रीवा के इन मंदिरों में मनाई जाएगी महाशिवरात्रि, जाने क्या है शुभ मुहूर्त

रीवा। रीवा में महाशिवरात्रि 2026 धूमधाम से मनाई जाएगी, 15 फरवरी की अल सुबह से ही शिव मंदिरों में हर-हर महादेवा की गूंज रहेगी। जिसमें ऐतिहासिक महामृत्युंजय मंदिर (किला), बिहर-बिछिया तट स्थित पचमठा आश्रम, देवतालाब शिव मंदिर, और बसमन मामा मंदिर (सोहागी पहाड़) प्रमुख केंद्र होंगे। पचमठा में भव्य शिव बारात, 30 फीट का त्रिशूल और 108 स्थानों पर स्वागत आकर्षण का केंद्र रहेगा।

जाने क्या है शुभ मुहूर्त

इस बार महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए दिनभर कई शुभ मुहूर्त मिलेंग, जिनमें भक्त पूजा-अर्चना कर सकते हैं. पहला मुहूर्त सुबह 8 बजकर 24 मिनट से शुरू होकर 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा. इसके बाद दूसरा मुहूर्त सुबह 9 बजकर 48 मिनट से 11 बजकर 11 मिनट तक का रहेगा।

निकलेगी बारात, होगा ब्याह

शिव बारात आयोजन समिति के द्वारा भव्य बारात शहर में निकाली जा रही हैं। जिसमें 31 फिट की 551 किलो वजनी त्रिशूल शामिल रहेगी। इसके साथ ही बारात में आकर्षक सांस्कृति कार्यक्रम कलाकारों के द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। शिव बारात का समापन पंचमठा में शिव-पार्वती स्वरूप का विवाह के साथ होगा।

भगवान शिव का दिव्य अस्त्र है त्रिशूल

हिंदू परंपरा में त्रिशूल भगवान शिव का दिव्य अस्त्र माना जाता है, जो शक्ति, संतुलन और त्रिगुण-सात्विक, राजसिक और तामसिक का प्रतीक है। महाशिवरात्रि पर इसकी स्थापना को धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उत्साह से जोड़कर देखा जा रहा है।

बैजू धर्मशाला से शुरू होगी बारात

शिवबारात आयोजन समिति के अनिल केशरी ने बताया कि बारात बैजू धर्मशाला से सुबह 9 बजे रवाना होगी। यह बारात वेंकट मार्ग, स्टेच्यू चौक, साई मंदिर, कोठी रोड से होकर शिल्पी प्लाजा पहुचेगी। बारात स्वागत भवन, प्रकाश चौक, सिरमौर चौक और फोर्ट रोड होते हुए एसके स्कूल के पीछे से पचमठा आश्रम पहुंचेगी। यहां शिवबारात का विधिवत स्वागत किया जाएगा।

108 स्थानों पर पुष्पवर्षा और स्वागत

आयोजन समिति के अध्यक्ष मनीष गुप्ता ने बताया कि शिव बारात का मार्ग में 108 स्थानों पर श्रद्धालुओं द्वारा स्वागत किया जाएगा। बारात में धर्म ध्वजा, झांझ-मंजीरा, ढोल-नगाड़े, डमरू दल, बैंड, महाकाल की पालकी, 31 फीट का त्रिशूल, रुद्राक्ष की झांकी, काली माता, आदिशक्ति, केदारनाथ मंदिर, नरसिंह अवतार, राधा-कृष्ण रासलीला और शिव-पार्वती की सजीव झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। विभिन्न लोकनृत्य, डांडिया, घूमर और अखाड़ा प्रदर्शन भी शामिल रहेंगे।

रीवा के प्रमुख शिव मंदिर में महाशिवरात्रि

महामृत्युंजय मंदिर (किला)- यह 1001 छिद्रों वाले शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा और मेला लगता है।
पचमठा आश्रम (बिहर-बिछिया तट)- आदि शंकराचार्य से जुड़ी आस्था का केंद्र, यहाँ महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती विवाह और भव्य बारात आयोजित की जाती है।
देवतालाब शिव मंदिर- मान्यता है कि यहाँ का शिवलिंग दिन में चार बार रंग बदलता है।
बसमन मामा मंदिर (सोहागी पहाड़)- यहाँ अड़गड़नाथ महादेव की पूजा के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
बिरसिंहपुर- यहाँ भी महाशिवरात्रि पर विशेष पूजा और मेले का आयोजन होता है।
महाशिवरात्रि के अवसर पर रीवा में 30 फीट लंबा और 551 किलो वजनी त्रिशूल शोभायात्रा में शामिल किया जाएगा।

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