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मनोज मुकुंद नरवणे का बड़ा बयान: ‘अगर आप शांति चाहते हैं, तो युद्ध की तैयारी करें’; चीन को बताया भारत का मुख्य प्रतिद्वंद्वी

जनरल मनोज मुकुंद नरवणेजनरल मनोज मुकुंद नरवणे

जनरल मनोज मुकुंद नरवणे

नई दिल्ली: पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने अपनी नई पुस्तक के विमोचन अवसर पर कहा कि दीर्घकाल में चीन भारत का मुख्य प्रतिस्पर्धी बनेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि चीन शत्रु नहीं बल्कि प्रतिद्वंद्वी है, और भारत को किसी भी दुस्साहस को रोकने के लिए अपनी सैन्य प्रतिरोधक क्षमता (Military Deterrence) को मजबूत बनाए रखना होगा।

पैरामीटरमुख्य बिंदु / तथ्य
मुख्य व्यक्तित्वजनरल मनोज मुकुंद नरवणे (पूर्व भारतीय सेना अध्यक्ष, 31 दिसंबर 2019 – 30 अप्रैल 2022)
अवसरनई पुस्तक द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज का विमोचन
चीन पर रुख‘शत्रु’ की जगह ‘प्रतिद्वंद्वी (Competitor)’ शब्द का इस्तेमाल
सुरक्षा मंत्र“यदि आप शांति चाहते हैं, तो युद्ध की तैयारी करें”
पड़ोसी रणनीतिपड़ोसी देशों में स्थिरता भारत की सीमाई सुरक्षा (शरणार्थी, तस्करी रोकने) के लिए अनिवार्य
आधिकारिक स्रोतपुस्तक विमोचन कार्यक्रम, नई दिल्ली

चीन शत्रु नहीं, बल्कि दीर्घकालिक प्रतिद्वंद्वी: जनरल एमएम नरवणे

पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा और भू-राजनीति पर कई रणनीतिक विचार व्यक्त किए। 31 दिसंबर 2019 से 30 अप्रैल 2022 तक भारतीय सेना का नेतृत्व करने वाले नरवणे ने कहा कि पाकिस्तान से तत्काल खतरा आतंकवाद के कारण बना हुआ है, लेकिन दीर्घकाल में चीन ही भारत की असली चुनौती होगा।

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अपनी नई पुस्तक ‘द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज’ के विमोचन पर बोलते हुए पूर्व सेना प्रमुख ने कहा कि दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगी। यह प्रतिस्पर्धा राजनीतिक, आर्थिक, व्यापारिक और सैन्य समेत सभी प्रमुख क्षेत्रों में देखने को मिलेगी।

“हमारा ध्यान पश्चिमी सीमा पर आतंकवाद के कारण केंद्रित रहा है, लेकिन मुझे लगता है कि आने वाले वर्षों में और दीर्घकाल में चीन हमारा मुख्य प्रतिस्पर्धी बनने जा रहा है। मैं जानबूझकर प्रतिस्पर्धी शब्द का इस्तेमाल कर रहा हूं, शत्रु का नहीं।”

जनरल एमएम नरवणे (पूर्व सेना प्रमुख)

पाकिस्तान और चीन की चुनौतियों में अंतर

जनरल नरवणे ने स्पष्ट किया कि भारत ने पाकिस्तान और चीन दोनों के साथ युद्ध लड़े हैं और दोनों देशों के साथ सीमा विवाद अभी भी अनसुलझे हैं। हालांकि, दोनों देशों से मिलने वाली चुनौतियों का स्वरूप एक-दूसरे से पूरी तरह अलग है।

उन्होंने बल देकर कहा कि दोनों देश अलग-अलग तरह का जोखिम पेश करते हैं, इसलिए वे हमेशा भारत के सुरक्षा रडार पर बने रहेंगे।

‘अगर आप शांति चाहते हैं, तो युद्ध की तैयारी करें’

चीन के साथ चल रहे सीमा विवादों पर बोलते हुए नरवणे ने कूटनीति और बातचीत को प्राथमिक साधन बताया। उन्होंने कहा कि ताकत का इस्तेमाल हमेशा अंतिम विकल्प होना चाहिए, लेकिन शांति बनाए रखने का एकमात्र तरीका मजबूत सैन्य प्रतिरोधक क्षमता (Military Deterrence) है।

पड़ोसी देशों की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए पूर्व सेना प्रमुख ने ऐतिहासिक सैन्य सिद्धांत को दोहराया: “यदि आप शांति चाहते हैं, तो युद्ध की तैयारी करें।”

