Hindi Grammar-Samas in Hindi : समास पहचानने की आसान ट्रिक्स और उदाहरणों भी

Hindi Grammar-Samas in Hindi : समास पहचानने की आसान ट्रिक्स और उदाहरणों भी-हिंदी व्याकरण में समास एक ऐसा विषय है, जो पहली नज़र में कठिन लगता है, लेकिन सही तकनीक और उदाहरणों के साथ यह बेहद सरल हो जाता है। प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC,SSC,MPPSC, शिक्षक पात्रता परीक्षा और स्कूल बोर्ड एग्ज़ाम्स में समास से जुड़े प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। हाल ही में सामने आई यह उपयोगी इन्फोग्राफिक “समास पहचानने की ट्रिक” छात्रों और अभ्यर्थियों के लिए एक त्वरित मार्गदर्शिका का काम करती है। इसमें समास के सभी प्रमुख प्रकारों को परिभाषा, पहचान की ट्रिक और स्पष्ट उदाहरणों के साथ प्रस्तुत किया गया है जो निश्चित ही अत्यंत महत्वपूर्ण उपयोगी पठनीय संतुलित और सार्थक आर्टिकल के रूप विशेष तौर पर में पठन-पाठन के क्षेत्र में मददगार साबित होगा। समास पहचानने की आसान ट्रिक्स और उदाहरणों के साथ हिंदी व्याकरण की संपूर्ण गाइड- UPSC, SSC, MPPSC और बोर्ड परीक्षाओं के लिए भी उपयोगी ।

समास के प्रकार और उनकी पहचान

अव्ययीभाव समास-शब्द का पहला पद प्रधान होता है और अव्यय (उपसर्ग) होता है। समस्त पद अव्यय बन जाता है।
समझने की ट्रिक-शब्द के प्रारंभ में उपसर्ग (आ, प्रति, यथा, बे,भर, नि) या शब्दों की पुनरावृत्ति।
उदाहरण के लिए जैसे-प्रतिदिन (हर दिन)यथाशक्ति (शक्ति के अनुसार)आजीवन (जीवन भर) रातोंरात (रात ही रात में) तो इस तरह अव्ययीभाव समास में अव्यय प्रधान होता है और पूरा पद अव्यय का कार्य करता है। यानि प्रतिदिन और आजीवन जैसे शब्द रोज़मर्रा की भाषा में प्रयुक्त होते हुए भी व्याकरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

तत्पुरुष समास-इसमें दूसरा पद प्रधान होता है,दोनों पदों के बीच कारक चिह्न का लोप होता है।
समझने की ट्रिक-विग्रह करने पर को, से, के लिए, का, की, के, में, पर आता है।
उदाहरण के लिए-जैसे राजपुत्र यानि राजा का पुत्र,माखनचोर यानि माखन को चुराने वाला,रसोईघर अर्थात रसोई के लिए घर,वनवास मतलब वन में वास, तत्पुरुष समास है यह सबसे अधिक प्रयुक्त समास है जिसमें दूसरा पद प्रधान होता है। विग्रह करते समय कारक चिह्नों की उपस्थिति इसे पहचानने की सबसे आसान ट्रिक है।

कर्मधारय समास- इस समास के उत्तरपद प्रधान, दोनों पदों में विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय संबंध।
समझने की ट्रिक-विग्रह में है जो या के समान आता है।
उदाहरण के लिए- जैसे नीलकमल यानि नीला है जो कमल,चंद्रमुख मतलब चंद्र के समान मुख,महापुरुष अर्थात महान है जो पुरुष। कहने का आशय कर्मधारय समास विशेषण-विशेष्य संबंध पर आधारित यह समास भाषा को काव्यात्मक और प्रभावशाली बनाता है, जैसे “चंद्रमुख” या “नीलकमल”।

द्वंद्व समास-इस समास में दोनों पद प्रधान होते हैं। विग्रह में और, या, अथवा आता है।
समझने की ट्रिक-दोनों शब्दों के बीच योजक चिह्न (–) और अर्थ में समानता या फिर विलोम।
उदाहरण के लिए-जैसे माता-पिता,रात-दिन,सुख-दुख लगा हो। द्वंद्व समास में जब दोनों पद समान रूप से महत्वपूर्ण हों और ‘और’ का भाव आए, तब द्वंद्व समास होता है। यह सामाजिक और पारिवारिक संदर्भों में अधिक दिखता है।

द्विगु समास-इस समास में पहला पद संख्यावाची विशेषण होता है और पूरा पद समूह का बोध कराता है।
समझने की ट्रिक-पहला शब्द संख्या, विग्रह में समूह,समाहार आता है।
उदाहरण के लिए-चौराहा यानि चार राहों का समूह इसमें चार की संख्या का बोध है ,नवरात्रि यानि नौ रात्रियों का समूह,शताब्दी अर्थात सौ वर्षों का समूह,यानि द्विगु समास में संख्या से शुरू होने वाले शब्दों को देखकर अक्सर छात्र भ्रमित होते हैं लेकिन पहला पद यदि संख्या हो और समूह का अर्थ दे, तो वह द्विगु समास होता है।

बहुव्रीहि समास-इस समास के शब्दों में कोई भी पद प्रधान नहीं होता बल्कि दोनों मिलकर किसी तीसरे अर्थ का संकेत करते हैं।
समझने की ट्रिक-विग्रह में वाला,वाली,जिसका,जिसकी आता है।
उदाहरण के लिए-दशानन यानि जिसके दस हैं आनन जैसे रावण,नीलकंठ यानि जिसका नीला है कंठ या नील कंठ वाला, लंबोदर-लंबा है उदर जिसका यानि गणेश। अतः बहुव्रीहि समास-यह सबसे रोचक समास है, क्योंकि इसका अर्थ शब्दों से बाहर जाकर किसी तीसरे व्यक्ति या वस्तु की ओर संकेत करता है, जैसे देवी-देवताओं के नाम।

निष्कर्ष-समास हिंदी भाषा की संक्षिप्तता और सौंदर्य का मूल आधार है। यदि छात्र केवल परिभाषाएं रटने के बजाय पहचान की ट्रिक्स और उदाहरणों को समझ लें, तो समास से जुड़े प्रश्नों में गलती की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है। यह इन्फोग्राफिक-आधारित गाइड न केवल परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी है, बल्कि भाषा की गहरी समझ विकसित करने में भी सहायक है।

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