Missing Women In Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। विधानसभा में पेश सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में 50 हजार से अधिक महिलाएं (Number Of Missing Womens In MP) और नाबालिग (Number Of Missing Girls In MP) लड़कियां लापता हैं. गृह विभाग द्वारा पेश किए गए आंकड़े बताते हैं कि पिछले 5 सालों में मध्य प्रदेश से 2 लाख 74 हजार 300 महिलाओं और बच्चियों के गायब होने के मामले सामने आए जिनमे से 2 लाख 6 हजार 507 महिलाएं और 63 हजार 793 बालिकाएं हैं. हैरान करने वाली ये है कि इसी साल सिर्फ जनवरी महीने में 3 हजार से ज्यादा महिलाएं और बच्चियां गायब हुई हैं.
दरअसल कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया (Vikrant Bhuria) ने विधानसभा में गृह विभाग से साल 2020 से लेकर 2026 तक प्रदेश के सभी जिलों के थानों में महिलाओं और बालिकाओं के लापता होने की दर्ज शिकायतों की जानकारी मांगी थी. जिसका जवाब 18 फरवरी को पेश किया गया और आंकड़े चौंकाने वाले सामने आए. महिलाओं और बच्चियों के लापता होने के मामले में इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और रीवा टॉप पर हैं. ये वाकई चिंता की बात है कि मध्य प्रदेश, इस मामले में पूरे देश में पहला स्थान रखता है जहां इतनी बड़ी संख्या में बच्चियां और महिलाएं लापता हो रही हैं.
मध्य प्रदेश में लापता महिलाओं और लड़कियों की संख्या
गृह विभाग द्वारा पेश आंकड़ों की बात करें तो पिछले 5 सालों में 2 लाख 6 हजार 507 महिलाएं और 63 हजार 793 बालिकाएं गायब हुईं यानी 2 लाख 74 हजार 300 महिलाएं और बालिकाओं की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई जिसमे 2 लाख 20 हजार 130 प्रकरणों पर पुलिस को सफलता मिली मगर अभी भी 47 हजार 984 महिलाएं और 2186 बालिकाएं लापता हैं यानी 50 हजार 186 बेटियां, बहनें, माताएं — कहां हैं? किस हाल में हैं? जिंदा भी हैं या नहीं? कुछ पता नहीं।
कांग्रेस पार्टी इस मामले को ह्यूमन ट्रैफिकिंग यानी मानव तस्करी से जोड़कर देख रही हैं, खासकर बदनाम जेफरी एप्सटीन जैसे मामले से. कांग्रेस विधायक का कहना है कि मध्य प्रदेश में एप्सटीन की तरह मानव तस्करी गिरोह संचालित हो रहा है जिसमे बड़े बड़े लोग शामिल हो सकते हैं.
मध्य प्रदेश में अबतक कितनी महिलाएं लापता हुईं
आइये अब आपको उन टॉप जिलों के बारे में बताते हैं जहां सबसे ज्यादा महिलाओं और बालिकाओं के लापता होने की शिकायते दर्ज हैं. इस लिस्ट में सबसे पहले नाम इंदौर का है जहां पिछले 5 सालों में 12680 महिलाओं और 3741 बालिकाओं के गायब होने की शिकायत दर्ज हुई. और 11 837 मामलों में पुलिस को सफलता मिली मगर अभी भी 4 हजार 449 महिलाएं एयर 135 नाबालिग लड़कियां लापता हैं। इंदौर ग्रामीण में भी 861 महिलाएं और 48 लड़कियों का अबतक कोई सुराग नहीं मिला है.
धार जिले में भी 2529 महिलाएं और 118 लड़कियां लापता हैं, उज्जैन में 1526 महिलाएं और 36 लड़कियां नहीं मिल पाई हैं, जबलपुर में 2296 महिलाएं और 86 लड़कियों का अबतक कोई पता नहीं चला है, इसी तरह छिंदवाड़ा, रतलाम, नरसिंगपुर, कटनी, सिवनी, और सागर में तो 2310 महिलाएं और 183 बालिकाएं गुमशुदा हैं.
विंध्य की बात करें तो रीवा में सबसे ज्यादा 1334 महिलाएं और 97 लड़कियां गायब हैं, सतना में 1286 और 77, इसी तरह सीधी, सिंगरौली, मैहर, मऊगंज, शहडोल उमरिया, अनूपपुर में कुल 4 हजार 635 महिलाऐं और 213 नाबालिग लड़कियों का सुराग पुलिस को नहीं मिला है.
तो तस्वीर साफ है आंकड़े सिर्फ कागज़ पर दर्ज संख्या नहीं हैं,… ये 50 हजार सवाल हैं, ये सिर्फ डेटा नहीं सामाजिक चेतावनी है। प्रदेश के बड़े शहरों से लेकर विंध्य और आदिवासी अंचलों तक — कहीं न कहीं सुरक्षा तंत्र में दरार दिख रही है। अगर इतने बड़े पैमाने पर महिलाएं और बच्चियां गायब हो रही हैं, तो सवाल सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि सिस्टम की जवाबदेही का भी है। कांग्रेस इसे मानव तस्करी के एंगल से देख रही है, सत्ता पक्ष इसे पुलिस की सक्रियता और रिकवरी रेट से जोड़ रहा है — लेकिन जमीन पर परिवारों के लिए सियासत से ज्यादा जरूरी है जवाब। 50 हजार से ज्यादा महिलाएं आखिर हैं कहां? क्या ये सिर्फ पारिवारिक विवाद और प्रेम-प्रसंग के मामले हैं, या इसके पीछे संगठित अपराध की साजिश है? लोगों को जवाब चाहिए।