उन्होंने चेतावनी दी कि भारत को किसी भी संभावित दुस्साहस को विफल करने के लिए अपनी सेना को हर समय तैयार और आधुनिक रखना होगा। MEA India और Indian Army द्वारा अपनाई जाने वाली कूटनीतिक व रक्षा नीतियां इसी संतुलन पर आधारित हैं।

पड़ोसी देशों की उथल-पुथल का भारत पर असर

जनरल नरवणे ने नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और म्यांमार का जिक्र करते हुए कहा कि नई दिल्ली के रणनीतिक हित इन देशों की आंतरिक स्थिरता से गहराई से जुड़े हुए हैं।

भू-राजनीतिक यथार्थ को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा:

  1. पड़ोसी चुनने का विकल्प नहीं: वास्तविक जीवन और भू-राजनीति में आप अपने पड़ोसियों को बदल नहीं सकते।
  2. अस्थिरता का फैलाव: पड़ोसी देश में आग लगी हो या अस्थिरता हो, तो उसका असर सीधे भारत की सीमाओं तक पहुंचता है।
  3. सुरक्षा खतरे: क्षेत्रीय उथल-पुथल से शरणार्थी संकट, अवैध हथियारों की आपूर्ति, मादक पदार्थों की तस्करी और संगठित अपराध बढ़ते हैं।

उन्होंने म्यांमार से भारत में हुए शरणार्थियों के पलायन का उदाहरण देते हुए कहा, “यदि आपका पड़ोसी देश जल रहा है, तो इससे आपको खुश नहीं होना चाहिए।” भारत को अपने पड़ोसियों में स्थिरता बनाए रखने में सक्रिय रूप से मदद करनी चाहिए।

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5 Frequently Asked Questions (FAQs)

Q1. जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने चीन को लेकर क्या बड़ा बयान दिया है?

पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे ने कहा कि आने वाले वर्षों में चीन भारत का मुख्य प्रतिद्वंद्वी बनेगा। उन्होंने चीन को शत्रु कहने के बजाय राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य क्षेत्रों में एक दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धी माना, जिससे निपटने के लिए मजबूत सैन्य प्रतिरोधक क्षमता जरूरी है।

Q2. ‘अगर आप शांति चाहते हैं, तो युद्ध की तैयारी करें’ का क्या अर्थ है?

इस सैन्य सिद्धांत का अर्थ है कि देश में शांति बनाए रखने के लिए सेना को युद्ध के लिए हमेशा तैयार और शक्तिशाली रखना पड़ता है। मजबूत सैन्य तैयारी देखकर कोई भी विरोधी देश हमला करने या दुस्साहस करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता।

Q3. एमएम नरवणे की नई पुस्तक का क्या नाम है?

पूर्व सेना अध्यक्ष जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की नई पुस्तक का नाम ‘द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज’ है। इस पुस्तक के विमोचन अवसर पर ही उन्होंने भारत की सुरक्षा और भू-राजनीति से जुड़े अहम विचार साझा किए।

Q4. पाकिस्तान और चीन के खतरों में नरवणे ने क्या अंतर बताया?

नरवणे के अनुसार, पाकिस्तान से तत्काल खतरा आतंकवाद के कारण है, जिससे भारत का ध्यान पश्चिमी सीमा पर रहता है। वहीं, चीन दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धी है जो व्यापार, राजनीति और सैन्य मोर्चे पर चुनौती देता है। दोनों देश अलग-अलग तरह की सुरक्षा चुनौतियां पेश करते हैं।

Q5. पड़ोसी देशों की उथल-पुथल से भारत की सुरक्षा कैसे प्रभावित होती है?

पड़ोसी देशों में अस्थिरता से भारत में शरणार्थियों का पलायन, हथियारों की अवैध आपूर्ति और ड्रग्स तस्करी जैसी सीमा पार सुरक्षा चुनौतियां पैदा होती हैं। म्यांमार का उदाहरण देते हुए नरवणे ने कहा कि पड़ोसी देशों की स्थिरता में मदद करना भारत के हित में है।

विश्लेषणात्मक निष्कर्ष (Analytical Summary)

जनरल एमएम नरवणे का यह बयान भारत की भावी रणनीतिक दिशा का एक स्पष्ट खाका पेश करता है। भारत को अपनी पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान द्वारा पोषित आतंकवाद से निपटते हुए पूर्वी सीमा पर चीन की व्यापक और दीर्घकालिक चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा।

आने वाले समय में भारत की रणनीति कूटनीतिक बातचीत के साथ-साथ अपनी सैन्य प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने और पड़ोसी देशों में क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने पर केंद्रित रहेगी। शांतिकाल को बनाए रखने का सबसे कारगर जरिया किसी भी सैन्य दुस्साहस के खिलाफ पूर्ण तैयारी ही है।

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