Milk Revolution in MP: मध्य प्रदेश सरकार दुग्ध संग्रहण व्यवस्था को पारदर्शी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश के लगभग 7 हजार दुग्ध संग्रहण केंद्रों पर जल्द ही अत्याधुनिक Automatic Milk Collection Machines लगाई जाएंगी, जिससे दूध के वजन और गुणवत्ता की तत्काल जांच हो सकेगी। इस हाईटेक व्यवस्था से मिलावट पर अंकुश लगेगा, किसानों को उनके दूध का सही और उचित मूल्य मिल सकेगा तथा उपभोक्ताओं तक बेहतर गुणवत्ता वाला शुद्ध दूध पहुंचाने में मदद मिलेगी।
Milk Revolution in MP: मध्य प्रदेश सरकार दुग्ध उत्पादकों (dairy farmers) और उपभोक्ताओं दोनों के हित में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश के लगभग 7 हजार दुग्ध संग्रहण केंद्रों (milk collection centers) पर जल्द ही अत्याधुनिक ऑटोमेटिक मिल्क कलेक्शन मशीनें (Automatic Milk Collection Machines) स्थापित की जाएंगी। इन मशीनों से दूध के वजन और गुणवत्ता की तत्काल जांच संभव हो सकेगी, जिससे मिलावट (adulteration) और मानवीय गड़बड़ी पर प्रभावी रोक लगेगी।
नई तकनीक से बढ़ेगी पारदर्शिता
नई व्यवस्था के तहत दूध संग्रहण केंद्र पर जैसे ही किसान दूध लेकर पहुंचेगा, Automatic Milk Collection Machine तुरंत दूध का वजन दर्ज कर लेगी। फैट (fat content) और अन्य गुणवत्ता परीक्षण पहले की तरह ही किए जाएंगे, लेकिन पूरी प्रक्रिया का डेटा ऑनलाइन रिकॉर्ड होगा। किसान मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से अपने दूध की विस्तृत जानकारी (real-time data) देख सकेंगे। साथ ही संग्रहण केंद्र संचालक और दुग्ध संघ के अधिकारी रियल टाइम में पूरे डेटा की निगरानी (real-time monitoring) कर सकेंगे।
मैन्युअल सिस्टम की पुरानी समस्याएं दूर होंगी
वर्तमान में कई केंद्रों पर दूध की जांच और वजन की प्रक्रिया अभी भी मैन्युअल (manual process) है। इसी वजह से वजन, फैट की गणना और भुगतान को लेकर अक्सर विवाद और शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ जगहों पर गलत एंट्री और रिकॉर्ड में हेराफेरी की भी शिकायतें मिलती हैं। किसानों का आरोप है कि कई बार भैंस के दूध को गाय का दूध बताकर कम मूल्य दिया जाता है। नई Automatic Milk Collection Machines इन सभी समस्याओं पर लगाम लगाएगी और प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी (transparent system) बना देगी।
किसानों को मिलेगा सही मूल्य, उपभोक्ताओं को शुद्ध दूध
सरकार का दावा है कि इन मशीनों के लगने से दुग्ध उत्पादकों (milk producers) को उनके दूध का सही और उचित मूल्य (fair price) मिल सकेगा। वहीं उपभोक्ताओं तक बेहतर गुणवत्ता वाला शुद्ध दूध (pure milk) पहुंचाने में भी मदद मिलेगी। इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि डेयरी सेक्टर (dairy sector) में विश्वास भी मजबूत होगा।
2-3 महीने में हो जाएगी स्थापना
पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव उमाकांत उमराव ने बताया कि दो से तीन महीने के अंदर ये अत्याधुनिक मशीनें प्रदेश के 7000 दुग्ध संग्रहण केंद्रों पर लगाई जा जाएंगी। उन्होंने कहा कि इस पहल से दूध की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ पशुपालकों और किसानों को बड़ा लाभ पहुंचेगा।
यह कदम मध्य प्रदेश को डेयरी विकास (dairy development) के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नई तकनीक न केवल मिलावट रोकने में कारगर साबित होगी बल्कि पूरे दुग्ध उत्पादन और वितरण व्यवस्था को और अधिक कुशल तथा भरोसेमंद बनाएगी।
