हरदीप सिंह पुरी मध्य प्रदेश से निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुने गए, कांग्रेस कोर्ट जाएगी

HARDEEP SINGH PURI

भोपाल। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी मध्य प्रदेश की रिक्त राज्यसभा सीट से निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं। उनके चुनाव के बाद प्रदेश से राज्यसभा में भाजपा के 10 और कांग्रेस के एक सांसद सहित कुल 11 सदस्य हो गए हैं।

पुरी के नामांकन पत्र पर कांग्रेस ने 100 से अधिक आपत्तियां दर्ज कराने का दावा किया था। इनमें पत्नी के नाम, विदेशी संपत्तियों और बैंक खातों की जानकारी को लेकर सवाल उठाए गए थे। हालांकि, रिटर्निंग ऑफिसर उमेश कुमार शर्मा ने जांच के बाद सभी आपत्तियां खारिज कर दीं।

कांग्रेस हाईकोर्ट में दायर करेगी याचिका

कांग्रेस विधायक और मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने कहा है कि पार्टी इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर करेगी। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक याचिका दायर नहीं की जा सकती थी। कटारे के मुताबिक, हरदीप सिंह पुरी निर्विरोध चुने गए हैं, लेकिन कांग्रेस की कानूनी टीम उनके निर्वाचन को चुनौती देगी।

एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई थी सीट

राज्यसभा की यह सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। उन्होंने 14 अक्टूबर को सदस्यता से इस्तीफा दिया था। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू की।

भाजपा ने 28 अक्टूबर को हरदीप सिंह पुरी को प्रत्याशी घोषित किया था। उन्होंने 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और अन्य नेताओं की मौजूदगी में विधानसभा पहुंचकर नामांकन दाखिल किया था।

शपथपत्र में पत्नी और विदेशी संपत्तियों को लेकर उठे सवाल

नामांकन की जांच के दौरान कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे और निर्दलीय उम्मीदवारों ने पुरी के दस्तावेजों पर प्रमुख रूप से तीन आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इनमें शपथपत्र में पत्नी के नाम का उल्लेख नहीं होने, विदेशी संपत्तियों का मूल्य अमेरिकी डॉलर और स्विस फ्रैंक में दर्शाने तथा जिनेवा स्थित संपत्ति और विदेशी बैंक खातों का विवरण नहीं देने से जुड़े सवाल शामिल थे।

इसके अलावा, नोटरी सत्यापन और शपथपत्र प्रमाणित करने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई गई थी।

रिटर्निंग ऑफिसर ने हरदीप सिंह पुरी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। दस्तावेजों की जांच के बाद सभी आपत्तियां खारिज कर दी गईं। निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं पाया गया।

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