Chandra Grahan 2026 on Holi : इस बार होली का पर्व 2 मार्च से शुरू हो रहा है। कुछ लोगों को संशय है कि होलिका दहन 3 मार्च को होगा और रंगो का पर्व 4 मार्च को होगा। लेकिन, ऐसा नहीं है, इस साल होलिका दहन 2 मार्च को होगी और रंगभरी होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। इसके पीछे खगोलीय घटना कारण है। दरअसल, 3 मार्च को चंद्र ग्रहण लग रहा है। इस बार होली के दिन चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है, जिसकी वजह से कई सवाल लोगों के मन में हैं। जैसे कि क्या यह ग्रहण भारत में दिखेगा, सूतक का समय क्या रहेगा और इस ग्रहण का धार्मिक कार्यों पर क्या असर पड़ेगा।
साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को
इस साल का पहला चंद्र ग्रहण फाल्गुन मास की पूर्णिमा पर पड़ रहा है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व भी अधिक है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च को होगा। यह ग्रहण दोपहर 2:16 बजे शुरू होकर शाम 5:33 बजे खत्म होगा। यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसे एशिया और ऑस्ट्रेलिया के कई देशों में देखा जा सकेगा। ज्योतिषियों के अनुसार, पूर्ण चंद्र ग्रहण एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है, जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, जिससे चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में आ जाता है।
क्या यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा?
यह ग्रहण भारत में देखा जा सकेगा। खासतौर पर पूर्वी भारत में इसका दृश्य बहुत स्पष्ट होगा। अरुणाचल प्रदेश, असम, नगालैंड, मणिपुर और मिजोरम में यह ग्रहण पूर्ण या बहुत स्पष्ट रूप में देखा जाएगा। कोलकाता, गुवाहाटी, ईटानगर और आइजोल जैसे शहरों में भी यह दृश्य बहुत आकर्षक रहेगा। वहीं, दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई, लखनऊ और जयपुर जैसे शहरों में यह आंशिक रूप से दिखाई देगा।
चंद्र ग्रहण का सूतक काल कब माना जाएगा?
चंद्र ग्रहण के साथ-साथ सूतक का भी समय तय है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण शुरू होने से लगभग 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इस साल का सूतक 3 मार्च की सुबह 9:39 बजे से शुरू होगा और ग्रहण समाप्त होने तक रहेगा। इसे ध्यान में रखते हुए, इस दिन धार्मिक कार्यों में सावधानी बरतनी चाहिए।
क्या होली के दिन चंद्र ग्रहण का प्रभाव पड़ेगा?
वैदिक पंचांग के अनुसार, होलिका दहन भी 3 मार्च को ही किया जाएगा, और उस दिन चंद्र ग्रहण का असर भी रहेगा। इसलिए, होलिका दहन को लेकर कुछ नियम और परंपराएं माननी जरूरी हैं। विद्वानों का मानना है कि ग्रहण के कारण होलिका दहन सूतक काल शुरू होने से पहले या फिर शुभ मुहूर्त में ही करना चाहिए।
सूतक काल में क्या करें?
सूतक काल में धार्मिक कार्यों में सावधानी बरतनी चाहिए। इस समय भगवान की प्रतिमा को हाथ नहीं लगाना चाहिए और कोई नया शुभ कार्य शुरू नहीं करना चाहिए। विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य भी टाल देना बेहतर रहता है। साथ ही, इस समय भोजन बनाना और ग्रहण करना भी मना है। गर्भवती महिलाओं को भी इस दौरान विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
चंद्र ग्रहण 2026 में चंद्रमा की स्थिति
इस दिन चंद्रमा सिंह राशि में रहेगा और केतु के साथ युति बनाएगा। ज्योतिष के अनुसार, इस ग्रह स्थिति से कुछ राशियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे मानसिक तनाव या चुनौतियों का सामना हो सकता है।
चंद्र ग्रहण के प्रकार
चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं:
1. आंशिक चंद्र ग्रहण – जब चंद्रमा का सिर्फ कुछ हिस्सा ही पृथ्वी की छाया में आता है।
2. पूर्ण चंद्र ग्रहण – जब चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में चला जाता है और उसका रंग लाल या ताम्बे जैसा दिखता है।
3. उपछाया चंद्र ग्रहण – जब चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया से गुजरता है, तो हल्का प्रभाव दिखता है, जिसे पहचानना थोड़ा मुश्किल होता है।
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