Nadiya Ke Paar Re-Release: 43 साल बाद फिर बड़े पर्दे पर लौटेगी ‘नदिया के पार’, जानिए क्यों आज भी लोगों के दिलों पर राज करती है यह फिल्म

Poster still of classic Hindi film Nadiya Ke Paar ahead of its theatrical re-release

Nadiya Ke Paar Re-Release: भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जो समय के साथ और भी खास बन जाती हैं। ऐसी ही एक यादगार फिल्म है ‘नदिया के पार’ जो अब 43 साल बाद फिर से सिनेमाघरों में रिलीज़ होने जा रही है। यह खबर न सिर्फ फिल्म प्रेमियों के लिए खुशी लेकर आई है, बल्कि भोजपुरी और ग्रामीण संस्कृति से जुड़े दर्शकों के लिए भी एक भावनात्मक पल भी होने वाला है।

Nadiya Ke Paar Re-Release
Nadiya Ke Paar Re-Release

क्यों खास है Nadiya Ke Paar Re-Release

साल 1982 में रिलीज़ हुई फिल्म ‘नदिया के पार’ एक साधारण प्रेम कहानी होते हुए भी एक असाधारण प्रभाव छोड़ती है। यह फिल्म ग्रामीण भारत, पारिवारिक रिश्तों, संस्कारों और परंपराओं को बेहद सादगी से लोगों को दिखाती है। Nadiya Ke Paar Re-Release के जरिए आज की युवा पीढ़ी उस दौर की सिनेमा शैली और सामाजिक मूल्यों को करीब से देख पाएगी।

कम बजट, लेकिन ऐतिहासिक सफलता

यह फिल्म बहुत कम बजट में बनाई गई थी, लेकिन इसके बावजूद इसने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की। फिल्म की लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके गाने और संवाद आज भी लोगों की ज़ुबान पर हैं। यही वजह है कि दशकों बाद भी इसकी दोबारा रिलीज़ को लेकर दर्शकों में एक उत्साह देखने को मिल रहा है।

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हम आपके हैं कौन’ फिल्म से भी है खास कनेक्शन

बहुत कम लोग जानते हैं कि बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ की प्रेरणा भी ‘नदिया के पार’ फिल्म से ही ली गई थी। पारिवारिक भावनाओं और रिश्तों को केंद्र में रखकर बनाई गई इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा को एक नई दिशा दी थी, जिसकी झलक ‘नदिया के पार’ में साफ दिखाई देती है।

नई पीढ़ी के लिए क्यों जरूरी है यह फिल्म

आज के डिजिटल और तेज़ रफ्तार के दौर में रिश्तों की गहराई कहीं न कहीं खोती जा रही है। ऐसे में Nadiya Ke Paar Re-Release केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक संदेश है जो प्रेम, धैर्य, सम्मान और परिवार की अहमियत को दर्शाता है। यही कारण है कि यह फिल्म आज भी उतनी ही लोगों को प्रासंगिक लगती है।

‘नदिया के पार’ की दोबारा रिलीज़ यह साबित करती है कि सच्ची कहानियाँ कभी पुरानी नहीं होतीं है। 43 साल बाद भी इस फिल्म का जादू अभी भी कायम है और थिएटर में इसकी वापसी दर्शकों को एक बार फिर भावनाओं की उस दुनिया में ले जाएगी, जहां सादगी ही सबसे बड़ी खूबसूरती है।

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