नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण को लेकर कानूनी लड़ाई के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दिल्ली पहुंचे। यहां उन्होंने भारत सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से मुलाकात की। बैठक में प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह भी मौजूद रहे। इस दौरान मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण से जुड़े हाईकोर्ट के फैसले, उसके कानूनी पहलुओं और आगे की कार्रवाई की रणनीति पर चर्चा हुई।
राज्य में OBC आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर विचार कर रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री की सॉलिसिटर जनरल के साथ हुई इस मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
OBC आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले को लेकर हुई चर्चा
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सोशल मीडिया के जरिए इस मुलाकात की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि नई दिल्ली में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और प्रदेश के महाधिवक्ता प्रशांत सिंह के साथ OBC आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट के निर्णय से जुड़े कानूनी पहलुओं और आगामी कार्रवाई की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में हाईकोर्ट के फैसले के बाद पैदा हुई कानूनी स्थिति और सरकार की ओर से आगे उठाए जाने वाले कदमों पर विचार किया गया।
OBC आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद क्या बदला
मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है। राज्य में OBC वर्ग के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान लागू करने को लेकर कानूनी विवाद चल रहा है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद 14 प्रतिशत आरक्षण और 27 प्रतिशत आरक्षण के तहत अतिरिक्त 13 प्रतिशत पदों से जुड़ा मामला फिर महत्वपूर्ण हो गया है। अतिरिक्त 13 प्रतिशत पदों को होल्ड रखने और उनसे संबंधित परिणाम जारी करने के मुद्दे पर भी कानूनी स्थिति का असर पड़ता है।
ऐसे में राज्य सरकार फैसले के कानूनी पहलुओं का अध्ययन कर रही है, ताकि आगे की कार्रवाई तय की जा सके। इस मामले में अंतिम स्थिति अदालत के आदेशों और आगे होने वाली सुनवाई पर निर्भर करेगी।
सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी कर रही सरकार
हाईकोर्ट के फैसले के बाद मध्य प्रदेश सरकार आगे की कानूनी रणनीति बनाने में जुटी है। सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करने और हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने की मांग को लेकर तैयारी कर रही है।
इसके लिए मामले से जुड़े तथ्यों, आंकड़ों और जरूरी दस्तावेजों को जुटाने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री की सॉलिसिटर जनरल और प्रदेश के महाधिवक्ता के साथ हुई बैठक को इसी तैयारी के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में कब अपील दायर करती है और OBC आरक्षण से जुड़े मामले में आगे क्या कानूनी रास्ता अपनाया जाता है।




