Karnataka HIV Cases: कर्नाटक में युवाओं के बीच एचआईवी के मामलों को बढ़ता हुआ देखते हुए सोशल मीडिया पर चर्चा का माहौल देखने को मिल रहा है इसी बीच राज्य सरकार ने कॉलेज में एचआईवी जागरूकता और जांच सिविर आयोजित करने क्यों लेकर पहल शुरू करदी है। तो चलिए हम जानते हैं कि एचआईवी केसेस की जांच के लिए अचानक इतनी एचआईवी कैंप की जरूरत क्यों है?
HIV Cases को लेकर सरकार ने क्यों उठाया हैं यह कदम?
कर्नाटक सरकार ने इंजीनियरिंग डिग्री और अन्य उच्च संस्थानों में एचआईवी जागरूकता अभियान चलाने का फैसला ले लिया है। इसका उद्देश्य युवाओं में एचआईवी के संक्रमण से बचाव करना और समय रहते उन्हें इसके महत्व के बारे में जागरूक करना बहुत जरूरीहै। डॉक्टर के अनुसार 18 से 25 साल के बच्चों में एचआईवी संक्रमण के मामले सामने आने के कारण युवाओं तक सही जानकारी पहुंचना बहुत जरूरी है। सरकार का मानना है कि कॉलेज ऐसे स्थान है जहां बड़ी संख्या में युवा मौजूद होते हैं इसलिए जागरूकता अभियान और हेल्थ की जांच का सबसे प्रभावी माध्यम यही साबित हो सकता है।
ये भी पढ़े: भारत ने 2030 तक Hepatitis खत्म करने की मुहिम तेज की, मुफ्त जांच, इलाज…
अब कॉलेजों में HIV Cases को लेकर क्या होगा?
कॉलेज में लगाए जाने वाले शिविर के दौरान छात्रों को एचआईवी संक्रमण के कारण बचाव और इलाज के बारे में सारी जानकारी दी जाएगी इसके साथ ही प्रशिक्षित स्वास्थ्य विशेषज्ञ यानी डॉक्टरों द्वारा गोपनीय काउंसलिंग भी दीजाएगी। इस कैंपों में एचआईवी जांच केवल सुरक्षित होगी किसी भी छात्र का टेस्ट उसकी सहमति के बिना नहीं किया जाएगा। अगर किसी व्यक्ति की रिपोर्ट पॉजिटिव दिखती है तो उसे सरकारी हेल्थ सेवाओं के माध्यम से मुक्त इलाज और एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी दी जाएगी।
7,000 छात्रों के HIV पॉजिटिव होने का दावा कितना सही है?
हाल ही के दिनों में सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टर्स में ऐसा दावा किया गया है कि कर्नाटक में 7000 से अधिक छात्र एचआईवी के मामलों से पॉजिटिव पाए गए हैं लेकिन कर्नाटक स्टेट एड्स प्रिवेंशन समिति ने इस दावे को पूरी तरह से भ्रामक बतायाहै। संस्था के द्वारा स्पष्ट बताया गया है कि उनके पास छात्र श्रेणी के आधार पर अलग से कोई भी ऑफिशियल आंकड़ा नहीं है साथ में यह भी बताया गया है कि कॉलेज में एचआईवी टेस्ट अनिवार्य नहीं है बल्कि पूरी तरह से स्वैच्छिक किए गएहैं। इसलिए वायरल हो रहे डाबो को ऑफिशियल रूप से सही नहीं मानना चाहिए।
HIV कैसे फैलता है और ये कैसे नहीं होगा?
एचआईवी मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संबंध होता है जो कि संक्रमित हुई यह सीरीज के उपयोग या फिर संक्रमित रक्त चढ़ाने और संक्रमित मां से बच्चों में फैलने का खतरा होता है। वही हाथ मिलाने गले मिलने साथ बैठकर खाना खाने एक ही शौचालय इस्तेमाल करने या फिर किसी तरह के मच्छर काटने से या बीमारी नहीं होतीहै। डॉक्टर लोगों से अपील करते हैं कि इस बीमारी को लेकर गलत धारणाओं से बच्चे और सही जानकारी पर ही भरोसा करें।
ये भी पढ़े: ALT Level बढ़ने का क्या मतलब है? जानिए लीवर की सेहत का बड़ा संकेत
इसपर सरकार का उद्देश्य क्या है?
कर्नाटक सरकार का कहना है कि इस अभियान का मकसद किसी भी व्यक्ति को डरना नहीं है बल्कि युवाओं में जागरूकता का माहौल बढ़ता है समय पर जांच के लिए प्रेरित करना और जरूरत पड़ने पर उनके लिए इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना है।HIV Cases के संक्रमण की रोकथाम के लिए सही जानकारी और समय पर जांच सबसे प्रभावी उपाय है।

