रीवा शहर के घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से पटाखों का भंडारण आम नागरिकों की जान और माल के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। दीवाली के त्योहार को देखते हुए पटाखों की मांग बढ़ने के साथ ही अवैध भंडारण और बिक्री का सिलसिला भी तेजी से फल-फूल रहा है। हाल ही में सामने आए एक मामले ने स्थानीय प्रशासन और जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रशासनिक दबिश और औपचारिकता के आरोप
बुधवार देर रात स्थानीय प्रशासन की एक टीम शहर में अवैध पटाखों के खिलाफ कार्रवाई के तहत ‘दीपू भाई पटाखा वाले’ की दुकान पर औचक दबिश देने पहुँची। इस दौरान टीम को एक रिहायशी मकान के अंदर भारी मात्रा में, यानी लाखों रुपए के पटाखे भंडारित मिले। घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। आरोप है कि इतनी भारी मात्रा में अवैध और खतरनाक रूप से पटाखे मिलने के बावजूद प्रशासनिक टीम मौके पर कोई ठोस कानूनी कार्रवाई किए बिना ही लौट आई, जिससे यह पूरी दबिश महज एक औपचारिकता बनकर रह गई।
पहले भी आ चुके हैं अवैध जब्ती के मामले
शहर में अवैध पटाखों का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी अमहिया थाना पुलिस ने एक संदिग्ध वाहन की तलाशी के दौरान 24 कार्टून अवैध पटाखे बरामद किए थे। जब्त किए गए इन पटाखों की बाजार में अनुमानित कीमत करीब डेढ़ लाख रुपए आंकी गई थी। उस मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया था, लेकिन अब रिहायशी मकानों के भीतर चल रहे अवैध भंडारण पर नरमी बरते जाने से पुलिस और प्रशासन के नियंत्रण पर फिर से सवाल खड़े हो गए हैं।
सुरक्षा मानक और नियम 82 का खुला उल्लंघन
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, विस्फोटक नियमों (नियम 82) के तहत पटाखों के भंडारण के लिए मुख्य दुकान से अलग एक सुरक्षित गोदाम होना अनिवार्य है, जिसके लिए अलग से लाइसेंस लिया जाता है। इस नियम के तहत गोदाम में अधिकतम 5 हजार किलो पटाखे ही रखे जा सकते हैं, और सबसे अहम बात यह है कि उस गोदाम का इस्तेमाल प्रत्यक्ष खुदरा बिक्री के लिए नहीं किया जा सकता। इसके अलावा, गोदाम निर्माण और अग्नि सुरक्षा से जुड़े कड़े मानकों का पालन करना भी कानूनी रूप से जरूरी होता है। घनी बस्तियों और रिहायशी मकानों के भीतर इस तरह का अवैध भंडारण किसी भी वक्त भीषण अग्निकांड का रूप ले सकता है, जिससे आसपास के दर्जनों मकान और दुकानें पलभर में राख हो सकती हैं।
प्रशासनिक पक्ष और आगे की जरूरत
वहीं इस पूरे मामले में पुलिस अधिकारीयों का कहना है कि पुलिस प्रशासन अपने स्तर पर पटाखा कारोबारियों के लाइसेंस की वैधता की जांच कर रहा है, जबकि अन्य प्रशासनिक और जब्ती संबंधी कार्रवाई राजस्व विभाग के अंतर्गत आती है।
बहरहाल, दीवाली के मद्देनजर रीवा शहर के अन्य घनी आबादी वाले रिहायशी इलाकों में भी इस तरह के अवैध और खतरनाक भंडारण की व्यापक स्तर पर जांच करने की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि किसी भी संभावित बड़े हादसे को समय रहते टाला जा सके।




