Fifth annual conference of Madhyanchal Sociological Society concluded in Rewa: रीवा। मध्यांचल सोशियोलाजिकल सोसायटी के पांचवें वार्षिक सम्मेलन की संगोष्ठी रविवार को शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग में सफलतापूर्वक आयोजित हुई।
सम्मेलन का मुख्य विषय ‘भारत में समाजशास्त्र: मुद्दे, चुनौतियां और संभावनाएं’ रहा, जिस पर समाजशास्त्र के विद्वान, प्राध्यापक और युवा शोधकर्ताओं ने गहन विचार-विमर्श किया।सोसायटी के अध्यक्ष ने बताया कि संगठन का प्रमुख उद्देश्य युवा समाजशास्त्रियों को एक मंच प्रदान करना, उन्हें सक्रिय रूप से जोड़ना और समाज की वर्तमान समस्याओं के व्यावहारिक समाधान खोजना है।
संगोष्ठी में विशेष चर्चा युवा पीढ़ी के पाठ्यक्रमों में प्राचीन भारतीय वेदों, उपनिषदों तथा अन्य शास्त्रों के समाजशास्त्रीय तत्वों को शामिल करने पर केंद्रित रही। प्रतिभागियों का मत था कि भारतीय संदर्भ में समाजशास्त्र को अधिक प्रासंगिक और प्रभावी बनाने के लिए पाश्चात्य सिद्धांतों के साथ स्वदेशी ज्ञान-परंपरा का समन्वय आवश्यक है। इससे विषय अधिक समावेशी बनेगा तथा सामाजिक मुद्दों के स्थानीय स्तर पर समाधान संभव हो सकेंगे।
विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए विशेषज्ञों ने शोध पत्र प्रस्तुत किए और चर्चा में सक्रिय भाग लिया। सम्मेलन ने समाजशास्त्र के क्षेत्र में नई दिशा तय करने का प्रयास किया।सोसायटी ने भविष्य में ऐसे आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित करने तथा युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने की दृढ़ प्रतिबद्धता जताई। यह सम्मेलन क्षेत्रीय स्तर पर समाजशास्त्र के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
