डेनमार्क (Denmark) की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसन (Mette Frederiksen) ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड (Greenland )पर हमला या कब्जा करने की कोशिश की, तो इससे NATO गठबंधन का अंत हो जाएगा। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की हालिया टिप्पणियों के जवाब में आया, जहां उन्होंने ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात कही थी। यह विवाद वेनेजुएला (Venezuela) पर अमेरिकी कार्रवाई के दौरान शुरू हुआ और अब यूरोपीय देशों में तनाव बढ़ा रहा है।
पूरा मामला क्या है?
यह विवाद ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से जुड़ा है। ट्रंप लंबे समय से ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने या खरीदने की बात करते रहे हैं। ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है, जहां अमेरिका का एक सैन्य अड्डा थुले एयर बेस (Thule Air Base) है। ट्रंप इसे राष्ट्रीय सुरक्षा, खनिज संसाधनों और आर्कटिक (Arctic) में रूस-चीन (Russia-China) की गतिविधियों के खिलाफ महत्वपूर्ण मानते हैं।
2019 में ट्रंप ने ग्रीनलैंड खरीदने की पेशकश की थी, जिसे डेनमार्क ने “बकवास” कहा था। अब 2026 में, वेनेजुएला हमले के बाद ट्रंप ने फिर से ग्रीनलैंड पर फोकस किया। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस (JD Vance) ने मार्च 2025 में ग्रीनलैंड का दौरा किया और डेनमार्क पर कम निवेश का आरोप लगाया। विवाद तब भड़का जब अमेरिकी अधिकारी स्टीफन मिलर की पत्नी केटी मिलर (Katie Miller) ने सोशल मीडिया पर ग्रीनलैंड का नक्शा अमेरिकी झंडे में रंगा पोस्ट किया, कैप्शन “जल्द ही” के साथ। इससे डेनमार्क और ग्रीनलैंड में आशंकाएं बढ़ीं। ट्रंप ने मोनरो डॉक्ट्रिन (Monroe Doctrine) का हवाला दिया, जो 1823 की अमेरिकी नीति है, जो यूरोपीय देशों को अमेरिकी महाद्वीप में दखल से रोकती है।
ट्रंप ने वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले के दौरान पत्रकारों से कहा कि वह 20 दिन में ग्रीनलैंड पर बात करेंगे। उन्होंने ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की संभावना से इनकार नहीं किया और सैन्य कार्रवाई की बात की। ट्रंप ने इसे अमेरिका की दो सौ साल पुरानी विदेश नीति के तहत बताया, जहां मोनरो डॉक्ट्रिन अब पुरानी हो चुकी है, लेकिन अमेरिका आगे बढ़कर कार्रवाई करेगा। उन्होंने ग्रीनलैंड को अमेरिका की सुरक्षा के लिए जरूरी बताया, जहां से आर्कटिक में मिसाइल निगरानी (Missile Surveillance) और संसाधन मिल सकते हैं।
ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन (Jens-Frederik Nielsen) ने 4 जनवरी 2026 को बयान जारी कर कहा कि ट्रंप की ग्रीनलैंड को वेनेजुएला से जोड़कर सैन्य हस्तक्षेप की बात “गलत और अनादरपूर्ण” है। उन्होंने कहा कि इससे कोई घबराहट नहीं है और केटी मिलर की पोस्ट से कुछ नहीं बदलता। ग्रीनलैंड ने अमेरिकी धमकी को खारिज किया और अपनी संप्रभुता पर जोर दिया।
यूरोपीय देशों ने क्या कहा?
- डेनमार्क: PM फ्रेडरिकसन ने टीवी इंटरव्यू में कहा कि ग्रीनलैंड पर हमला NATO का अंत होगा, क्योंकि डेनमार्क और ग्रीनलैंड दोनों NATO सदस्य हैं। उन्होंने अमेरिकी कार्रवाई को “संप्रभुता का उल्लंघन” बताया और कहा कि इससे गठबंधन में कुछ नहीं बचेगा।
- अन्य यूरोपीय देश: यूरोपीय यूनियन (European Union) ने चिंता जताई, लेकिन स्पष्ट निंदा नहीं की। फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने NATO की एकजुटता पर जोर दिया, लेकिन अमेरिका को सीधे चुनौती नहीं दी। कुछ यूरोपीय लीडर्स ने इसे ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति का हिस्सा बताया, जो गठबंधनों को कमजोर कर सकती है।
यह मामला भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा रहा है, जहां ग्रीनलैंड से अमेरिका को आर्कटिक में लाभ मिल सकता है, लेकिन इससे NATO में फूट पड़ सकती है। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाओं का इंतजार है।
