India US Trade Deal Cancel Reason: अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक (Howard Lutnick) ने बड़ा दावा किया है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता (India-US Trade Deal) किसी नीति विवाद के कारण नहीं रुका, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को सीधे फोन न करने की वजह से रुका। लुटनिक के अनुसार, ट्रंप चाहते थे कि मोदी खुद उनसे बात करके डील फाइनल करें, लेकिन मोदी ने ऐसा नहीं किया, जिससे ट्रंप ने इसे अपने ‘ईगो’ (Ego) पर ले लिया। अब पुराने ऑफर खत्म हो चुके हैं, और भारत को नई बातचीत में कठिन शर्तों का सामना करना पड़ सकता है।
लुटनिक ने कहा, “पूरी डील सेट थी, ट्रंप खुद इसे क्लोज करना चाहते थे। इसके लिए बस मोदी को राष्ट्रपति को कॉल करना था। भारतीय पक्ष ऐसा करने में असहज था और मोदी ने कॉल नहीं किया।” भारत को डील फाइनल करने के लिए ‘तीन शुक्रवार’ का समय दिया गया था। लुटनिक के मुताबिक, ट्रंप ने ईगो पर ले लिया और डील रुक गई। इसके बाद वियतनाम, इंडोनेशिया और फिलीपींस को फायदा मिला, जहां अमेरिका ने ट्रेड डील कर ली। लुटनिक ने ब्रिटेन के उदाहरण दिया, जहां प्रधानमंत्री कीर स्टारमर (Keir Starmer) ने समय सीमा खत्म होने से पहले ट्रंप को फोन किया और अगले दिन डील का ऐलान हो गया।
यह घटना पिछले साल जुलाई की है, जब ट्रंप ने पीएम मोदी को ‘चार बार’ कॉल किया था, लेकिन मोदी ने बात करने से इनकार कर दिया। भारत सरकार को अंदेशा था कि ट्रंप बातचीत के नतीजों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर सकते हैं। इसके अलावा, भारत-पाकिस्तान संघर्ष में ट्रंप की मध्यस्थता की कोशिशों को मोदी ने खारिज कर दिया, जिससे ट्रंप नाराज थे।
कुछ दिन पहले ट्रंप ने दावा किया था कि पीएम मोदी ने उनसे मिलने के लिए दरख्वास्त की थी। ट्रंप ने कहा कि मोदी ने उनसे मुलाकात की गुजारिश की, लेकिन लुटनिक का बयान इससे उलट है। ट्रंप ने भारत पर रूस से तेल खरीदने के लिए 25% और फिर 50% टैरिफ (Tariff) लगाया, क्योंकि इससे रूस को यूक्रेन युद्ध जारी रखने में मदद मिल रही है। भारत का कहना है कि यह पेनाल्टी गलत है और इसे तुरंत हटाया जाना चाहिए। कुल 50% टैरिफ में से 25% ‘रेसिप्रोकल (Reciprocal)’ टैरिफ है, जबकि 25% रूसी तेल खरीद की वजह से। हालांकि, 17 सितंबर को मोदी के जन्मदिन पर ट्रंप के कॉल के बाद बर्फ कुछ पिघली है। दोनों नेताओं ने दिवाली और दिसंबर में भी बात की है, लेकिन ट्रेड डील अभी भी अधर में है।
भारत-अमेरिका व्यापार घाटा
अमेरिका के साथ भारत का 2024-25 में वस्तुओं का ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) 41.18 बिलियन डॉलर था। पिछले वर्षों में यह 2023-24 में 35.32 बिलियन डॉलर, 2022-23 में 27.7 बिलियन डॉलर, 2021-22 में 32.85 बिलियन डॉलर और 2020-21 में 22.73 बिलियन अमेरिकी डॉलर था। अमेरिका ने बढ़ते व्यापार घाटे पर चिंता जताई है।
भारत का विपक्ष इस मामले में पीएम मोदी को घेर रहा था कि मोदी ट्रंप की जी हुजूरी करते हैं। लेकिन सच ये है कि पीएम मोदी ने बाकी देशों की तरह ट्रंप के सामने झुकना मंजूर नहीं किया। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने कहा कि मोदी की विदेश नीति अमेरिका पर निर्भर है, लेकिन लुटनिक के बयान से साफ है कि मोदी ने ट्रंप की मांग नहीं मानी।
