Chhatarpur Dr. Neeraj Pathak Murder Case: जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि जेल मैनुअल के नियमों के अनुसार, ममता इस राहत की हकदार नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि चूंकि उनकी एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए उन्हें वहां उचित आवेदन दायर करना चाहिए।
Chhatarpur Dr. Neeraj Pathak Murder Case: छतरपुर जिले में 2021 में हुए डॉ. नीरज पाठक हत्याकांड की दोषी, उनकी पत्नी और सीनियर प्रोफेसर ममता पाठक की हाईकोर्ट में दायर ओपन जेल में स्थानांतरण की याचिका शुक्रवार को खारिज हो गई। ममता पाठक वर्तमान में छतरपुर जिला सत्र न्यायालय द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा काट रही हैं। उन्होंने याचिका में मांग की थी कि उनके मानसिक और शारीरिक रूप से अस्वस्थ बेटे की देखभाल के लिए उन्हें जेल की सामान्य बैरक के बजाय ओपन जेल में रखा जाए।
जस्टिस विशाल मिश्रा की अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि जेल मैनुअल के नियमों के अनुसार, ममता इस राहत की हकदार नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि चूंकि उनकी एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, इसलिए उन्हें वहां उचित आवेदन दायर करना चाहिए।
हाईकोर्ट ने पुष्ट की सजा, हत्या में तीसरे व्यक्ति की संलिप्तता नहीं
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि हत्या के दिन किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता के कोई सबूत नहीं मिले। घटनास्थल और परिस्थितियों से यह साफ था कि ममता पाठक ने अपने पति डॉ. नीरज को पहले नशीली दवा देकर बेहोश किया और फिर करंट लगाकर उनकी हत्या कर दी। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस देवनारायण मिश्रा की डिवीजन बेंच ने 29 जुलाई 2025 को सुनवाई के बाद ममता की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा।
2022 में सुनाई गई थी उम्रकैद की सजा
छतरपुर के गवर्नमेंट कॉलेज की प्रोफेसर ममता पाठक पर आरोप है कि उन्होंने 20 अप्रैल 2021 को अपने पति डॉ. नीरज पाठक की करंट लगाकर हत्या की थी। छतरपुर जिला सत्र न्यायालय ने 29 जून 2022 को उन्हें दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले को ममता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी सजा को बरकरार रखा।
याचिका में क्या थी ममता की दलील?
जबलपुर केंद्रीय जेल में सजा काट रही ममता पाठक ने अपनी याचिका में कहा कि वह अपने मानसिक और शारीरिक रूप से अस्वस्थ बेटे की एकमात्र देखभालकर्ता हैं। उन्होंने अपनी उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए जेल की कठोर परिस्थितियों को उनके लिए असहनीय बताया और ओपन जेल में सजा काटने की मांग की।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान गवर्नमेंट एडवोकेट सुमित रघुवंशी ने बताया कि ममता ने 14 जुलाई 2025 को जेल मुख्यालय को इसी तरह का आवेदन दिया था, जिसे खुले कॉलोनी नियम 2009 के तहत खारिज कर दिया गया था। कोर्ट ने जेल मुख्यालय के आदेश को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी और ममता को सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दायर करने की सलाह दी।
20 साल से चला आ रहा था दंपती में विवाद
जानकारी के मुताबिक, डॉ. नीरज पाठक और ममता पाठक के बीच पिछले 20 साल से विवाद चल रहा था। ममता को शक था कि उनके पति के किसी अन्य महिला से संबंध हैं। इस शक के चलते वह रात में डॉ. नीरज को नींद का इंजेक्शन देती थीं। वहीं, डॉ. नीरज का कहना था कि उनकी पत्नी की तबीयत खराब रहने के कारण वह नींद की दवा देते थे। ममता ने अपने पति के कथित संबंधों को लेकर छतरपुर पुलिस, सागर आईजी और भोपाल डीजीपी तक शिकायतें की थीं, लेकिन जांच में ये आरोप बेबुनियाद पाए गए।
डॉ. नीरज ने दो साल पहले लिया था VRS
डॉ. नीरज पाठक छतरपुर जिला अस्पताल में मेडिसिन विशेषज्ञ थे। पत्नी के साथ विवाद के चलते उन्होंने दो साल पहले वीआरएस ले लिया था और अस्पताल आना बंद कर दिया था। इसके बाद वे घर पर मरीजों का इलाज करते थे। 1 मई 2021 को ममता ने सिविल लाइन थाने में सूचना दी कि 29 अप्रैल 2021 को उनके पति ऊपरी कमरे में लेटे थे और रात 9 बजे खाना देने गईं तो वे जवाब नहीं दे रहे थे। ममता ने बताया कि उन्हें और उनके बेटे को बुखार था, जिसके चलते वह 30 अप्रैल को बेटे के साथ झांसी इलाज के लिए गई थीं और लौटकर पुलिस को सूचना दी। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में डॉ. नीरज की मौत करंट लगने से होना पाया गया।
कोर्ट में ममता ने रासायनिक विश्लेषण पेश कर चौंका दिया
सुनवाई के दौरान ममता ने हाईकोर्ट में पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया का रासायनिक विश्लेषण पेश कर चौंका दिया था। उन्होंने कहा कि पोस्टमॉर्टम में थर्मल बर्न और इलेक्ट्रिक बर्न में अंतर करना मुश्किल होता है। करंट से शरीर में मेडिकल मेटल के कण टिशू में जम जाते हैं, जिन्हें लैब में एचसीएल या नाइट्रिक एसिड में घोलकर परीक्षण किया जाता है। हालांकि, कोर्ट ने उनके तर्कों को खारिज करते हुए सजा को बरकरार रखा।
