LPG Shortage Impact on Indian Railway: ईरान-इजरायल युद्ध के कारण भारत समेत कई देशों में LPG और LNG की किल्लत हो गई है. रेलवे के आला अधिकारियों की मानें तो देशभर में एलपीजी सिलेंडर की कमी का असर रेलवे कैटरिंग पर भी पड़ने लगा है. जी हां आपको बताएं की ऐसे में रेलवे अस्थायी रूप से ट्रेनों में पकाए जाने वाले भोजन की सेवा रोकने पर विचार कर रहा है. सूत्रों के अनुसार जिन यात्रियों ने टिकट बुकिंग के समय भोजन प्री-बुक किया है, उन्हें रिफंड देने पर भी विचार किया जा रहा है.
वैकल्पिक कुकिंग के निर्देश
आपको बताएं दूसरी ओर इंडियन रेलवे ने अपने सभी लाइसेंसधारकों को वैकल्पिक कुकिंग सिस्टम अपनाने के निर्देश दिए हैं. IRCTC ने लाइसेंसधारी वेंडर्स से कहा है कि वे खाना बनाने के लिए LPG की जगह माइक्रोवेव और इंडक्शन का इस्तेमाल करें. IRCTC के मुताबिक रेलवे स्टेशनों पर मौजूद फूड प्लाजा, रिफ्रेशमेंट रूम और जन आहार केंद्रों को अब माइक्रोवेव ओवन और इलेक्ट्रिक इंडक्शन जैसे उपकरणों का उपयोग करने को कहा गया है ताकि गैस की कमी के बावजूद भोजन सेवा जारी रखी जा सके.
LPG की सप्लाई बाधित
रेलवे के पैंट्री कार आमतौर पर खाना बनाने के बजाय केवल भोजन को गर्म करने और वितरण का काम करते हैं. लेकिन बेस किचन में एलपीजी की सप्लाई बाधित होने से लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए भोजन तैयार करने में दिक्कत आ रही है.
IRCTC के दिशा-निर्देशों के मुताबिक रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के खाने की मांग को पूरा करने के लिए रेडी-टू-ईट चीजों का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना जरूरी है. अगर खाना पकाने के दूसरे तरीकों को नहीं अपनाया गया तो फूड सर्विस में परेशानी आ सकती है.
सरकार ने क्या किया?
गौरतलब है कि, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भरोसा दिलाया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को ऊर्जा की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि घरों के लिए पीएनजी और वाहनों के लिए सीएनजी की 100% सप्लाई सुनिश्चित की गई है. हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि इंडस्ट्री को उनकी जरूरत का लगभग 70 से 80% ईंधन मिलता रहेगा.
लागू किया ये नियम
सरकार ने घरेलू ऊर्जा बाजार को सुरक्षित रखने के लिए Essential Commodities Act भी लागू किया है. गौर करने वाली बात यह है की इस नए प्रावधान के तहत घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस की पूरी आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी. वहीं अन्य सेक्टर को पिछले छह महीनों की औसत खपत के आधार पर सीमित आवंटन मिलेगा.
