US SEC summons to Adani पर भारत का रुख, Law Ministry ने कहा…

US SEC summons to Adani पर भारत का रुख, Law Ministry ने कहा...

US SEC summons to Adani मामले में अंतरराष्ट्रीय कानून प्रक्रिया को सुर्खियों में ला दिया है। भारत के लॉ मिनिस्ट्री ने गौतम अडानी और सागर अडानी तक अमेरिकी समन पहुंचने से दो बार मना किया, जिसके बाद यह मुद्दा भारत अमेरिका कानूनी सहयोग निवेश करने वाले लोगों के भरोसे और न्यायिक प्रक्रियाओं पर चर्चा का विषय बन गया है।

America SEC ने क्यों भेजा था समन?

अमेरिकी सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन ने नवंबर 2024 में ऐसा आरोप लगाया कि अडानी से जुड़े एक निवेश प्रस्ताव के दौरान कथित रूप से अमेरिका के कानून का उल्लंघन किया जा रहा है, और निवेश करने वाले लोगों को गलत जानकारी दी जा रही है। इस सिलसिले में न्यूयॉर्क की फेडरल अदालत से एक समन यानी एक रिपोर्ट जारी होता है। ताकि संबंधित पक्षों को आधिकारिक रूप से साबित किया जा सके लेकिन संबंधित व्यक्ति भारत से ताल्लुक रखता है इसलिए दस्तावेज सेवा के लिए हागु सेवा कन्वेंशन के तहत भारत सरकार की सहायता जरूरी थी।

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भारत के Law Ministry ने क्या आपत्ति जताई?

भारत की लॉ मिनिस्ट्री ने मई और फिर दिसंबर 2025 में इन सभी डॉक्यूमेंट को अदानी तक पहुंचने से बिल्कुल ही इनकार कर दिया। मंत्रालय का ऐसा कहना है कि समन के कागजात पर लिंक सिग्नेचर और ऑफिशियल seal नहीं दिए गए हैं जिससे डॉक्यूमेंट की प्रामाणिकता पर कई प्रकार के सवाल होते हैं। इसके अलावा मंत्रालय ने SEC की आंतरिक प्रक्रिया का एक नियम का हवाला देते हुए कहा कि यह समन सेवा योग्य प्रारूप में है ही नहीं।

अब SEC क्या रास्ता अपना रहा है?

भारत के रोक करने के बाद SEC ने अमेरिकी अदालत से रिक्वेस्ट किया है कि उसे हागु प्रक्रिया को हटाकर सामान भेजने की अनुमति दी जाए।SEC ऐसा चाहता है कि ईमेल या फिर अमेरिकी वकीलों के माध्यम से या सेवा दी जाए ताकि कानूनी प्रक्रिया बहुत जल्द आगे हो सके अदालत अब इससे ऑप्शनल तरीके से देख रही है।

अडानी समूह की प्रतिक्रिया क्या है?

हालांकि अदानी ग्रुप ने इस सभी आरोपी को बिना किसी आधार का बताया है और कहा कि वह कानून के दायरे में रखकर अपना पक्ष बताते हैं। कंपनी का कहना है कि वह इस मामले में सीधे तौर पर पक्षकर नहीं है और सभी आरोपों का जवाब उचित जगह देगी।

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बाज़ार और निवेशकों पर असर

इस खबर के सामने आने के बाद अदानी ग्रुप की कंपनी के शेयर में भारी गिरावट देखी गई है निवेश करने वाले लोगों की चिंताए है कि मामला अब कानूनी प्रक्रिया से हटकर अंतरराष्ट्रीय कानूनी प्रक्रिया के रूप में कुछ ज्यादा ही गंभीर हो चुका है इससे विदेशी के लोग भी निवेश करने से थोड़ा बच रहे हैं। US SEC summons to Adani अब सिर्फ एक कानूनी नोटिस का ही मामला नहीं है यह एक अंतरराष्ट्रीय संधि और देश के बीच कानूनी सहयोग और निवेश करने वाले लोगों के बीच एक बहुत बड़ा मुद्दा बन चुका है भारत में तकनीकी आधार पर समन सेवा से इनकार कर दिया है।

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