कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 2 अक्टूबर (गांधी जयंती) को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में बड़े स्तर पर आंदोलन करने का ऐलान किया है। दिल्ली के बजाय इस बार आंदोलन का केंद्र शिवाजी पार्क होगा, जहाँ कार्यकर्ताओं द्वारा ‘जेल भरो आंदोलन’ चलाया जाएगा।
“ज्ञानू को जाना ही होगा… अगर हमें लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने का अधिकार नहीं दिया गया, तो CJP गांधी जयंती के दिन मुंबई के शिवाजी पार्क से जेल भरो आंदोलन की शुरुआत करेगी।”
— अभिजीत दीपके, संस्थापक, कॉकरोच जनता पार्टी (X/ट्विटर पोस्ट)
दिल्ली नहीं अब मुंबई बनेगा आंदोलन का नया केंद्र
मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए CJP ने अपने विरोध प्रदर्शन का रुख नई दिल्ली से बदलकर मुंबई कर दिया है। पार्टी संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए स्पष्ट किया कि 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में हजारों समर्थक एकत्र होंगे।
पार्टी का स्पष्ट रुख है कि जब तक ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तब तक यह लड़ाई थमने वाली नहीं है। सीजेपी नेताओं का कहना है कि यह केवल एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे और मतदान के अधिकार को बचाने की मुहिम है।
CJP का 48 घंटे का अल्टीमेटम और गंभीर आरोप
इससे पूर्व, गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित एक तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिजीत दीपके ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त को 48 घंटे का समय सीमा अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि चुनाव आयोग का मौजूदा कामकाज पारदर्शी नहीं है और यह स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव प्रणाली के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है।
CJP नेतृत्व द्वारा उठाए गए प्रमुख बिंदु और मांगें:
- मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा: ज्ञानेश कुमार तुरंत अपने पद से त्यागपत्र दें और उनके कार्यकाल की निष्पक्ष जांच हो।
- SIR प्रक्रिया पर रोक: स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) को तत्काल प्रभाव से फ्रीज किया जाए।
- वोटर लिस्ट की बहाली: जनवरी 2025 की मूल मतदाता सूची को पुनः लागू किया जाए, जिससे हटाए गए वैध मतदाताओं के नाम वापस जुड़ सकें।
- 2023 का चुनाव आयोग कानून रद्द हो: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के विवादास्पद कानून को निरस्त कर संवैधानिक निष्पक्षता बहाल की जाए।
मुंबई पुलिस ने नहीं दी इजाजत: शिवाजी पार्क पर कानूनी पेंच
आंदोलन की घोषणा के तुरंत बाद मुंबई पुलिस ने CJP को 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में विरोध प्रदर्शन की औपचारिक अनुमति देने से इनकार कर दिया है। पुलिस प्रशासन ने इसके पीछे बॉम्बे हाईकोर्ट (PIL 116/2009) के पुराने निर्देशों, स्थानीय निकाय (BMC) की मंजूरी न होने और क्षेत्र के ‘साइलेंस जोन’ (Silence Zone) होने का हवाला दिया है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिवाजी पार्क के आसपास कई प्रमुख अस्पताल और घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र हैं। ऐसे में बड़े जमावड़े से आपातकालीन वाहनों की आवाजाही और भारी ट्रैफिक जाम की समस्या पैदा हो सकती है। हालांकि, पुलिस के इस रुख के बावजूद अभिजीत दीपके ने अपना रुख सख्त रखते हुए सीधे ‘जेल भरो आंदोलन’ की हुंकार भर दी है।
एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक का समर्थन
इस पूरे घटनाक्रम में लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का समर्थन भी CJP के इस आंदोलन को मिला है। वांगचुक ने चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही के इस मुद्दे को बेहद अहम बताया है।
सोनम वांगचुक का मानना है कि नागरिक समाज को अपने अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए खुद आगे आना होगा। इस मुद्दे पर जनता का एकजुट होना इस बात का प्रमाण है कि देश में लोकतांत्रिक मूल्यों को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1: CJP 2 अक्टूबर को मुंबई में आंदोलन क्यों कर रही है?
CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन समीक्षा (SIR) प्रक्रिया को रोकने की मांग को लेकर आंदोलन कर रही है। पार्टी का आरोप है कि वर्तमान चुनाव आयोग पारदर्शी तरीके से काम नहीं कर रहा है।
Q2: मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं दी?
मुंबई पुलिस ने बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेशों, BMC की अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) न होने, और क्षेत्र के साइलेंस जोन में होने का हवाला दिया है। पुलिस के अनुसार, इस प्रदर्शन से भारी ट्रैफिक और अस्पतालों के मार्ग बाधित हो सकते थे।
Q3: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की मुख्य मांगें क्या हैं?
पार्टी की मुख्य मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR प्रक्रिया पर रोक, जनवरी 2025 की वोटर लिस्ट की बहाली, और 2023 के चुनाव आयोग नियुक्ति कानून को रद्द करना शामिल है।
Q4: क्या सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं?
हाँ, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने CJP के इस मुद्दे का सैद्धांतिक समर्थन किया है। उन्होंने चुनावी प्रणाली की स्वच्छता और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही तय करने के इस प्रयास की सराहना की है।
Q5: अनुमति न मिलने के बाद अब CJP की आगे की रणनीति क्या है?
पुलिस द्वारा अनुमति खारिज किए जाने के बाद CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने 2 अक्टूबर को मुंबई में ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू करने की घोषणा की है। पार्टी कार्यकर्ता सामूहिक गिरफ्तारियां देकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे।
निष्कर्ष एवं भावी विश्लेषण
2 अक्टूबर (गांधी जयंती) को मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रस्तावित यह आंदोलन भारत के राजनीतिक और प्रशासनिक तंत्र के लिए एक नया मोड़ साबित हो सकता है। एक तरफ जहाँ CJP चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूचियों के प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठा रही है, वहीं दूसरी तरफ मुंबई पुलिस की पाबंदियों के बाद यह संघर्ष सड़क और कानून दोनों मोर्चों पर खिंचता दिख रहा है।
यदि अभिजीत दीपके और उनके समर्थक सामूहिक ‘जेल भरो आंदोलन’ की राह पर आगे बढ़ते हैं, तो मुंबई में कानून-व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी। दीर्घकालिक रूप से, यह विवाद भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची संशोधन (SIR) की पारदर्शिता और संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों की जवाबदेही पर नए सिरे से राष्ट्रीय बहस को जन्म दे रहा है।

