Site iconSite icon SHABD SANCHI

Hexagon Nutrition IPO: कम वैल्यूएशन, मजबूत बिजनेस मॉडल ने बढ़ाया इंटरेस्ट

Hexagon Nutrition IPO: Low valuation and strong business model boost investor interest.Hexagon Nutrition IPO: Low valuation and strong business model boost investor interest.

Hexagon Nutrition IPO: Low valuation and strong business model boost investor interest.

Hexagon Nutrition IPO नहीं निवेश करने वाले लोगों का ध्यान अपनी और आकर्षित किया है। 138 पॉइंट 87 करोड रुपए के इस पब्लिक इश्यू को बाजार में बिल्कुल पॉजिटिव रिएक्शन देखने को मिले हैं कंपनी का काम कर्ज इसका बढ़ता मुनाफा और उचित वैल्यूएशन होना इसकी प्रमुख वजह है जबकि ऑफर फॉर सेल्स संरचना और कच्चे माल पर निर्भरता होना कुछ हम जोखिम भी सामने लाता है।

Hexagon Nutrition IPO की प्रमुख विशेषताएं क्या है

हेक्सागन न्यूट्रिशन आईपीओ का प्राइस बैंड 42 रुपए से 45 रुपए प्रति शेयर पर निर्धारित किया गया है। यह यीशु पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल है यानी इससे जुटाए जाने वाली इनकम कंपनी के पास नहीं जाएगी बल्कि मौजूदा शेयरधारक को ही मिलेगी। न्यूनतम निवेश के लिए 333 शेरों का एक लॉट भी निर्धारित किया गया है जिसके कीमत लगभग 14985 रुपए है। कंपनी विटामिन और मिनरल प्रीमिक्स क्लीनिकल न्यूट्रीशन तथा डॉक्टर के थैरेपीयूटिक न्यूट्रिशन प्रोडक्ट के निर्माण में काफी एक्टिव है। इसके प्रोडक्ट भारत के साथ-साथ 75 से ज्यादा देशों में निर्यात होते हैं।

ये भी पढ़े: ₹40 लाख के एजुकेशन लोन पर Ekta Agrawal ने बताई ROI की हकीकत…

मजबूत वित्तीय प्रदर्शन और इसकी आकर्षक वैल्यूएशन

बाजार विश्लेषकों के अनुसार कंपनी ने पिछले कुछ सालों में राजस्व और शुद्ध लाभ दोनों में लगातार सुधार हासिलकिए हैं। कंपनी का डेबिट तो इक्विटी अनुपात लगभग 0.14 है जो कि कम कर्ज का संकेत देता है। वही लगभग 17% कर ROCE पूंजी प्रभावी उपयोग को दिखाता है। इसका इशू अनुमानित प्राइस तो अर्निंग अनुपात करीब 15.35 गुना है। जिसे न्यूट्रिशन सेक्टर की सूचीबद्ध कंपनियों की तुलना में संतुलित वैल्यूएशन बताया जाता है।

किन रिस्क पर निवेशक को ध्यान देना चाहिए

हालांकि Hexagon Nutrition IPO मैं कहीं पॉजिटिव पहलू देखने को मिले हैं लेकिन कुछ रिस्क भी अभी भी मौजूद है। पूरा इशू ऑफर फॉर सेल होने के कारण कंपनी को विस्तार के लिए नई पूंजी प्राप्त नहीं हो पाएगी। इसके अलावा कंपनी का एक बड़ा हिस्सा चुने हुए ग्राहकों पर भी निर्भर करता है कंपनी अपने कच्चे माल का महत्वपूर्ण हिस्सा चीन देश से आयात करती है ऐसे में वैश्विक सप्लाई चैन में आयात लागत और मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव का असर भी बिजनेस पर पड़ता देखा जाता है।

ये भी पढ़े: Rajesh Exports पर SEBI की कार्रवाई, राजेश मेहता का बिजनेस जांच के दायरे में..

बाजार रिएक्शन और आगे का आउटलुक

इससे मार्केट की शुरुआती संकेत से हमें पता चलता है कि निवेश करने वाले लोगों की रुचि इस इश्यू में ही बनी हुई है। हालांकि ग्रे मार्केट प्रीमियम में शुरुआती लेवल की तुलना में कुछ नमी भी देखने को मिलती है बाजार विशेषज्ञों के अनुसार जीएमपी केवल अनौपचारिक संकेत तक होता है और इसे लिस्टिंग प्रदर्शन की गारंटी नहीं मान सकतेहैं। बाजार विश्लेषकों के अनुसार कंपनी का विविध प्रोडक्ट पोर्टफोलियो निर्यात आधारित बिजनेस और संतुलित फाइनेंशियल स्थिति से लंबी अवधि के नजरिए से एक आईपीओ बनाते हैं। वही अल्पकालिक प्रदर्शन बाजार की समग्र स्थिति और निवेश करने वाले लोगों की मांग पर ही निर्भर करता है। यह आर्टिकल केवल सूचना के उद्देश्य सही से निवेश की सलाह नहीं समझे।

Exit mobile version