सतना के भरहुत नगर में हाउसिंग बोर्ड की बड़ी कार्रवाई: 6 मकानों की लीज रद्द, 24 को नोटिस, विरोध में उतरे लोग

Major action by the Housing Board in Satna's Bharhut Nagar.

सतना: शहर के भरहुत नगर की 40 साल पुरानी आवासीय कॉलोनी में हाउसिंग बोर्ड ने व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। बोर्ड ने नियमों का उल्लंघन कर मकानों का मूल स्वरूप बदलने और वहां व्यवसाय चलाने के मामले में अब तक 6 भवनों की लीज रद्द कर दी है, जबकि 24 अन्य मकान मालिकों को नोटिस जारी कर दुकानें व व्यावसायिक गतिविधियां तुरंत बंद करने के निर्देश दिए हैं। इस अचानक हुई कार्रवाई के बाद स्थानीय रहवासियों में भारी आक्रोश है और लोग इसके विरोध में उतर आए हैं।

मूल स्वरूप बदलकर चल रहे थे स्कूल, अस्पताल और शोरूम

हाउसिंग बोर्ड ने करीब 50 एकड़ क्षेत्र में इस कॉलोनी को विकसित किया था, जिसमें एचआईजी (HIG), एमआईजी (MIG), एलआईजी (LIG) और ईडब्ल्यूएस (EWS) श्रेणी के कुल 858 आवासीय मकान बनाए गए हैं। संपदा अधिकारी मनोज द्विवेदी के अनुसार, कई भवन स्वामियों ने आवासीय भवनों का मूल स्वरूप बदलकर वहां स्कूल, शोरूम, रेस्टोरेंट, क्लीनिक, नर्सिंग होम और दफ्तर संचालित करना शुरू कर दिया था। पहले चरण में नोटिस देने के बावजूद गतिविधियां जारी रहने पर 6 मकानों की लीज निरस्त कर दी गई है, और अन्य मामलों में भी प्रक्रिया जारी है।

रहवासियों का तर्क- टैक्स और लाइसेंस लेते रहे हैं निगम और बोर्ड

कार्रवाई से प्रभावित लोगों का कहना है कि यह कॉलोनी करीब चार दशक पुरानी है, जहां लोग लंबे समय से अपने घरों में छोटी दुकानें, क्लीनिक और अन्य व्यवसाय चलाकर गुजर-बसर कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का तर्क है कि नगर निगम द्वारा इन व्यावसायिक गतिविधियों पर लगातार कमर्शियल टैक्स वसूला जाता रहा है और वैधानिक लाइसेंस भी जारी किए गए हैं। इसके अलावा, 10 साल पुरानी संपत्तियों को फ्री-होल्ड करने का नियम होने के बावजूद कई लोगों को अभी तक मालिकाना हक नहीं मिला है।

10 हजार लोगों की रोजी-रोटी पर संकट, विधायक ने जताई नाराजगी

स्थानीय निवासियों का दावा है कि कॉलोनी और आसपास के इलाकों में करीब 1 हजार भवनों में व्यापारिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, जिससे लगभग 10 हजार लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। अचानक हुई इस कार्रवाई से कई प्रतिष्ठान बंद हो चुके हैं और परिवारों के सामने गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। लोगों का कहना है कि बिना किसी पूर्व विकल्प के अचानक व्यवसाय बंद कराने के बजाय प्रशासन को इसका कोई व्यावहारिक समाधान निकालना चाहिए। दूसरी ओर, स्थानीय विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने भी इस कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताते हुए इसे गलत कदम करार दिया है।

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