Fifth Annual Conference In TRS College Rewa : सोशियोलॉजिकल सोसायटी वार्षिक सम्मेलन

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Fifth Annual Conference In TRS College Rewa : सोशियोलॉजिकल सोसायटी वार्षिक सम्मेलन-रीवा स्थित टीआरएस महा विद्यालय के समाजशास्त्र विभाग में मध्यांचल सोशियोलॉजिकल सोसायटी के तत्वावधान में पंचम वार्षिक सम्मेलन के अंतर्गत “भारत में समाजशास्त्रीय मुद्दे, चुनौतियां एवं संभावनाएं” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य एवं गरिमामय आयोजन किया गया। इस अकादमिक आयोजन में देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए समकालीन समाजशास्त्रीय विमर्श को नई दिशा प्रदान की। टीआरएस में रीवा में मध्यांचल सोशियोलॉजिकल सोसायटी का पंचम वार्षिक सम्मेलन सम्पन्न। “भारत में समाजशास्त्रीय मुद्दे, चुनौतियां एवं संभावनाएं” विषय पर संगोष्ठी में देशभर के शिक्षाविदों का सहभाग। टीआरएस रीवा में मध्यांचल सोशियोलॉजिकल सोसायटी का पंचम वार्षिक सम्मेलन सम्पन्न। “भारत में समाजशास्त्रीय मुद्दे, चुनौतियां एवं संभावनाएं” विषय पर संगोष्ठी में देशभर के शिक्षाविदों का सहभाग।

मुख्य अतिथि एवं उद्घाटन सत्र की गरिमा

The Dignity of the Chief Guest and the Inaugural Session

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो.राजेन्द्र कुड़रिया, कुलगुरु, अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय, रीवा रहे, जबकि अध्यक्षता प्रो. डी. आर. साहू (इंडियन सोशियोलॉजिकल सोसायटी) ने की। विशिष्ट अतिथियों के रूप में डॉ. अर्पिता अवस्थी, प्राचार्य, शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय, रीवा तथा श्री विवेक दुबे उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. श्वेता प्रसाद, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी ने संगोष्ठी को अकादमिक दृष्टि से समृद्ध किया। कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं पुष्प अर्पण से हुआ। छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने आयोजन को आध्यात्मिक एवं शैक्षणिक गरिमा प्रदान की। अतिथियों का शाल, श्रीफल, प्रतीक चिन्ह एवं तुलसी पौधा भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया।

सम्मेलन की रूपरेखा एवं स्मारिका विमोचन

Conference Outline and Souvenir Release

मध्यांचल सोशियोलॉजिकल सोसायटी की ओर से डॉ. महेश शुक्ल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए सम्मेलन की उद्देश्यपूर्ण रूपरेखा प्रस्तुत की। इस अवसर पर सम्मेलन की स्मारिका का विधिवत विमोचन भी किया गया। डॉ. ध्रुव कुमार दीक्षित द्वारा विख्यात समाजशास्त्री श्यामचरण दुबे का परिचय प्रस्तुत किया गया। उनके नाम पर स्थापित “प्रो. श्यामचरण दुबे लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड” प्रो. अरविन्द कुमार चौहान को प्रदान किया गया, जिसे डॉ. शशांक शेखर ठाकुर ने स्वीकार किया।

मुख्य वक्तव्य एवं अकादमिक विचार-विमर्श

Keynote Address and Academic Deliberations

मुख्य वक्ता डॉ.श्वेता प्रसाद ने भारत में समाजशास्त्र के विकास की ऐतिहासिक एवं अकादमिक यात्रा का विश्लेषण करते हुए कहा कि समाजशास्त्र को केवल सैद्धांतिक अध्ययन तक सीमित न रखकर व्यवहारिक और क्षेत्रीय शोध से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने जाति व्यवस्था, जजमानी प्रथा, सामाजिक गतिशीलता एवं जातिगत व्यवसाय जैसे विषयों पर पुनर्विचार की आवश्यकता पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि प्रो. सुकान्तो चौधरी ने प्रसिद्ध समाजशास्त्री आंद्रे बेते के अकादमिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए भारतीय समाजशास्त्र की बौद्धिक परंपरा को रेखांकित किया। श्री विवेक दुबे ने समाजशास्त्र के व्यवहारिक पक्ष को जन-स्तर तक पहुँचाने पर बल देते हुए कहा कि समाजशास्त्रीय अनुसंधान का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए। मुख्य अतिथि प्रो. राजेन्द्र कुड़रिया ने भारतीय संस्कृति के संदर्भ में समाजशास्त्रीय अवधारणाओं को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया तथा सामाजिक एकीकरण के मॉडल को विकसित करने का आह्वान किया।

मुख्य वक्तव्य एवं अकादमिक विचार-विमर्श

अध्यक्षीय उद्बोधन एवं शैक्षणिक सहभागिता

Presidential Address and Academic Participation

अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. डी. आर. साहू ने कहा कि समाज विज्ञान को वर्तमान समय में क्षेत्रीय समस्याओं की ओर गंभीर दृष्टिकोण अपनाना चाहिए तथा पब्लिक सोशियोलॉजी की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।कार्यक्रम में डॉ. रचना श्रीवास्तव, डॉ. अखिलेश शुक्ल, डॉ. महानन्द द्विवेदी, डॉ. मधुलिका श्रीवास्तव, डॉ. शाहेदा सिद्दीकी, डॉ. फरजाना बानो, डॉ. प्रियंका पांडे, डॉ. निशा सिंह, डॉ. गुंजन सिंह, डॉ. प्रियंका तिवारी, डॉ. मनीषा द्विवेदी एवं योगेश निगम सहित अनेक शिक्षाविदों की सक्रिय सहभागिता रही।

अकादमिक सत्र एवं शोधपत्र प्रस्तुति

Academic Sessions and Paper Presentations

प्रथम अकादमिक सत्र की अध्यक्षता डॉ. प्रमोद कुमार गुप्ता ने की तथा सह-अध्यक्ष डॉ. शशांक शेखर ठाकुर रहे। इस सत्र में डॉ. यशपाल व्यास, प्रो. अमरेश कुमार त्रिपाठी, डॉ. संजय तिवारी, डॉ. विनोद रस्तोगी सहित अनेक विषय विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन किया। डॉ. मनोरमा सिंह, डॉ. जितेन्द्र कुमार चौधरी, डॉ. अनिल सिंह, डॉ. अखलेश साहू, प्रीति कुमारी गुर्जर, भरत सोनी, दीपिका शुक्ला एवं रेखा सोनी ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत कर संगोष्ठी को ज्ञानवर्धक बनाया।

संचालन एवं आभार प्रदर्शन

Conduct and Vote of Thanks

कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. मुकेश येंगल द्वारा किया गया। समापन अवसर पर आयोजक सचिव डॉ. स्वाती शुक्ल ने सभी अतिथियों, सहभागियों एवं आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया।

निष्कर्ष-Conclusion-यह संगोष्ठी समाजशास्त्र के समकालीन मुद्दों, चुनौतियों और संभावनाओं पर गहन विमर्श का सशक्त मंच सिद्ध हुई। इस आयोजन ने शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को सामाजिक यथार्थ के गहन अध्ययन हेतु प्रेरित किया तथा समाजशास्त्र को व्यवहारिक दृष्टिकोण से समृद्ध करने का मार्ग प्रशस्त किया।

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