Indravati Natya Samiti : राष्ट्रीय नाट्य कार्यशाला,प्रथम चरण का समापन-हिंदी साहित्य और रंगमंच के सशक्त समन्वय का सजीव उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब इन्द्रवती नाट्य समिति द्वारा आयोजित 30 दिवसीय निःशुल्क आवासीय प्रस्तुति-परक राष्ट्रीय नाट्य कार्यशाला के प्रथम चरण के समापन अवसर पर मुंशी प्रेमचंद की चर्चित कहानी ‘आगा पीछा’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। बैजनाथ सभागार में प्रस्तुत इस नाटक ने सामाजिक रूढ़ियों, जातीय भेदभाव और मानवीय संवेदनाओं को गहराई से उकेरते हुए दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।इन्द्रवती नाट्य समिति की राष्ट्रीय नाट्य कार्यशाला के प्रथम चरण में प्रेमचंद की कहानी ‘आगा पीछा’ का बैजनाथ सभागार में सशक्त मंचन। निर्देशन,अभिनय,संगीत और मंचीय प्रस्तुति की पूरी जानकारी।
कार्यक्रम का शुभारंभ और अतिथिगण
इस विशेष अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. राजकरण शुक्ला रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में पुष्पलता शर्मा एवं रंजना मिश्रा की गरिमामयी उपस्थिति रही। नाट्य प्रस्तुति से पूर्व मंच पर दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। इसके पश्चात गणेश वंदना के साथ नाटक का आरंभ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गरिमा से भर दिया।
निर्देशन और मंचीय प्रयोग
युवा रंग निर्देशक रोशनी प्रसाद मिश्र के कुशल निर्देशन में ‘आगा पीछा’ एक सशक्त रंगानुभूति बनकर सामने आया। नाटक को प्रभावी बनाने के लिए भोजपुरी और मैथिली लोकधुनों का सुंदर प्रयोग किया गया, जिसने कथा को स्थानीय रंग और भावनात्मक गहराई प्रदान की। संगीत, प्रकाश और मंच संयोजन का संतुलन ऐसा था कि दर्शक शुरुआत में जहां संगीत के साथ झूमते नजर आए, वहीं अंतिम दृश्य में सात्विक अभिनय ने सभी को भावुक कर दिया।

मुंशी प्रेमचंद्र द्वारा रचित कहानी आगा-पीछा का कथा-सार
नाटक की कथा कोकिला नामक एक वैश्या के जीवन के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे मजबूरी में वेश्यालय में बेच दिया जाता है। जनार्दन सेठ से संबंध के बाद वह एक कन्या को जन्म देती है, जिसका नाम श्रद्धा होता है। जब श्रद्धा कॉलेज जाती है तो समाज उसे ‘वैश्या की बेटी’ कहकर अपमानित करता है। इसी दौरान उसकी मुलाकात भगतराम से होती है, जो स्वयं जातीय भेदभाव का शिकार है। समान पीड़ा और विचारों के कारण दोनों के बीच मित्रता होती है, जो आगे चलकर प्रेम में बदल जाती है और विवाह की तिथि भी तय हो जाती है। लेकिन सामाजिक भय और मानसिक दबाव के कारण भगतराम विक्षिप्त अवस्था में पहुंच जाता है और अंततः मृत्यु को प्राप्त होता है। श्रद्धा इस आघात के बावजूद आजीवन उसके प्रति निष्ठा निभाने का प्रण लेती है और विवाह न करने का निर्णय करती है। कथा समाज के क्रूर यथार्थ और मानवीय संवेदना को गहरे स्तर पर उजागर करती है।
कलाकारों का सशक्त अभिनय
नाटक के पात्रों को कलाकारों ने जीवंत कर दिया—
- कोकिला- राहुल सेन
- चौधरी- जनार्दन सेठ एवं सूत्रधार-एक– अभोर
- चौधराइन एवं सूत्रधार-दो- मनीष कुमार
- श्रद्धा- यश कुमार
- भगतराम एवं सूत्रधार-तीन- सूर्यकांत आदि सभी कलाकारों ने अपने-अपने पात्रों को पूरी संजीदगी और भावनात्मक गहराई के साथ मंच पर उतारा।
मंचीय एवं तकनीकी योगदान
- प्रकाश परिकल्पना- रजनीश कुमार जायसवाल
- संगीत संयोजन- प्रजीत कुमार साकेत
- ढोलक- सत्यदीप द्विवेदी
- तबला- सजल मिश्र
- संगीत परिकल्पना एवं निर्देशन- रोशनी प्रसाद मिश्र
- कार्यशाला परिकल्पना- नीरज कुंदेर
- मंच संचालन एवं आभार प्रदर्शन- रोशनी प्रसाद मिश्र
शहर के गणमान्यजनों की उपस्थिति
इस अवसर पर विनय मिश्र, बाबूलाल कुंदेर, रामनरेश सिंह चौहान, श्रवण मिश्र, अखिलेश चतुर्वेदी, राकेश जायसवाल, डॉ. अजय सिंह गहरवार, नेहा कुंदेर, प्रहलाद मिश्र, विकास मिश्र, कुलदीप सोनी, प्रियांशु मिश्र सहित अनेक सुधी दर्शक उपस्थित रहे।
निष्कर्ष (Conclusion)-प्रेमचंद की कहानी ‘आगा पीछा’ का यह मंचन केवल एक नाट्य प्रस्तुति नहीं, बल्कि सामाजिक सच्चाइयों का संवेदनशील दस्तावेज़ बनकर उभरा। इन्द्रवती नाट्य समिति की यह पहल न केवल उभरते कलाकारों को मंच प्रदान करती है, बल्कि समाज को आईना दिखाने वाले साहित्य और रंगमंच की परंपरा को भी सशक्त करती है। यह प्रस्तुति दर्शकों के मन में लंबे समय तक प्रभाव छोड़ने वाली साबित हुई और राष्ट्रीय नाट्य कार्यशाला के प्रथम चरण का एक यादगार समापन बन गई।
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