कारगर हैं दादी नानी के gharelu nuskhe..बच्चों को खांसी, जुकाम से मिलेगी राहत

gharelu nuskhe for cough for kids

gharelu nuskhe for kids: बदलते मौसम में बच्चों को खांसी जुकाम और पेट दर्द से जुड़ी समस्याएं हो जाती हैं ऐसे में कई पेरेंट्स बच्चों को घरेलू नुस्खे का सहारा देते हैं। पारंपरिक घरेलू उपाय न केवल आसन होते हैं बल्कि हल्की परेशानियों में राहत देने में भी मदद करते हैं।

खांसी और जुकाम में सबसे कारगर है ये gharelu nuskhe

बच्चों को सर्दी खांसी होने पर हल्दी और तुलसी जैसे नेचुरल तत्वों का उपयोग करके ठीक किया जा सकता है। गुनगुने दूध में हल्दी मिलाकर उन्हें देने से गले को आराम मिलता है। वही तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा बनाकर पीने से बच्चों में इम्युनिटी बढ़ती है बच्चे ही नहीं, बड़े भी सर्दी खांसी होने पर तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा पी सकते हैं। हालांकि तुलसी और काली मिर्च का काढ़ा छोटे बच्चों को सीमित मात्रा में ही पीने को देना चाहिए।

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पेट दर्द में राहत दिलाने का सबसे आसान तरीका।

गैस या अपच के कारण अक्सर लोगों को पेट दर्द की समस्या हो जाती है ऐसे में अजवाइन और थोड़ा सा नमक मिलाकर खाना फायदेमंद माना जाता है। यह पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है इसके अलावा हल्का गुनगुना पानी भी बच्चों के लिए मददगार होता है अगर बच्चों को पेट में दर्द है तो उन्हें हल्का गुनगुना पानी देना चाहिए।

इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक होता है घरेलू उपाय

सभी gharelu nuskhe में बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए हमारी दादी नानी के द्वारा अदरक और शहद का मिश्रण सबसे उपयोगी बताया जाता है। यह बच्चों में गले की खराश को कम करने और इंफेक्शन से बचाने में भी मदद करताहै। हालांकि 1 साल से कम उम्र के बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए ऐसा डॉक्टर कहते हैं।

घरेलू नुस्खों के साथ अपनाए जरूरी सावधानियां

डॉक्टर ऐसा मानते हैं कि घरेलू नुस्खे केवल हल्की समस्याओं में ही उपयोगी होते हैं अगर बच्चे को तेज बुखार लगातार खांसी या पेट में दर्द होता है तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना जरूरी होता है इसलिए किसी भी उपाय को आसानी से अपनाने से पहले उससे जुड़ी सावधानी को भी समझे।

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क्यों आज भी लोकप्रिय हैं ये सभी उपाय

घरेलू नुस्खे लंबे समय से हमारे भारतीय परिवारों का हिस्सा बने रहे हैं। ये आसानी से उपलब्ध सामग्री से ही तैयार हो जाते हैं और आमतौर पर gharelu nuskhe हेल्थी माने जाते हैं। यही वजह है कि आज भी कई लोग दादी नानी के इस प्राथमिक देखभाल के तौर यानी home care पर इनका इस्तेमाल करते हैं।

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