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टीवीके समर्थकों द्वारा अभिनेता से राजनेता बने विजय को भावी प्रधानमंत्री बताने पर कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने संसद के गणित की याद दिलाई। जानिए पूरा विवाद।

Vijay national political entryVijay national political entry

Vijay national political entry

डिजिटल डेस्क, चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से राजनेता बने तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) प्रमुख विजय की राष्ट्रीय भूमिका को लेकर सियासी पारा गर्म हो गया है। कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने टीवीके समर्थकों के दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए साफ किया कि देश का प्रधानमंत्री बनने के लिए 272 सांसदों का समर्थन होना अनिवार्य है।

यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और विजय की मुलाकात के बाद टीवीके नेताओं ने विजय को भविष्य का पीएम बताना शुरू किया।

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“भारत का प्रधानमंत्री बनने के लिए आपको 272 सांसदों का समर्थन चाहिए। जो गठबंधन या दल यह संख्या हासिल करेगा, उसी का नेता पीएम बनेगा। टीवीके एक प्रमुख फिल्म स्टार के इर्द-गिर्द केंद्रित पार्टी है, वे अपने नेता के लिए सपने और कल्पनाएं रख सकते हैं।”

कार्ति चिदंबरम, सांसद (कांग्रेस)

संसद में संख्या बल ही तय करेगा पीएम का चेहरा

तमिलनाडु की क्षेत्रीय राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय पटल पर पहचान बनाने की महत्वाकांक्षा रखने वाले दलों पर कांग्रेस ने सीधा हमला बोला है। कार्ति चिदंबरम के अनुसार, क्षेत्रीय दलों और उनके नेतृत्व की राष्ट्रीय आकांक्षाएं होना स्वाभाविक है, लेकिन अंतिम निर्णय संसद का संख्या बल ही करता है।

किसी भी राजनीतिक दल को सरकार बनाने के लिए लोकसभा की कुल 543 सीटों में से कम से कम 272 सीटों के जादुई आंकड़े को छूना होता है। बिना बड़े राष्ट्रीय गठबंधन के इस आंकड़े तक पहुंचना किसी भी क्षेत्रीय पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है।

‘फैन क्लब मोड से बाहर नहीं निकल पा रहे नेता’

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने भी टीवीके के दावों पर तीखा तंज कसा है। कोयंबटूर हवाई अड्डे पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि टीवीके के कुछ नेता अभी भी “फैन क्लब मोड” में काम कर रहे हैं।

अमित शाह के साथ बैठक के बाद तेज हुईं अटकलें

तमिलनाडु के चेंगलपट्टू में आयोजित दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में विजय की मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दिया। इस परिषद के अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह थे, जबकि विजय ने इसके उपाध्यक्ष के रूप में हिस्सा लिया।

बैठक के दौरान दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत और मुलाकातों के बाद टीवीके कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा गया, जिसे लेकर विरोधी पार्टियां लगातार तंज कस रही हैं।

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FAQs

Q1: क्या TVK नेता विजय भारत के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं?

भारत का प्रधानमंत्री बनने के लिए किसी भी दल या गठबंधन के पास संसद में कम से कम 272 लोकसभा सांसदों का समर्थन होना आवश्यक है। विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) को राष्ट्रीय स्तर पर यह संख्या बल हासिल करना होगा।

Q2: कार्ति चिदंबरम ने विजय के पीएम बनने के दावों पर क्या बयान दिया?

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने कहा कि टीवीके एक फिल्म स्टार के इर्द-गिर्द केंद्रित पार्टी है। पार्टी कार्यकर्ता अपने नेता के लिए सपने और कल्पनाएं रख सकते हैं, लेकिन देश का पीएम वही बनेगा जिसके पास 272 सांसदों का समर्थन होगा।

Q3: कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने टीवीके पर ‘फैन क्लब मोड’ का तंज क्यों कसा?

टीवीके नेता जगदीश्वरी के बयान “आज का सीएम, कल का पीएम होगा” पर प्रतिक्रिया देते हुए मणिकम टैगोर ने कहा कि टीवीके के नेता अभी भी राजनीतिक दल की जगह फैन क्लब मानसिकता से काम कर रहे हैं।

Q4: दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक में विजय की क्या भूमिका थी?

चेंगलपट्टू में आयोजित दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद की 31वीं बैठक की अध्यक्षता गृह मंत्री अमित शाह ने की, जिसमें टीवीके प्रमुख विजय ने उपाध्यक्ष के रूप में भाग लिया। इसी बैठक के बाद सियासी अटकलें तेज हुईं।

Q5: किसी भी नेता को प्रधानमंत्री बनने के लिए कितने सीटों की आवश्यकता होती है?

भारत के संविधान के अनुसार, लोकसभा में बहुमत साबित करने के लिए किसी भी राजनीतिक दल या गठबंधन के पास कम से कम 272 सांसदों की कुल संख्या होना अनिवार्य है।

विश्लेषणात्मक निष्कर्ष

तमिलनाडु की राजनीति में सिनेमा से राजनीति का सफर नया नहीं है, लेकिन राज्य स्तरीय दल से सीधे राष्ट्रीय राजनीति के शीर्ष पद का सपना देखना एक जटिल प्रक्रिया है। टीवीके भले ही अपने करिश्माई नेता के दम पर राज्य में पैठ बनाने की कोशिश कर रही हो, लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में 272 सीटों का अंकगणित साधने के लिए व्यापक गठबंधन और अखिल भारतीय विस्तार की आवश्यकता होगी। आने वाले चुनावों में टीवीके की वास्तविक संगठन क्षमता ही यह तय करेगी कि यह दावेदारी महज ‘फैन क्लब’ का उत्साह है या एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति।

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