यूरोपीय संघ (EU) और भारत के बीच रणनीतिक संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। नई दिल्ली में आयोजित एक सम्मेलन में यूरोपीय संघ की हाई रिप्रेजेंटेटिव काजा क्लास ने India-EU FTA पर जोर देते हुए कहा कि यूरोप के साथ व्यापारिक समझौते समय जरूर लेते हैं, लेकिन वे दीर्घकालिक और भरोसेमंद होते हैं। वर्तमान वैश्विक अस्थिरता के बीच यह साझेदारी दोनों लोकतंत्रों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
यूरोपीय संघ की विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की उच्च प्रतिनिधि काजा क्लास ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूरोप समझौतों पर लंबी बातचीत के लिए जाना जाता है, लेकिन एक बार सहमति बन जाने पर वह उन पर पूरी निष्ठा से कायम रहता है।

व्यापारिक रिश्तों में ‘भरोसा’ सबसे बड़ी पूंजी: India-EU FTA
काजा क्लास के अनुसार, आज की बदलती दुनिया में ‘भरोसेमंद’ होना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि कई देश अब यूरोप के साथ साझेदारी करना चाहते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि यूरोपीय संघ अपने वादों और समझौतों को लेकर गंभीर रहता है। India-EU FTA के माध्यम से दोनों पक्ष न केवल व्यापार, बल्कि रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में भी बड़े स्तर पर सहयोग कर सकते हैं।
सुरक्षा और रक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक साझेदारी
भारत और यूरोपीय संघ ने पहली बार सुरक्षा और रक्षा साझेदारी की शुरुआत की है। इसे एक मील का पत्थर बताते हुए यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संयुक्त बयान का भी जिक्र किया गया। इस साझेदारी का उद्देश्य केवल आर्थिक मजबूती नहीं, बल्कि असुरक्षित होती जा रही दुनिया में अपने नागरिकों को सुरक्षा प्रदान करना भी है।
इसमें समुद्री सुरक्षा, साइबर हमलों से निपटने और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करने पर सहमति बनी है। दोनों पक्ष अब सूचना सुरक्षा समझौते (Security of Information Agreement) के लिए भी बातचीत शुरू कर रहे हैं।
रूस की चुनौती और भारत की भूमिका
काजा क्लास ने स्वीकार किया कि इस समय यूरोप रूस की ओर से अस्तित्वगत खतरे का सामना कर रहा है। ऐसे में यूरोपीय देशों को अपनी सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर यूरोपीय उद्योग रक्षा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं होते, तो भारत जैसे बड़े देश से रक्षा उपकरण और क्षमताएं खरीदना एक बेहतर विकल्प है। भारत की ओर से मिलने वाली प्रतिस्पर्धा यूरोपीय उद्योगों को भी बेहतर समाधान खोजने के लिए प्रेरित करेगी।

बदलती विश्व व्यवस्था और छोटे देशों का हित
यूरोपीय प्रतिनिधि ने कहा कि कुछ महाशक्तियां वर्तमान बहुपक्षीय व्यवस्था (Multilateral Order) को फिर से लिखने की कोशिश कर रही हैं। उनके अनुसार, दुनिया को गुटों में बांटना छोटे और मध्यम आकार के देशों के हित में नहीं है। हालांकि भारत एक बड़ी शक्ति है, लेकिन उसे भी यूरोप के साथ मिलकर नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था बनाए रखने में रुचि है।
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