Dr Seema Anand Podcast Controversy :…63-साल की मैं-15 साल का वो”..डॉ सीमा आनंद के कहते ही शोसल मिडिया पर ट्रोलिंग तेज़

Dr Seema Anand Podcast Controversy :…63-साल की मैं-15 साल का वो”..डॉ सीमा आनंद के कहते ही शोसल मिडिया पर ट्रोलिंग तेज़-सोशल मीडिया के दौर में पॉडकास्ट अब सिर्फ बातचीत का एक माध्यम नहीं रहे बल्कि कई बार विवाद और बहस की वजह भी बन जाते हैं। हाल ही में एक ऐसा ही पॉडकास्ट चर्चा में है, जिसमें लेखिका, स्टोरीटेलर और सेक्स एजुकेटर डॉ. सीमा आनंद ने एक बहुत ही लोकप्रिय शोसल मिडिया प्लेटफार्म पर कुछ ऐसे बयान दिए जिससे सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया। एक तरफ उनके समर्थक इसे खुला और जरूरी संवाद बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर आलोचक उनके विचारों को बड़बोलापन और सामाजिक मूल्यों के खिलाफ बता रहे हैं। खासकर उनका यह बयान की “पिछले साल एक 15 साल के लड़के ने मुझे प्रपोज़ किया था, तब मेरी उम्र 63 साल थी” तेजी से वायरल हो गया और ट्रोलिंग की वजह बन गया।डॉ. सीमा आनंद के वायरल पॉडकास्ट बयान ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। जानिए कौन हैं सीमा आनंद, उन्होंने ऐसा क्या कहा, क्यों हो रही हैं ट्रोल और इस पूरे विवाद का सामाजिक व मनोवैज्ञानिक पक्ष क्या है।

तो आइए सबसे पहले जानें की आखिर कौन हैं डॉ. सीमा आनंद ?

डॉ. सीमा आनंद एक जानी-मानी लेखिका, पौराणिक कथाकार (Mythologist), स्टोरीटेलर और यौन स्वास्थ्य शिक्षिका हैं-उनकी शिक्षा और करियर की बात करें तो उनकी स्कूली शिक्षा मंसूरी स्कूल, में हुई दिल्ली जबकि ग्रेजुएशन बैचलर ऑफ आर्ट्स-बीएचयू से किया। उन्होंने पीएचडी- इंडियन बोर्ड ऑफ वेरियस ड्रग्स कॉलेज,कोलकाता से पूर्ण की वहीं
लंदन (UK) में नैरेटिव प्रैक्टिस और महिला कथाओं पर लगातार कार्यरत हैं वर्तमान में उनकी उम्र उनके अनुसार 63 वर्ष है और वो 3 बच्चों की मां हैं। गूगल से प्राप्त जानकारी के अनुसार डॉ सीमा आनंद का वर्तमान निवास लंदन, यूनाइटेड किंगडम है। सीमा आनंद का मुख्य उद्देश्य यौन विषयों पर पीढ़ियों के बीच संवाद को सामान्य बनाना और सामाजिक मिथकों को तोड़ना रहा है। उनके निजी जीवन, पति या पारिवारिक विवरण को लेकर सार्वजनिक रूप से बहुत कम जानकारी उपलब्ध है।

पॉडकास्ट में ऐसा क्या कहा, जिससे विवाद बढ़ा ?

पॉडकास्ट के दौरान सीमा आनंद ने शादी,आकर्षण और रिश्तों को लेकर बेहद खुले विचार रखे। उन्होंने कहा कि शादी सिर्फ सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्लेजर और इमोशनल कनेक्शन से भी जुड़ी होती है। इस पर उन्होंने ट्रोलिंग प्वाइट को सपोर्ट करते हुए कहा की आकर्षण को केवल उम्र के चश्मे से देखना एक बड़ी गलतफहमी है प्यार और झुकाव कब, किससे और क्यों हो जाए-यह पहले से तय नहीं किया जा सकता। इसी बातचीत के दौरान उन्होंने 15 साल के लड़के वाले किस्से का जिक्र किया, जिसे लेकर सोशल मीडिया पर उन्हें सबसे ज्यादा ट्रोल किया जा रहा है।

लड़के बड़ी उम्र की महिलाओं की ओर क्यों आकर्षित होते हैं ? सवाल पर डॉ सीमा आनंद का नजरिया

डॉ सीमा आनंद के मुताबिक, यह आकर्षण चेहरे या उम्र का नहीं बल्कि दिमाग और सोच का होता है-

उनके अनुसार प्रमुख कारण-बड़ी उम्र की महिलाओं में ठहराव और आत्मविश्वास होता है,वे बिना जज किए बात सुनती हैं इमोशनल डेप्थ और अनुभव से आई समझदारी रिश्तों में कम ड्रामा और ज्यादा स्थिरता का पमाण है। साथ ही उनका कहना है कि कई युवा खुद को मानसिक रूप से अपनी उम्र से बड़ा मानते हैं और ऐसे रिश्ते चाहते हैं जहां समझ और शांति मिले।

सोशल मीडिया पर क्यों हो रही हैं ट्रोल ?

सीमा आनंद के इन बयानों पर सोशल मीडिया यूजर्स की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूजर्स का कहना है कि वे समाज की असली समस्याओं जैसे – गरीबी-बेरोजगारी, को नजरअंदाज कर रही हैं शादी और जीवन को सिर्फ “प्लेजर” तक सीमित कर रही हैं। लोगों का यह भी मन्ना है की इस तरह की बातें भारतीय सामाजिक ढांचे को भ्रमित करती हैं वहीं समर्थकों का मानना है कि उन्होंने संवेदनशील विषयों पर ईमानदार बातचीत की है, जिसे गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।

समाज की भूमिका पर क्या बोलीं सीमा आनंद ?

अपने विचार रखते हुए सीमा आनंद ने समाज पर भी टिप्पणी कर कहा कि पश्चिमी देशों में उम्र के अंतर को लेकर उतनी आपत्ति नहीं होती भारत में उम्र का फासला दिखते ही रिश्तों पर सवाल खड़े कर दिए जाते हैं समाज अक्सर समझने के बजाय जज करने लगता है, जिससे बहस और विवाद बढ़ता है उनके अनुसार, आकर्षण निजी मामला है, लेकिन समाज की सोच उसे सार्वजनिक मुद्दा बना देती है।

निष्कर्ष (Conclusion)-डॉ. सीमा आनंद का यह विवाद हमें एक अहम सवाल पर सोचने को मजबूर करता है-क्या हम आज भी रिश्तों और आकर्षण को सिर्फ उम्र और सामाजिक नियमों से ही आंकते हैं? जहां एक तरफ उनके बयान कई लोगों को असहज कर सकते हैं, वहीं दूसरी तरफ यह सच भी है कि संवेदनशील विषयों पर संवाद की कमी ही ऐसे विवादों को जन्म देती है। सीमा आनंद का नजरिया सहमत या असहमत किया जा सकता है, लेकिन इस बहस ने समाज को खुले विचार और समझदारी से सोचने का मौका जरूर दिया है।

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