मध्यप्रदेश विधानसभा के 69 साल, 1 महीने चला था पहला अधिवेशन, विशेष सत्र में सीएम के सूटबूट पर लगा ठहका

Madhya Pradesh Legislative Assembly building during a special session in Bhopal

एमपी विधानसभा। मध्यप्रदेश विधानसभा ने अपने स्थापना के 69 साल 17 दिंसबर को पूरे कर लिए है। इस पर विधानसभा में विशेष सत्र बुलाया गया। विधानसभा के इस सत्र में ठहकों का दौर भी चला, तो वही विपक्ष भी इस मौके का पूरा फायदा उठाते हुए सत्तादल पर सवाल उठाए है।

1956 में ऐसे शुरू हुई थी विधानसभा

15 अगस्‍त, 1947 के पूर्व देश में कई छोटी-बड़ी रियासतें एवं देशी राज्‍य अस्तित्‍व में थे। स्‍वाधीनता पश्‍चात् उन्‍हें स्‍वतंत्र भारत में विलीन और एकीकृत किया गया। 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू होने के बाद देश में सन् 1952 में पहले आम चुनाव हुए, जिसके कारण संसद एवं विधान मण्‍डल कार्यशील हुए। प्रशासन की दृष्टि से इन्‍हें श्रेणियों में विभाजित किया गया था। सन् 1956 में राज्‍यों के पुनर्गठन के फलस्‍वरूप 1 नवंबर, 1956 को नया राज्‍य मध्‍यप्रदेश अस्तित्‍व में आया। इसके घटक राज्‍य मध्‍यप्रदेश, मध्‍यभारत, विन्‍ध्‍य प्रदेश एवं भोपाल थे, जिनकी अपनी विधान सभाएं थीं। पुनर्गठन के फलस्‍वरूप सभी चारों विधान सभाएं एक विधान सभा में समाहित हो गईं। अतः 1 नवंबर, 1956 को पहली मध्‍यप्रदेश विधान सभा अस्तित्‍व में आई। इसका पहला और अंतिम अधिवेशन 17 दिसम्‍बर, 1956 से 17 जनवरी, 1957 के बीच संपन्‍न हुआ था।

288 थी विधानसभा की क्षमता

मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए पहला चुनाव 1957 में हुआ था और दूसरी विधानसभा का गठन 1 अप्रैल 1957 को हुआ था। शुरुआत में विधानसभा की क्षमता 288 थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 321 कर दिया गया, जिसमें एक मनोनीत सदस्य भी शामिल था। 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश राज्य से अलग होकर एक नया राज्य, छत्तीसगढ़ बनाया गया।

बुलाए गए विशेष सत्र में तब लगा ठहका

मध्यप्रदेश विधानसभा स्थापना के 69 साल पूरे होने पर बुधवार यानि 17 दिसंबर को विधानसभा का एक दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया गया है। सदन में चर्चा की शुरुआत करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकार के किए गए कामों और योजनाओं के जरिए आगामी समय में किए जाने वाले कामों के बारे में जानकारी दिए। इस दौरान मंत्री विजयवर्गीय ने सूट-बूट पहनकर सदन में आए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लेकर कहा कि मुख्यमंत्री सूट-बूट में आ गए हैं और हम मंत्री-विधायक लोग गरीबों जैसी वेश-भूषा में हैं। विजयवर्गीय की इस बात पर सदन में ठहाके लगे। तो विपक्ष इस पर हमलाबर हो गया और कहा कि दिल की बात जुबान पर आ ही जाती है। सरकार में मंत्रियों की ही सुनवाई नही हो रही है।

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