रीवा: चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में रीवा जिले के नाम आज एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हो गई है। मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने जिला चिकित्सालय रीवा में प्रदेश के पहले ‘मदर एवं न्यू बॉर्न केयर सेंटर’ (MNCU) का औपचारिक उद्घाटन किया। भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज और काटजू अस्पताल में सफलतापूर्वक चलाए गए पायलट प्रोजेक्ट के बाद, रीवा जिला अस्पताल अब पूरे मध्य प्रदेश का ऐसा पहला जिला स्तरीय अस्पताल बन गया है जहां नवजातों और माताओं के लिए यह अनूठी और अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधा शुरू की गई है। इस गरिमामयी उद्घाटन अवसर पर यूनिसेफ (Unicef) की टीम भी विशेष रूप से मौजूद रही, जिसने स्वास्थ्य क्षेत्र में इस बड़े कदम की सराहना की।
‘जीरो सेपरेशन’ नीति पर काम करेगा यह खास सेंटर
यह नवनिर्मित सेंटर पूरी तरह से ‘जीरो सेपरेशन’ (शून्य अलगाव) की आधुनिक चिकित्सा नीति पर काम करता है। अभी तक की व्यवस्था में यदि प्रसव के बाद नवजात शिशु की स्थिति गंभीर होती थी, तो उसे मां से अलग रखकर एसएनसीयू (SNCU) या नर्सरी में उपचार दिया जाता था, जिससे मां और बच्चा एक-दूसरे से दूर हो जाते थे। लेकिन इस नए केयर सेंटर के शुरू होने से अब गंभीर स्थिति में भी नवजात शिशु और मां को अलग-अलग रखने के बजाय एक ही वार्ड में, एक साथ रखकर समुचित इलाज दिया जा सकेगा।
‘कंगारू मदर केयर’ से नवजातों को मिलेगा अमृत समान स्पर्श
चिकित्सकों और विशेषज्ञों के अनुसार, यह सेंटर प्राकृतिक व्यवहार पर आधारित है। जिस प्रकार कंगारू अपने बच्चे के पैदा होने के बाद उसे सुरक्षित रखने के लिए लगातार अपने शरीर से चिपका कर रखता है, ठीक उसी तरह यह तकनीक भी काम करती है। मां का निरंतर शारीरिक स्पर्श और ‘कंगारू मदर केयर’ (KMC) नवजात शिशु के लिए किसी अमृत से कम नहीं है। चिकित्सकों का मानना है कि जब मां और बच्चा एक-दूसरे के करीब रहते हैं, तो बच्चे की रिकवरी की रफ्तार दोगुनी हो जाती है।
शिशु व मातृ मृत्यु दर को कम करने में मील का पत्थर
इस सेंटर के शुरू होने से रीवा और आसपास के पूरे विंध्य क्षेत्र के स्वास्थ्य परिदृश्य में बड़ा बदलाव आएगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, मां और बच्चे के साथ रहने से नवजातों में मानसिक और शारीरिक विकास काफी तेजी से और बेहतर होता है। इसके साथ ही बच्चों में अस्पताल जनित संक्रमण (Infection) का खतरा बहुत हद तक घट जाता है और ब्रेस्ट फीडिंग (स्तनपान) की प्रक्रिया बेहद जल्दी और आसानी से एस्टैब्लिश हो जाती है। सिर्फ शिशुओं को ही नहीं, बल्कि प्रसव के बाद माताओं में होने वाले पोस्टपार्टम डिप्रेशन (तनाव और अवसाद) को भी इस स्पर्श चिकित्सा के जरिए कम किया जा सकता है। कुल मिलाकर, यह सेंटर रीवा में शिशु और मातृ मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने तथा अंचल की स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने में एक मील का पत्थर साबित होगा।




