LPG Crisis In MP : रेस्टोरेंट में बढी कीमतों पर आधी चाय और छोटे समोसे तवा से रोटी गायब,खिचड़ी की शक्ल में दाल-चावल-मध्य प्रदेश के खानपान की राजधानी कहे जाने वाले इंदौर से लेकर प्रदेश के अन्य महानगरों में इस समय एक अलग ही संकट देखने को मिल रहा है। यह संकट किसी बाजार या सड़क का नहीं, बल्कि रसोई का है। कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की भारी किल्लत ने लोगों के चटखारों पर ग्रहण लगा दिया है। जहां एक तरफ कई दुकानों पर ताले लटक रहे हैं, वहीं खुली दुकानों पर मेन्यू सिकुड़ गए हैं। चाय का गिलास आधा भरा रह गया है, समोसे और आलूबड़े के आकार छोटे हो गए हैं, और रोटी का स्वाद अब तंदूर की आग में नहीं, बल्कि इंडक्शन की थाली में फीका पड़ गया है।मध्य प्रदेश में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत ने रेस्टोरेंट से लेकर चाय की टपरी तक का स्वाद बिगाड़ दिया है। जानें कैसे गैस संकट ने मेन्यू बदले, समोसे छोटे किए और तवा रोटी को गायब कर दिया।
कीमत में बढ़ोतरी और आधी चाय तो छोटे हुए समोसे
Half Tea, Smaller Samosas
सबसे ज्यादा मार इस गैस संकट की झेलनी पड़ रही है छोटे दुकानदारों और चाय-नाश्ता बेचने वालों को। इंदौर में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के सोशल मीडिया अपडेट्स इस बात के गवाह हैं कि अब पहले जैसी चाय मिलना मुश्किल हो गया है। दुकानदारों ने चाय की मात्रा तो कम कर दी है, साथ ही समोसा, कचोरी और आलूबड़े के आकार भी छोटे कर दिए हैं। कई जगहों पर बिना किसी सूचना के कीमतें भी बढ़ा दी गई हैं।
गुमटियों पर 15 दिन से ताले, कई आइटम बंद
15 Days of Shutdowns, Many Items Discontinued
गैस टंकी नहीं मिलने का सबसे बुरा असर यह हुआ है कि प्रदेश के कई शहरों में रेस्टोरेंट और स्टॉल्स को बंद करना पड़ा है। लोगों के मुताबिक, कुछ दिन पहले तक जहां जैसे-तैसे गैस मिल जाती थी, वहीं अब स्थिति इतनी विकट हो गई है कि दुकानदारों ने ताले लगा दिए हैं। जिन दुकानों ने डीजल भट्टी का सहारा लिया, वहां भी आर्थिक बोझ इतना बढ़ गया कि भजिए, खमण और कई अन्य फ्राई आइटम्स को मेन्यू से हटाना पड़ा।
डीजल भट्टी महंगी, कच्चे कलाकारों पर भारी
Diesel Burners Prove Costly
दुकानदारों के मुताबिक, पहले जहां 1700 रुपये की दो गैस टंकियों से दिन भर का काम चल जाता था, वहीं अब डीजल भट्टी पर रोजाना 5 से 7 हजार रुपये तक का खर्च आ रहा है। यह बढ़ा हुआ खर्च न सिर्फ उनके मुनाफे को खा रहा है, बल्कि ग्राहकों को भी महंगाई के रूप में झेलना पड़ रहा है। दुकानदार अब इंडक्शन, तंदूर और भट्टी का मिला-जुला इस्तेमाल कर अपना और ग्राहकों का घर चला रहे हैं।

तवा रोटी गायब,इंडक्शन का फीका स्वाद
Tawa Roti Disappears, Induction’s Bland Taste
गैस किल्लत का असर अब बड़े होटलों और रेस्टोरेंट तक पहुंच गया है। इंदौर होटल एसोसिएशन ने भी इस समस्या को स्वीकार किया है। सबसे बड़ा बदलाव यह देखने को मिला कि ज्यादा गैस खपत वाले आइटम्स को मेन्यू से हटा दिया गया। ‘तवा रोटी’ जो पारंपरिक स्वाद की पहचान थी, अब कई जगहों पर उपलब्ध नहीं है। उसकी जगह तंदूरी रोटी को प्राथमिकता दी जा रही है। शादी-पार्टियों के मेन्यू भी इस संकट की वजह से बदले जा रहे हैं। होटल संचालकों का कहना है कि गैस की जगह इंडक्शन कुकर पर खाना बनाने से भोजन का स्वाद प्रभावित हो रहा है। इंडक्शन का तापमान गैस की आग की तरह एक समान और प्राकृतिक नहीं होता, जिससे खाने में वह ठोसपन और दमदार स्वाद नहीं आ पाता है।
निष्कर्ष-Conclusion-प्रदेश भर में फैली एलपीजी की किल्लत सिर्फ एक आपूर्ति समस्या नहीं है, यह लोगों के जीवन के स्वाद से जुड़ा संकट बन गई है। यह संकट छोटी चाय की दुकान से लेकर बड़े होटलों तक की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है। जिम्मेदार अधिकारी इस बारे में कुछ भी स्पष्ट कहने की स्थिति में नहीं हैं कि स्थितियां कब सामान्य होंगी। जब तक कमर्शियल गैस सिलेंडर की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक मध्य प्रदेश के खानपान का स्वाद ‘फीका’ पड़ा रहेगा, और उसकी कीमत “बढ़ी” हुई।
