पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर के पहले CEO, गोविंद देव गिरि को मिली चंपत राय की जिम्मेदारी

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को राम मंदिर के प्रशासन में बड़ा बदलाव किया है। ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का पहला CEO नियुक्त किया है। इसके साथ ही ट्रस्ट में महासचिव और कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारियों में भी बदलाव किया गया है।

जीतेंद्र मिश्रा वायुसेना में करीब 39 साल तक सेवाएं दे चुके हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने पश्चिमी वायु कमान की कमान संभाली थी। उनके सैन्य अनुभव को देखते हुए राम मंदिर के बढ़ते प्रशासन और बड़े स्तर के संचालन की जिम्मेदारी उन्हें दी गई है।

ट्रस्ट के मौजूदा कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि को नया महासचिव बनाया गया है। वहीं दिल्ली के महेश भागचंदका को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। नए CEO और कोषाध्यक्ष अब महासचिव गोविंद देव गिरि को रिपोर्ट करेंगे।

ट्रस्ट में 3 नए सदस्य शामिल

राम मंदिर ट्रस्ट में तीन नए सदस्यों को भी शामिल किया गया है। इनमें दिल्ली के महेश भागचंदका, अयोध्या के एडवोकेट मदन मोहन पांडेय और शिकोहाबाद की निर्मला यादव शामिल हैं। निर्मला यादव ट्रस्ट में शामिल होने वाली पहली महिला ट्रस्टी होंगी। ट्रस्ट में नए सदस्यों की नियुक्ति के साथ प्रशासनिक व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है।

चंपत राय के इस्तीफे के बाद बदलाव

ट्रस्ट में यह बदलाव चंदा चोरी विवाद के करीब तीन महीने बाद हुआ है। चंदा चोरी मामले में 8 आरोपी जेल में हैं। इसके बाद 2 जुलाई को ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दिया था। चंपत राय के इस्तीफे के बाद रिटायर्ड IFS अधिकारी कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी दी गई थी। वह करीब 58 दिनों तक इस पद पर रहे।

ऑपरेशन सिंदूर का अनुभव

जीतेंद्र मिश्रा ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख थे। इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वोच्च युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया था। जीतेंद्र मिश्रा मूल रूप से देवरिया, उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखते हैं। ऐसे में राम मंदिर ट्रस्ट में उनकी नियुक्ति का उत्तर प्रदेश से भी सीधा कनेक्शन है।

प्रशासन और सुरक्षा का अनुभव

जीतेंद्र मिश्रा करीब चार दशक तक वायुसेना में रहे और कई महत्वपूर्ण कमांड संभालीं। राम मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन और बड़े स्तर के प्रशासनिक कामकाज में उनका सैन्य अनुभव उपयोगी माना जा रहा है।

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