भारतीय वैज्ञानिकों ने बनाया Placenta-on-Chip, गर्भावस्था रिसर्च में बड़ी उपलब्धि

Indian scientists develop 'Placenta-on-Chip'; a major breakthrough in pregnancy research.

Placenta-on-Chip: हमारे देश भारत के वैज्ञानिकों ने प्लेसेंटा ऑन चिप के नाम से एक नई तकनीक विकसित की है। जो इंसानी प्लेसेंटा के कामों की नकल कर सकती है। यह तकनीक गर्भावस्था से जुड़े रिसर्च, दवा और सुरक्षा जांच के साथ साथ बच्चे के स्वास्थ्य को बेहतर ढंग से समझने में भी मदद कर सकती हैं। डॉक्टर इसे भारतीय बायोमेडिकल रिसर्च के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मान रहे हैं।

Placenta-on-Chip क्या है और कैसे काम करता है?

प्लेसेंटा ऑन चिप एक छोटी माइक्रो फ्लूडिक छिपा है जिसे इंसानी प्लेसेंटा जैसा वातावरण तैयार करने के लिए ही विकसित किया गया है। इस चिप में मानव कोशिकाओं का उपयोग किया गया है ताकि यह देखा जा सके कि प्लेसेंटा शरीर में किस तरह से काम करती है। यह मॉडल पोषक तत्व और अपशिष्ट पदार्थ हो के आदान-प्रदान के साथ-साथ हार्मोन से जुड़ी गतिविधियों का अध्ययन करने में भी सक्षम होती है।

ये भी पढ़े: Space Oncology से क्या बदल सकता है कैंसर का इलाज? जानिए नई रिसर्च..

Placenta-on-Chip रिसर्च को क्या फायदा होगा?

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वैज्ञानिक अब गर्भावस्था के दौरान होने वाली कई प्रक्रियाओं का अध्ययन अपने लैब में कर पाएंगे। अब तक मानव प्लेसेंटा पर सीधे रिसर्च करना काफी मुश्किल माना जाता था इस तकनीक की मदद से यह समझना आसान होगा कि कोई दवा मां के भ्रूण तक पहुंचती है या फिर नहीं और उसका क्या प्रभाव मां के शरीर पर पड़ता है। इससे गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित दावों को बनाने में मदद मिलेगी।

इससे किन बीमारियों पर हो सकेगा बेहतर अध्ययन?

यह तकनीक गर्भावस्था से जुड़ी कई गंभीर समस्याओं पर रिसर्च को नई दिशा दे सकतीहै। प्री-एक्लेम्प्सिया, गर्भकालीन मधुमेह (Gestational Diabetes) और भ्रूण के सामान्य विकास में रुकावट जैसी स्थितियां भी इसमें शामिल होती है। अब इससे वैज्ञानिक इन बीमारियों के कारण और संभावित उपचारों को बेहतर तरीके से समझने का भी प्रयास कर सकेंगे।

इस तकनीक की क्या है सबसे खास बात?

Placenta-on-Chip दुनिया के कुछ देशों में पहले भी इसके मॉडल विकसित हो चुके हैं लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों का मॉडल अपेक्षाकृत कम लागत वाला और प्रयोगशालाओं के लिए अधिक व्यावहारिक बताया जा रहा है। इसे भारतीय शोध संस्थान की जरूरत को ध्यान में रखकर ही बनाया गया है जिससे भविष्य में अधिक इंस्टिट्यूट इसका उपयोग कर पाएंगे।

ये भी पढ़े: मानसून में Eye Infection से कैसे बचें? जानें लक्षण, कारण और बचाव

क्या यह तकनीक अभी मरीजों के इलाज में इस्तेमाल हो पाएगी?

फिलहाल दिया तकनीक केवल रिसर्च के उद्देश्य से ही विकसित की गई है इसका उपयोग अभी हॉस्पिटल में मरीजों के इलाज के लिए नहीं हो रहा है वैज्ञानिकों का मानना है कि आगे और भी ज्यादा टेस्ट और रिसर्च होने के बाद हम इसका उपयोग दवा के विकास गर्भावस्था से जुड़े अध्ययन और मातृ शिशु स्वास्थ्य अनुसंधान में बड़े लेवल पर कर पाएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *