कूनो के बाद गांधीसागर और अब वीरांगना दुर्गावती, मध्य प्रदेश बन रहा है चीता केंद्र

cheeta

भोपाल। मध्य प्रदेश में चीता संरक्षण को लेकर लगातार बड़ी खबरें सामने आ रही हैं। 5 अक्टूबर को कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता KJP21 ने पांच शावकों को जन्म दिया। इसके बाद अब 7 अक्टूबर को बुंदेलखंड के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में भी चीतों को बसाया जा रहा है।

कूनो और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य के बाद यह मध्य प्रदेश में चीतों का तीसरा ठिकाना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कूनो से लाए गए दो चीतों को यहां छोड़ेंगे। इनमें नर चीता थोलो और मादा चीता CCB-3 शामिल हैं।

भारत में 60 चीते

कूनो में पांच शावकों के जन्म के बाद भारत में चीतों की संख्या 60 हो गई है। इनमें 41 चीते भारत में जन्मे हैं। यह Project Cheetah के लिहाज से अहम है, क्योंकि इसका लक्ष्य सिर्फ अफ्रीका से चीते लाकर भारत में छोड़ना नहीं, बल्कि यहां उनकी स्थायी आबादी तैयार करना भी है।

भारत में चीता पुनर्स्थापना अभियान की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी। इसी दिन नामीबिया से लाए गए चीतों को कूनो में छोड़ा गया था। बाद में दक्षिण अफ्रीका से भी चीते भारत लाए गए।

क्यों खास है वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में करीब 2,339 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यहां पहले से बाघ, तेंदुए, चीतल, सांभर, नीलगाय और भालू जैसे वन्यजीव पाए जाते हैं।

चीतों के लिए करीब 439 हेक्टेयर क्षेत्र तैयार किया गया है। शुरुआत में उन्हें विशेष बाड़ों यानी बोमा में रखा जाएगा और स्वास्थ्य व गतिविधियों की निगरानी की जाएगी। इसके बाद उन्हें धीरे-धीरे नए वातावरण के अनुकूल बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

एक जगह पर निर्भरता कम होगी

चीतों के लिए अलग-अलग क्षेत्रों को विकसित करने का एक बड़ा फायदा यह है कि पूरी आबादी किसी एक इलाके पर निर्भर नहीं रहेगी। बीमारी, जंगल की आग या प्राकृतिक आपदा जैसी स्थिति में अलग-अलग क्षेत्रों में मौजूद आबादी को सुरक्षित रखने में मदद मिल सकती है।

इसी रणनीति के तहत कूनो के बाद गांधीसागर और अब वीरांगना दुर्गावती को चीता संरक्षण से जोड़ा जा रहा है।

बुंदेलखंड में बढ़ेगा पर्यटन

चीतों की मौजूदगी से बुंदेलखंड में वन्यजीव पर्यटन को बढ़ावा मिलने की संभावना है। अगर पर्यटकों की संख्या बढ़ती है तो होटल, होम-स्टे, गाइड, वाहन, रेस्टोरेंट और स्थानीय हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों को फायदा मिल सकता है।

हालांकि, इसका वास्तविक असर आने वाले वर्षों में ही पता चलेगा।

मध्य प्रदेश बन रहा है चीता केंद्र

कूनो, गांधीसागर और अब वीरांगना दुर्गावती—मध्य प्रदेश में चीता संरक्षण का दायरा लगातार बढ़ रहा है। इससे MP Project Cheetah का प्रमुख केंद्र जरूर बन चुका है।

लेकिन असली चुनौती सिर्फ चीतों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें स्वस्थ रखना, उनका सफल प्रजनन कराना और अलग-अलग वन क्षेत्रों में स्थायी आबादी विकसित करना है। 7 अक्टूबर को वीरांगना दुर्गावती में दो चीतों को छोड़ना इसी दिशा में अगला कदम है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *