Donald Trump on Iran War : मिडिल ईस्ट में चल रही ईरान और ईजराइल के बीच जंग की शुरुआत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने की थी। लेकिन अब वह खुद इस जंग से अपने कदम पीछे हटा रहे हैं। ईरान जंग के 29वें दिन भी युद्ध की तबाही कम नहीं हुई, आज ही इजराइल ने ईरान के परमाणु ठिखाने पर हमला किया तो ईरान ने भी इजराइल के तेल अवीव पर बेलिस्टिक मिसाइल से हमला कर पलटवार कर दिया। चारों तरफ जंग के आ रहे रिजल्ट के चलते हाहाकार मचा हुआ है। यहां तक कि इस जंग का असर भारत पर भी पड़ चुका है।
ईरान जंग के लिए अमेरिका जिम्मेदार
खाड़ी देशों सहित दुनिया भर के कई देशों में तेल की किल्लत मच गई है। भारत का हाल किसी से भी छिपा नहीं है। केंद्र सरकार ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए सभी राज्यों के सीएम को बुलाकर समीक्षा बैठक भी की है। वहीं, अब बात करें अमेरिका की, तो ईरानी सेना के साथ जंग करने में ईरान के बाद सबसे ज्यादा नुकसान अगर किसी देश का हुआ है तो वह अमेरिका ही है। जिसके लिए अमेरिकी अधिकारी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार मान रहे हैं।
ईरान को लेकर ट्रंप ने की हवा-हवाई बयानबाजी
बता दें कि ईरान और इजराइल के बीच चल रहे युद्ध में जब स्टेट ऑफ हॉर्मुज का मुद्दा शामिल हुआ तो डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध की पावर को कंट्रोल कर दबाव की राजनीति करना शुरू कर दिया है। ईरान स्टेट ऑफ हॉर्मुज से तेल के टैंकर वाले जहाजों को निशाना बना कर सीधे तौर पर अमेरिका को झुकाना चाहता है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हवा-हवाई बातें कर रहें हैं कि उन्होंने ईरान को हरा दिया, अब ईरान ने समझौता को कर लिया है और अमेरिका को तोहफे में तेल से भरे टैंकर गिफ्ट किए हैं। अपनी हवा-हवाई बयानबाजी में ट्रंप यहीं नहीं रुके, उन्होंने स्टेट ऑफ हॉर्मुज को स्टेट ऑफ ट्रंप नाम तक दे डाला।
हालांकि, ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति को करारा जवाब भी दे दिया। ईरान ने कहा- ट्रंप खुद से ही बातचीत कर रहे हैं, यहां तो कोई बातचीच हुई ही नहीं है। हम कोई समझौता नहीं कर रहे हैं।
ईरान के साथ जंग कर पछता रहें डोनाल्ड ट्रंप
अब ऐसे में, यह माना जा सकता है कि डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ जंग कर के पछता रहा रहे हैं। क्योंकि ट्रंप ने सोचा था, इजराइल का साथ देकर अगर ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या कर दी जाती है तो ईरान खुद ही सशर्त सरेंडर कर देगा। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं, ईरान ने सरेंडर करने के बजाय अमेरिका और इजरायल से जंग कर अपने सर्वोच्च नेता की मौत का बदला लेने का फैसला लिया। इस युद्ध ने खूब तबाही की। इजराइल के साथ-साथ ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य बेसों को निशाना बनाया, साथ ही कई अमेरिकी सैन्य हेलिकॉप्टरों को भी तबाह कर दिया। ईरानी सेना द्वारा बरसाई जा रही तबाही में अमेेरिका का बड़ा नुकसान हो गया है। सबसे ज्यादा नुकसान तो तेल व्यापार क्षेत्र में हुआ है।
अमेरिका नहीं करता लंबा युद्ध?
वहीं, कई फॉरेन विश्लेषकों का मानना है कि इतिहास गवाह रहा है कि अमेरिका कभी लंबे समय तक चलने वाले युद्ध का सहयोगी नहीं रहा है। मगर यहां तो युद्ध का आगाज ही अमेरिका ने किया है और अब अमेरिका ही जंग के परिणाम देख कर पीछे हटता नजर आ रहा है। अब यहां ये समझने की जरूरत है कि आखिर क्यों ट्रंप ने जंग का हिस्सा अब नहीं बनना चाहते हैं।
क्यों जंग से पीछे हट रहा अमेरिका?
अगर, अमेरिका के बयानों की मानें तो ईरान पर हमला इसलिए किया गया क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था ईरान परमाणु बम बना रहा है। हालांकि, खुद ट्रंप भी इसे साबित नहीं कर पाएं। वहीं, लंबे समय तक युद्ध में लगे रहने से अमेरिका को भारी नुकसान होगा, जैसे- जंग लंबी खिंचती है तो देश का पैसा खर्च होगा, जवानों की मौत से फौज की संख्या कम होगी, और सबेस जरूरी बात- ट्रंप को जनता का समर्थन कम मिलेगा, यानी अपने ही देश में ट्रंप अपनों का विश्वास खो देंगे। इसलिए, ट्रंप और अमेरिकी सरकार इन सभी बातों को ध्यान में रख कर ईरान के साथ अब जंग को और लंबा नहीं खींचना चाहते हैं।
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