MP News: इंदौर की मात्र ढाई साल की मासूम बच्ची दुर्लभ और गंभीर बीमारी SMA (स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी) से जूझ रही है। उसकी जान बचाने के लिए एक इंजेक्शन की जरूरत है, जिसकी कीमत करीब 9 करोड़ रुपये है।
MP News: राजगढ़ में स्पाइनल मस्कुलर अट्रॉफी (SMA टाइप-2) नामक दुर्लभ बीमारी से जूझ रही ढाई साल की मासूम अनिका शर्मा के जीवन बचाने के लिए उसकी मां सारिका शर्मा ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की लाड़ली बहना योजना की सभी बहनों से मार्मिक अपील की है। मां ने गुहार लगाई है कि अगर हर लाड़ली बहना सिर्फ 10-10 रुपये भी दे दे, तो उनकी बेटी को नया जीवन मिल सकता है।
कलेक्टर की जनसुनवाई में आंसू रोक नहीं पाए लोग
सोमवार को ब्यावरा में कलेक्टर शिवम वर्मा की जनसुनवाई में जब सारिका शर्मा ने अपनी बेटी के इलाज के लिए गुहार लगाई तो मौके पर मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। राजगढ़ जिले के ब्यावरा निवासी प्रवीण शर्मा और सारिका शर्मा की ढाई वर्षीय बेटी अनिका को SMA टाइप-2 है। यह बीमारी इतनी दुर्लभ है कि भारत में इसका इलाज उपलब्ध नहीं है।
अमेरिका में एक इंजेक्शन की कीमत 9 करोड़ रुपये
अनिका को बचाने का एकमात्र रास्ता अमेरिका में उपलब्ध जीन थेरेपी ‘जोलजेंस्मा’ (Zolgensma) है, जिसकी एक डोज की कीमत करीब 9 करोड़ रुपये है। यह दुनिया की सबसे महंगी दवा मानी जाती है। समय तेजी से बीत रहा है; अगर 2 साल की उम्र पार हो गई तो यह दवा असर नहीं करेगी।
लाड़ली बहनों से मां की भावुक अपील
सारिका शर्मा ने कहा, “मुख्यमंत्री जी ने लाड़ली बहना योजना से लाखों बहनों को सम्मान और आर्थिक सहारा दिया है। मेरी बस यही विनती है कि अगर प्रदेश की हर लाड़ली बहना अपने खाते से सिर्फ 10 रुपये भी हमें दे दे, तो 9 करोड़ रुपये आसानी से जुट जाएंगे और मेरी अनिका को नई जिंदगी मिल जाएगी।”
कलेक्टर ने दिया हर संभव मदद का भरोसा
कलेक्टर शिवम वर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने परिवार को पूरा सहयोग का आश्वासन दिया और शहर के उद्योगपतियों, व्यापारियों, सामाजिक संस्थाओं व आम नागरिकों से आगे आने की अपील की। कलेक्टर ने कहा, “यह एक मासूम बच्ची की जिंदगी का सवाल है। पूरा प्रशासन और समाज इस परिवार के साथ है।”
अभी दिल्ली AIIMS में चल रहा इलाज
फिलहाल अनिका का प्रारंभिक इलाज दिल्ली के एम्स में चल रहा है, लेकिन मुख्य उपचार के बिना उसकी हालत तेजी से बिगड़ सकती है। मध्यमवर्गीय परिवार के लिए अकेले 9 करोड़ रुपये जुटाना असंभव है, इसलिए परिवार ने समाज से हाथ फैलाया है।परिवार ने मदद के लिए बैंक खाता और यूपीआई नंबर भी जारी किया है। जो भी इस मासूम की जिंदगी बचाने में योगदान देना चाहें, वे आगे आ सकते हैं।
