोचन और आयोजन समिति

(Book Release and Organizing Committee)

उद्घाटन सत्र के दौरान ही संगोष्ठी के अंतर्गत प्रकाशित आईएसबीएन युक्त संदर्भ पुस्तक (प्रोसीडिंग) का विमोचन किया जाएगा। इस पुस्तक में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शोधार्थियों और प्राध्यापकों द्वारा लिखे गए शोध-पत्र संकलित हैं, जो इस बहुआयामी विषय पर एक मूल्यवान दस्तावेज के रूप में सामने आएंगे। इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक समाजशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अखिलेश शुक्ल हैं, जबकि सह-संयोजक की भूमिका डॉ. महानंद द्विवेदी निभा रहे हैं। प्राचार्य डॉ. अर्पिता अवस्थी के कुशल निर्देशन में आयोजित यह संगोष्ठी शैक्षणिक जगत में एक महत्वपूर्ण योगदान साबित होगी।

अकादमिक सत्रों की रूपरेखा

(Structure of Academic Sessions)

संगोष्ठी के पहले दिन उद्घाटन के पश्चात तीन अकादमिक सत्र आयोजित किए जाएंगे:-

  • प्रथम अकादमिक सत्र: दोपहर 12:30 से 1:30 बजे तक
  • द्वितीय अकादमिक सत्र: दोपहर 2:30 से 3:30 बजे तक
  • तृतीय अकादमिक सत्र: सायं 4:00 से 5:00 बजे तक (ऑनलाइन माध्यम से)

संगोष्ठी के दूसरे दिन 15 मार्च को भी दो अकादमिक सत्र होंगे, जिसके पश्चात समापन सत्र आयोजित करके कार्यक्रम का औपचारिक समापन किया जाएगा। इन सत्रों में विविधता में एकता के सैद्धांतिक पक्षों से लेकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के व्यावहारिक निहितार्थों तक पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।

निष्कर्ष (Conclusion)-शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा में आयोजित होने वाली यह राष्ट्रीय संगोष्ठी केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह भारत की सामाजिक संरचना,उसकी सांस्कृतिक विरासत और उसे सशक्त बनाने में शिक्षा की भूमिका पर चिंतन का एक जीवंत मंच है। ‘विविधता में एकता’ के भारतीय आदर्श को राष्ट्रीय शिक्षा नीति की आधुनिक आवश्यकताओं से जोड़कर देखना इस संगोष्ठी की सबसे बड़ी विशेषता है। यह आयोजन निश्चित रूप से शिक्षाविदों, शोधार्थियों और नीति-निर्धारकों के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।

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