दिल्ली अग्निकांड: जिस होटल में आग लगी वो लोगों की जान से खेल रहा था

दिल्ली के मालवीय नगर (Delhi Malviya Nagar Fire incident) में हुए भीषण होटल आग हादसे (Delhi Hotel Fire Tragedy) की जांच में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। शुरुआती जांच में पता चला है कि जिस फ्लरिश स्टे होटल (Flourish Stay Hotel) में आग लगी, उसे केवल 6 कमरों के लिए लाइसेंस मिला था, लेकिन वहां कथित तौर पर 25 कमरे बनाकर होटल संचालित किया जा रहा था। आरोप है कि मुनाफे के लिए सुरक्षा नियमों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया, जिसकी कीमत 21 लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने इस भवन को बेड एंड ब्रेकफास्ट श्रेणी में केवल 6 कमरों की अनुमति दी थी। लेकिन होटल प्रबंधन ने क्षमता से कई गुना ज्यादा कमरे बना दिए। इनमें कुछ कमरे बेसमेंट में भी बनाए गए थे, जहां आपात स्थिति में बाहर निकलना बेहद मुश्किल था।

फायर एनओसी (Fire NOC) भी नहीं थी

दिल्ली फायर सर्विस (Delhi Fire Service) के अधिकारियों के अनुसार इस इमारत को कभी भी फायर अनापत्ति प्रमाण पत्र (Fire No Objection Certificate – NOC) जारी नहीं किया गया था। यानी होटल बिना जरूरी अग्नि सुरक्षा मंजूरी के संचालित किया जा रहा था।

हादसे के बाद दिल्ली के गृह मंत्री (Home Minister) ने जिला प्रशासन (District Administration) और एसडीएम (SDM) को अवैध इमारतों और नियमों का उल्लंघन कर चल रहे कारोबारों के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं।

एक ही रास्ता बना मौत का जाल

जांच में सामने आया है कि बेसमेंट प्लस ग्राउंड फ्लोर और पांच मंजिलों वाली यह इमारत 15 मीटर से अधिक ऊंची थी। ऐसे भवनों में सुरक्षा नियमों के अनुसार कम से कम दो सीढ़ियां और अलग-अलग निकास मार्ग होना जरूरी माना जाता है। लेकिन होटल में आने-जाने के लिए केवल एक ही रास्ता था।

सबसे गंभीर बात यह रही कि भवन में वेंटिलेशन की कोई व्यवस्था नहीं थी। अधिकांश खिड़कियां पूरी तरह सील थीं। इसके कारण आग लगने के बाद धुआं और गर्मी बाहर नहीं निकल सके और कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत धुएं से भर गई।

जान बचाने के लिए खिड़कियां तोड़कर कूदे लोग

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आग बेसमेंट और ग्राउंड फ्लोर की तरफ से शुरू हुई। चूंकि एकमात्र एंट्री और एग्जिट भी उसी दिशा में था, इसलिए ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोगों के पास निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा। कई लोगों ने खिड़कियां तोड़ीं और जान बचाने के लिए ऊंचाई से छलांग लगा दी।

स्थानीय निवासी अंजुम ने आरोप लगाया कि सुबह करीब 8 बजे से दमकल विभाग (Fire Brigade) को सूचना दी जा रही थी, लेकिन दमकल की गाड़ियां करीब 9:40 बजे मौके पर पहुंचीं। उनका दावा है कि यदि राहत और बचाव कार्य समय पर शुरू होता, तो कई जानें बचाई जा सकती थीं।

21 मौतों के बाद उठे बड़े सवाल

इस दर्दनाक हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 40 लोग घायल बताए जा रहे हैं। मृतकों में कई विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। घायलों का इलाज एम्स ट्रॉमा सेंटर (AIIMS Trauma Centre) और मैक्स अस्पताल (Max Hospital) में चल रहा है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि बिना फायर एनओसी, बिना पर्याप्त निकास मार्ग और लाइसेंस से कई गुना अधिक कमरे बनाकर होटल कैसे संचालित होता रहा। जांच एजेंसियां अब होटल प्रबंधन, स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की भूमिका की जांच कर रही हैं। यदि आरोप सही पाए गए तो यह मामला सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण माना जाए

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