MP: प्रदेश में तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति पर बड़ा फैसला जल्द, CPCT की अनिवार्यता हटाने के संकेत

MP Employee Promotion: सीपीसीटी परीक्षा की अनिवार्यता के चलते तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति में आ रही अड़चन अब दूर होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीपीसीटी परीक्षा किसी भी पात्र कर्मचारी की पदोन्नति के रास्ते में बाधा नहीं बननी चाहिए।

MP Employee Promotion: मध्यप्रदेश में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति (Promotion) में सीपीसीटी परीक्षा की अनिवार्यता को लेकर सरकार जल्द सकारात्मक निर्णय ले सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को इस संबंध में आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर जल्द निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि CPCT Exam किसी भी पात्र कर्मचारी की पदोन्नति में बाधा नहीं बनना चाहिए।

पात्र कर्मचारियों को मिले पदोन्नति का लाभ

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जिन तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति की पात्रता हासिल है, उन्हें इसका लाभ दिया जाना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि केवल सीपीसीटी परीक्षा उत्तीर्ण नहीं करने के कारण किसी कर्मचारी को पदोन्नति से वंचित न किया जाए। इसके साथ ही पदोन्नति मिलने के बाद कर्मचारियों को सिर्फ सीपीसीटी परीक्षा की अनिवार्यता के आधार पर रिवर्ट (Revert) करने की स्थिति भी नहीं बननी चाहिए। सरकार का जोर पात्र कर्मचारियों के Career Progression में अनावश्यक बाधा दूर करने पर है।

जल्द निर्णय के निर्देश

मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को सीपीसीटी परीक्षा पास करने की अनिवार्यता के संबंध में जल्द सकारात्मक निर्णय लेने को कहा है। सरकार के इस रुख के बाद कर्मचारियों और उनके संगठनों में भी उम्मीद बढ़ी है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संगठन के महासचिव उमाशंकर तिवारी ने मुख्यमंत्री के रुख का स्वागत करते हुए कहा कि कर्मचारियों को सीपीसीटी की अनिवार्यता से राहत दिलाने की दिशा में सरकार का कदम सराहनीय है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की अन्य लंबित मांगों पर भी सरकार जल्द निर्णय लेगी, ऐसी उम्मीद है।

CPCT की अनिवार्यता से रुकी पदोन्नति

दरअसल, सीपीसीटी परीक्षा पास करने की अनिवार्यता के चलते कई कर्मचारियों की Promotion Process प्रभावित हुई है। कुछ मामलों में पदोन्नति के आदेश जारी होने के बाद उन्हें निरस्त भी किया गया। इसको लेकर कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखी थीं। कर्मचारी संगठनों ने पदोन्नति में बाधा बन रही सीपीसीटी की अनिवार्यता हटाने के साथ ही दो साल की परिवीक्षा अवधि (Probation Period) पर पदोन्नति देने की मांग की थी। अब मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इस मुद्दे पर जल्द सरकार के निर्णय का इंतजार है।

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