Site iconSite icon SHABD SANCHI

ICMR Biomedical Technologies: कैंसर से लड़ाई में भारत की बड़ी पहल..

ICMR Biomedical Technologies: India's major initiative in the fight against cancer and infections.ICMR Biomedical Technologies: India's major initiative in the fight against cancer and infections.

ICMR Biomedical Technologies: India's major initiative in the fight against cancer and infections.

भारत में स्वास्थ्य अनुसंधान को नई दिशा देने की दिशा में भारतीय विज्ञान अनुसंधान परिषद में तीन स्वदेशी ICMR Biomedical Technologies भारतीय कंपनी को हस्तांतरित किया गया है इसमें सर्वाइकल कैंसर के इलाज और टाइफाइड व अन्य बैक्टीरियल इंफेक्शन से बचाव के लिए विकसित तकनीक शामिलहै। इस कदम का उद्देश्य रिसर्च को मरीजों तक तेजी से पहुंचना और देश में आधुनिक चिकित्सा समाधान को विकसित करना है।

ICMR Biomedical Technologies के तहत कौन-सी तकनीकें अब ट्रांसफर हुईं?

आईसीएमआर ने कुल तीन स्वदेशी बायोमेडिकल तकनीक का लाइसेंस उद्योग को सौप है इनमें पहली तकनीक SHetA2 नामक दवा से जुड़ी हुई है जिसे एचपीवी के संक्रमण के कारण होने वाले सर्वाइकल प्री कैंसर स्थिति के इलाज के लिए ही बनाया गया है इसके अलावा दो नई वैक्सीन तकनीकी भी इसमें ट्रांसफर की गई है जिसका उद्देश्य टाइफाइड परतीफाइड और सीगला जैसे बैक्टीरियल इंफेक्शन से सुरक्षा देना है।

ये भी पढ़े: अब खून की जांच से पकड़ में आएगा cancer, UCLA स्टडी में सामने आई जानकारी..

सर्वाइकल कैंसर के इलाज में क्या नई उम्मीद

SHetA2 तकनीक स्कूल इस तरह विकसित किया गया है कि यह असामान्य कोशिकाओं को निशाना बनाते हुए हेल्दी कोशिकाओं को कम नुकसान पहुंचाएगी। ICMR ने इसका लाइसेंस इंपर फार्मास्यूटिकल को दिया है अब कंपनी आगे इसकी क्लिनिकल टेस्ट नियम अनुसार मंजूरी और उत्पादन के प्रक्रियापर अपना ध्यान देगी अगर सभी चरण सफल हो जाते हैं तो भविष्य में यह तकनीक सर्वाइकल कैंसर की शुरुआती अवस्था में इलाज में उपयोगी होगी।

संक्रामक रोगों के लिए है अगली पीढ़ी की वैक्सीन

ICMR के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन बैक्टीरियल इंफेक्शंस (NIRBI), कोलकाता के द्वारा विकसित दो वैक्सीन तकनीक का लाइसेंस बायोलॉजिकल ई को दिया गया है इनमें अगली पीढ़ी का टायफाइड वैक्सीन और एक क्रीम कंपोनेंट वैक्सीन तकनीक शामिल है जो साल्मोनेला टाइफी, सालमोनेला पाराटाइफी और शांगीला जैसे बैक्टीरिया से होने वाले इन्फेक्शन से व्यापक स्तर पर सुरक्षा देने के लिए विकसित की गई है।

देश के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए क्यों अहम है यह कदम?

ICMR Biomedical Technologies का उद्योग को हस्तांतरण भारत में लैपटॉप मार्केट मॉडल को मजबूत कर पाएगा इससे देश में विकसित अनुसंधान तेजी से दबा और वैक्सीन के रूप में मरीजों तक पहुंच पाएंगे। इसके साथ ही स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा मिल पाने से आयात पर निर्भरता कम हो सकेगी और स्वास्थ्य क्षेत्र पर आत्मनिर्भरता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

ये भी पढ़े: WHO Cancer Report: दुनिया की 92% आबादी किसी न किसी रूप में प्रभावित…

मरीजों के लिए अब इसका क्या मतलब है?

फिलहाल यह सभी तकनीकी बाजार में उपलब्ध नहीं है अब संबंधित कंपनियों इसकी क्लिनिकल ट्रायल नियम के मंजूरी और उत्पादन की प्रक्रिया को पूरीकरेगी। सभी आवश्यक चरण सफल होने के बाद ही यह दवाई और वैक्सीन आम लोगों के लिए उपलब्ध होपाएगी। इसलिए इसको भविष्य की चिकित्सा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि मान सकते हैं।

Exit mobile version