Aatm Manthan :-दुनिया में हर तरह के लोग होते हैं इसी वजह से अच्छे बुरे सब लोग मिलते हैं ,हम चाह के भी केवल अच्छी प्रकृति के लोग अपने आसपास नहीं चुन सकते भले ही हमें इनसे कितनी भी परेशानी क्यों न हो इसलिए समझदार लोग अच्छी -बुरी दोनों प्रकृति के लोगों से मिलकर ,तालमेल बिठाकर रहते हैं क्योंकि उनके अंदर इतना माद्दा होता है कि वो देखते तो अच्छा बुरा दोनों हैं लेकिन ग्रहण केवल अच्छा ही करते हैं। इसलिए इन्हें कुसंग करने की भी अनुमति दी गई है। कहाँ ! क्यों ! आइये जानते हैं –
इन्हीं लोगों के बारे में कबीरदास जी ने कहा है “जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।
चन्दन विष व्यापत नहीं, लिपटे रहत भुजंग।।
इस दोहे का अर्थ है कि अच्छे या उत्तम स्वभाव वाले व्यक्ति चन्दन के पेड़ के समान होते हैं इसलिए वो बुरी संगति या दुष्ट लोगों की संगत कर सकते हैं वो इसलिए कि उनकी संगती का इन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि जिस प्रकार चन्दन के वृक्ष से विषैले साँप लिपटे रहने पर भी चन्दन अपनी शीतलता और सुगंध नहीं छोड़ता, उस पर साँप के ज़हर का भी असर नहीं होता , उसी प्रकार सज्जन पुरुष कुसंगति में रहकर भी अपनी अच्छाई और चरित्र को बनाए रखने में सक्षम होते हैं।
उत्तम प्रकृति से तात्पर्य सज्जन, ज्ञानी और दृढ़ चरित्र वाले उन लोगों से है जो विषम परिस्थितियों में भी अपना धैर्य और गुण नहीं खोते परिस्थियों के आगे हथियार नहीं डालते बल्कि हर मुश्किल का डट कर सामना करते हैं मुक़ाबला करते हैं।
कुसंग का प्रभाव से तात्पर्य है कि जिस तरह चन्दन अपनी खुशबू नहीं छोड़ता, उसी तरह अच्छे लोग बुरी परिस्थितियों या बुरे लोगों की संगति में रहकर भी अपने विचारों को शुद्ध रखते हैं। इसीलिए रहीमदास जी ने अपने दोहे में चन्दन की तुलना सज्जन मनुष्य से और साँप की कुसंगति से की है
आखिर में हम कह सकते हैं कि इस रंग रंगीली दुनिया से तालमेल बिठाना है तो चन्दन बनना ही पड़ेगा तभी सामंजस्य बना रहेगा ,न हम किसी को बुरे लगेंगें न दुनिया हमें क्योंकि ऐसा करने से न हम किसी को भला बुरा कहेंगें न कोई हमें, बस हम अच्छाई ग्रहण करने की कोशिश करेंगे और अपनी इसी राह पर चलते जाएँगें। सोचियेगा ज़रूर इस बारे में फिर मिलेंगें आत्म मंथन की अगली कड़ी में ,धन्यवाद।
